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सवाल हमारे: जवाब आपके!

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर केंद्र सरकार चारों तरफ बखान करती फिर रही है। वहीं देश की आबादी में बांग्लादेशियों की घुसपैठ बढ़ती जा रही है, बांग्लादेशियों ने देश की ‘डेमोग्राफी’ ही बदल दी है। झारखंड के ५ जिले बांग्लादेशी बहुसंख्यक हो गए हैं। क्या केंद्र सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर गंभीरता से काम करती दिख रही है?

  • घुसपैठ देश के लिए खतरा
    केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के बखान से हालात नहीं सुधरेंगे। आज हजारों की संख्या में बांग्लादेशी प्रतिदिन भारत के अलग-अलग शहरों में आ रहे हैं। हमारे ही लोग कुछ पैसों के लोभ के कारण उसके सभी कागजात बनवा देते हैं। फिर वो अपने आपको भारतीय बताते हैं। घुसपैठ देश के लिए खतरा है। केंद्र सरकार को बोल बच्चन छोड़ कर इस समस्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए
    -बीरू झा- भायंदर
  • केंद्र सरकार हो रही है विफल
    जिस तरह से झारखंड के ५ जिले बांग्लादेशी बहुसंख्यक हो गए हैं। यह देश के भविष्य के लिए बहुत ही चिंताजनक बात है। इससे यह प्रतीत होता है कि देश में बांग्लादेशियों की घुसपैठ में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसे रोकने में केंद्र सरकार विफल रही है और गंभीर भी नहीं है। नागरिकता संशोधन कानून का शगूफा छोड़कर केंद्र सरकार सिर्फ वाहवाही लूटते ही दिख रही है।
    आर.एस. यादव- भायंदर
  • हिंदुस्थान के भविष्य पर खतरा
    हिंदुस्थान में बांग्लादेशियों की लगातार घुसपैठ को रोकने में केंद्र सरकार असफल साबित हो रही है। बांग्लादेशी भारत के अलग- अलग जिलों में आकर अपना बसेरा बना ले रहे हैं। इसी तरह झारखंड के ५ जिले में ज्यादा करके बांग्लादेशी आकर बस गए हैं, जो देश के भविष्य के लिए बहुत ही खतरा है।
    – इनामुलहक, नालासोपारा
  • घुसपैठियों को भेजने में मोदी सरकार विफल
    बांग्लादेशियों की घुसपैठ रोकने और उन्हें वापस भेजने में मोदी सरकार पूरी तरह असफल रही है। इसी का नतीजा है कि आज देश के कई राज्यों सहित सीमावर्ती भागों में घुसपैठियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।
    -प्रभात सिंह, बोईसर
  • कठोर कानून बनाने की जरूरत है
    देश में कठोर कानून के अभाव के चलते देश मे घुसपैठ बढ़ रही है जबकि केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चारों तरफ हो-हल्ला मचा रही हैं। हिंदुस्थान मे विदेश मंत्रालय के लचीलेपन के चलते यह गति हो रही हैं, जो देश के लिए खतरा है।
    -कृष्णा मढवी, उल्हासनगर
  • आज का सवाल?
    भारतीय रेलवे ने १५ हजार रुपए से कम आमदनी वाले स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों को ठहराव न देने का निर्णय लिया है। ऐसे स्टेशन पिछड़े क्षेत्रों में अधिक हैं। रेलवे का यह निर्णय दूर-दराज के गांवों में रहनेवालों के साथ अन्याय करनेवाला है। भारतीय रेलवे के इस निर्णय पर आप क्या सोचते हैं? आप अपनी प्रतिक्रिया तुरंत लिख भेजें।
    आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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