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सवाल हमारे: जवाब आपके!

केंद्र की सत्ता संभालने के बाद मोदी सरकार ने अच्छे दिन के सपने दिखाए थे। परंतु आज देश में साल दर साल आत्महत्याओं का मामला बढ़ता ही जा रहा है। यह आंकड़ा देश में रोजाना ४५० पर पहुंच गया है। देश में हो रही आत्महत्याओं से केंद्र की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी?

  • २०२४ में बदलाव तय है
    केंद्र सरकार की नाकामियों की वजह से जनता त्रस्त है लेकिन सरकार अच्छे दिनों में खोई हुई है। २०२४ में बदलाव होना तय है।
    लाला गुप्ता, कल्याण
  • सपने बने अच्छे दिन
    अच्छे दिन अब सपना बनकर रह गए हैं। बेरोजगारी के चलते लोग आत्महत्या कर रहे हैं। केंद्र सरकार कुंभकर्णी नींद में सोई हुई है।
    योगेश शुक्ला, डोंबिवली
  • जनता निराश व हताश है
    केंद्र सरकार के अच्छे दिन के नारे पर लोगों ने आंख मूंदकर भरोसा किया था लेकिन अब जनता अच्छे दिन को लेकर निराश और हताश हो गई है। आम लोगों को जीवन-यापन करना भारी पड़ रहा है, लोग मजबूर होकर आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार सोई हुई है।
    अशोक ठाकुर, भायंदर
  • देश हित में नहीं ‘ऑपरेशन लोटस’
    मोदी सरकार द्वारा दिखाए गए अच्छे दिन के सपने का आलम यह है कि आज कमरतोड़ महंगाई, बेरोजगारी में बेतहाशा वृद्धि, डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रहे रुपए के मूल्य से देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आर्थिक संकट के कारण आत्महत्या के मामलों में वृद्धि होती जा रही है लेकिन इन सबसे बेखबर होकर मोदी सरकार सत्तालोभ में ‘ऑपरेशन लोटस’ में व्यस्त है। यह देश के हित में नहीं है।
    इरबा कोनापुरे, मीरा रोड
  • सरकार ने दिखाए बुरे दिन
    बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी तथा मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के चलते न केवल किसान और युवक बल्कि सबसे ज्यादा संख्या में व्यापारियों ने आत्महत्या कर ली है। इसका खुलासा एक सर्वे में हो चुका है। अच्छे दिन का सपना दिखाकर सत्ता में आई मोदी सरकार के कार्यकाल में देश को और कितने बुरे दिन देखने पड़ेंगे, यही विचार आम लोगों के दिलो-दिमाग पर छाया हुआ है।
    अशोक तिवारी, ठाणे
  • महंगाई की मार से बढ़ रही है आत्महत्या
    देश में इन दिनों महंगाई के चलते लोग अपने जीवन की बलि चढ़ा रहे हैं। एक जानकारी के मुताबिक ४५० लोग प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे हैं। इस संख्या को लेकर केंद्र सरकार गंभीर नहीं है। सरकार को आत्महत्या की संख्या को लेकर आत्मचिंतन करना चाहिए।
    विद्यासागर तिवारी, उल्हासनगर
  •  आज का सवाल?
    हिंदुस्थान में बढ़ते अपराध का ग्राफ चिंता का कारण है। एनसीआरबी डेटा के मुताबिक हर घंटे ८२ हत्याएं हो रही हैं। देश में २०२१ में हर घंटे ११ लोगों का अपहरण और प्रतिदिन औसतन ८६ बलात्कार के मामले दर्ज किए गए। क्या यही अच्छे दिन हैं?
    आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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