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सवाल हमारे, जवाब आपके!

कल सीबीआई ने एक बार फिर पी. चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम के मुंबई समेत ९ ठिकानों पर छापा मारा। कार्ति ने ट्वीट कर कहा कि ‘यह इतनी बार हो चुका कि मैं गिनती भी भूल चुका हूं।’ आखिर मोदी सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाकर क्या जताना चाहती है?

• डराने के लिए कार्रवाई
केंद्र सरकार ने सीबीआई व ईडी को अपनी कठपुतली बना रखा है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ नेताओं को या मोदी के खिलाफ बोलनेवालों के खिलाफ कार्रवाई व डराने के लिए किया जा रहा है।
-जितेंद्र त्रिपाठी ‘पिंटू’, भिवंडी

• संकुचित मानसिकता
कार्ति चिदंबरम के मुंबई समेत ९ ठिकानों पर की गई छापेमारी संकुचित मानसिकता का प्रतीक है। इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा प्रतिशोध की चाल चल रही है।
-पम्मा अहिरे, उल्हासनगर

• गलत नीति का बीज
विरोधी पक्ष के नेताओं को परेशान करने के लिए भाजपा सरकारी तंत्र का गलत इस्तेमाल कर रही है। चिदंबरम इसका उदाहरण हैं। भाजपा गलत नीति का बीज बो रही है।
-संजय सिंह, मीरा रोड

• बदले की भावना
विपक्षी नेता केंद्र के बदले की भावना का शिकार हो रहे हैं। हर बार छापेमारी में हाथ कुछ नहीं लगता है फिर भी छापेमारी की जाती है। यह केंद्र की हताशा का प्रतीक है।
-अंकुश दुबे, अंबरनाथ

• लोकतंत्र का हनन
विपक्षी दलों के नेताओं और उनके परिवार के लोगों को निशाना बनाकर केंद्र सरकार अपनी धाक जमाना चाहती है, जो कि लोकतंत्र का हनन है।
-प्रशांत अहिरे, डोंबिवली

• ध्यान भटकाना है
लोगों का ध्यान भटकाने का यह आसान तरीका है। जब भी कोई विपक्ष का नेता महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या घरेलू गैस के बढ़ते हुए दामों की बात करेगा तो उस पर सीबीआई, ईडी जैसी एजेंसी का इस्तेमाल कर उसे बदनाम किया जाता है।
-परेश भाई, अंधेरी

• सरकारी तंत्र की चूक
कार्ति चिदंबरम का यह कहना कि अब तो वह गिनती भूल चुके हैं, इस बात को दर्शाता है कि कहीं-न-कहीं सरकारी तंत्र चूक कर रहा है। हर बार एक ही व्यक्ति को निशाना बनाना सत्ता के दुरुपयोग को दर्शाता है।
-विनय प्रताप सिंह, कल्याण

• नाकामी छिपाने का प्रयास
भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ जो भी दल मुद्दा उठाता है, उसके नेताओं के ऊपर सीबीआई व ईडी का छापा मारकर वह अपनी नाकामी को छिपाने का प्रयास करती है।
-पप्पू खान, नालासोपारा

आज का सवाल?
प्रयागराज में कल एक बार फिर गंगा किनारे दफन सैकड़ों लाशें बाहर आ गईं। यूपी सरकार इस पर खामोश है। कोरोना की दूसरी लहर में भी ऐसा ही दृश्य सामने आया था। आखिर योगी राज में ऐसा बार-बार क्यों हो रहा है?
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