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सवाल हमारे: जवाब आपके!

भारतीय रेलवे ने १५ हजार रुपए से कम आमदनी वाले स्टेशनों पर एक्सप्रेस ट्रेनों को ठहराव न देने का निर्णय लिया है। ऐसे स्टेशन पिछड़े क्षेत्रों में अधिक हैं। रेलवे का यह निर्णय दूर-दराज के गांवों में रहनेवालों के साथ अन्याय करनेवाला है। भारतीय रेलवे के इस निर्णय पर आप क्या सोचते हैं? आप अपनी प्रतिक्रिया तुरंत लिख भेजें।

  • गांव में बढ़ाई जाएं सुविधाएं
    यदि सुविधाएं बढ़ाई जाएं तो गांवों का भी विकास होगा। रेलवे का यह निर्णय एकतरफा और गलत ही है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवालों को इस निर्णय का नुकसान होना निश्चित है।
    -बृजेश दीक्षित, अंबरनाथ
  •  बेहद भेदभाव पूर्णवाला निर्णय
    रेलवे का यह निर्णय बेहद ही भेदभाव वाला निर्णय है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहनेवालों के साथ यह सौतेला व्यवहार है। इससे चेन पुलिंग जैसी घटनाओं में वृद्धि होगी। एक तरफ देश के प्रत्येक गांव को सड़क से जोड़ने की मुहिम चल रही है तो रेलवे सुविधा से ग्रामीण रहिवासियों को वंचित करना, कहां तक न्याय संगत है?
    -मनीषा ज. मिश्रा, विरार
  •  सरकार का दोहरा मापदंड
    सरकार एक तरफ गांवों को विकसित करने का हर तरह प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों के स्टेशनों पर एक्सप्रेस गाड़ियों के स्टॉप पर रोक लगाने की बात कह रही है। सरकार का यह दोहरा मापदंड उचित नहीं है।
    -मोहम्मद मंजूर, नालासोपारा
  • विद्यार्थियों पर विपरीत असर
    राज्यों के छोटे-छोटे स्टेशन गांवों को शहरों से जोड़ते हैं। कॉलेजों में पढ़नेवाले विद्यार्थी मेल, एक्सप्रेस गाड़ियों से जल्द अपने गंतव्य पर पहुंच जाते हैं। छात्रों तथा नौकरीपेशा वाले लोगों के लिए यह एक अच्छा संसाधन है। सरकार के इन नए नियमों से उन पर विपरीत असर पड़ सकता है।
    -परेश बैंदूर, अंधेरी
  • अनुचित और अव्यावहारिक फैसला
    आमदनी के हिसाब से स्टेशनों पर गाड़ियों के रोकने का रेलवे का फैसला अनुचित और अव्यावहारिक है। कम आबादीवाले क्षेत्रों के लोगों को भी अपने-अपने स्टेशनों से आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का नारा देनेवाली मोदी सरकार की कथनी और करनी की रेलवे ने पोल खोलकर रख दी है।
    -पं. त्रिवेणी प्रसाद पांडेय, ठाणे
  • रेलवे का यह अन्यायपूर्ण कदम है
    एक तरफ मोदी सरकार राष्ट्रपति आदिवासी, पिछड़े समाज से बनाकर उनका मसीहा होने का संकेत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ दुर्गम क्षेत्र जहां पर गरीब लोग रहते हैं। उस परिसर की सुविधा बढ़ाने की बजाय अनदेखी कर रही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण रेलवे प्रशासन द्वारा लिया गया वह निर्णय है। जिन स्टेशनों की आय १५ हजार रुपए से कम है। उस स्टेशन पर मेल, एक्सप्रेस गाड़ियों का स्टॉप ही खत्म करना है। यह कदम अन्यायकारक हैं।
    -एकनाथ पवार, उल्हासनगर
  • आज का सवाल?
    बेतहाशा बढ़ती महंगाई तथा बेरोजगारी से जनता कराह रही है। पिछले महीने में बेरोजगारों के आंकड़ों में २० लाख की वृद्धि हुई है। केंद्र की दिशाहीन नीतियों से बेरोजगार युवाओं की संख्या रोज बढ़ रही है। केंद्र सरकार इस तरफ ध्यान क्यों नहीं दे रही है?
    आप क्या सोचते हैं? तुरंत लिखकर भेजें या मोबाइल नं. ९३२४१७६७६९ पर व्हॉट्सऐप करें।

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