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सवाल हमारे, जवाब आपके?

आज महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अब तो दाल-रोटी खाना भी दूभर होता जा रहा है, क्योंकि अब आटा इंटरनेट डाटा से भी महंगा हो गया है।
 कमर तोड़ रही महंगाई
हिंदुस्थान में महंगाई परेशानी का सबसे बड़ा सबब है। आज महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। टमाटर से लेकर दाल-रोटी खाना भी अब दूभर होता जा रहा है। आलम यह है कि रसोई की रौनक ही गायब हो गई है,जिस पर नकेल कसने की जरूरत है।
– एड. विनय कुमार सिंह, ठाणे
 आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया
कोरोना काल से आम आदमी की स्थिति पिछले दो सालों में जस की तस है, लेकिन महंगाई इन दो सालों में आटा से लेकर डाटा तक, हरी सब्जियों से लेकर सूखे राशन तक, तेल से लेकर लोकल रेल के सफर तक। अभी की मौजूदा सरकार महंगाई पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। महंगाई आसमान छु रही है।
– परमानंद वर्मा, छत्तीसगढ़
 आम आदमी बेहाल
बढ़ती हुई महंगाई ने न केवल आम आदमी की कमर ही तोड़ी है बल्कि उन्हें आत्महत्या करने पर भी मजबूर कर दिया है। आए दिन महंगाई जिस तरह से दिन ब दिन बढ़ती जा रही है, ऐसा लग रहा है कि रोजमर्रा की वस्तुएं भी आम आदमी की पहुंच से दूर हो जाएंगी और एक मिडल क्लास परिवार का जीवन यापन करना भी मुश्किल हो जाएगा।
– राजेश वर्मा, अंधेरी
 हाय रे महंगाई
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में साग-सब्जी और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने जनता की कमर तोड़ दी है। सरकार और सत्तापक्ष पता नहीं क्यों अनजान है। शायद वे अभी चुनावी इरादे और झूठे वादों की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। उन्हें जनता और देश की चिंता क्यों हो उनके घर और बंगले तो काजू, किशमिश और बादाम की प्लेटों से सजे होंगे इतने पर भी उनकी नींद न खुले तो महंगाई की गति सांप की तरह बढ़ती और जनता को डसती चली जाएगी।
– सुरेश चंद्र मिश्रा जौनपुरी, मीरा रोड
 क्या खाएं, क्या पकाएं?
आज महंगाई आम आदमी को रुला रही है। `क्या खाएं और क्या पकाएं’ की नौबत आ गई है। सब्जी हो या फल या फिर अनाज, दालें और मसाले, हर चीज महंगी होती चली जा रही है। अब दाल-रोटी, तेल, गैस और मसालों से लेकर मिर्च, जीरा-प्याज,लहसुन तक के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में लोग सब्जी और रेसिपी में टमाटर व जीरे आदि में कटौती करने को मजबूर हैं। लेकिन इतने पर भी महंगाई को लेकर सरकार एक-दूसरे को कोसने के अलावा कुछ नहीं कर रही है।
– लक्ष्मी मौर्या, अध्यापिका, ठाणे
 विफल होती सरकार
महंगाई को काबू करने के लिए अर्थशास्त्री की आवश्यकता होती है, वहीं केंद्र में बैठी सरकार केवल राजनीति करने में लगी हुई है। महंगाई को काबू करने के लिए वर्तमान मोदी सरकार कोई विशेष कदम उठाती नजर नहीं आ रही है। इसी वजह से महंगाई दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
– वेदिका राठौर, ठाणे
 गरीब हो रहा और गरीब
भले महंगाई को लेकर लोग सड़कों पर न उतरे हों लेकिन देश के मध्यम और निम्न मध्यम श्रेणी यानी आम आदमी महंगाई से परेशान हैं। हालांकि, केंद्र सरकार महंगाई पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल हो गई है।
– शिक्षा यादव, ठाणे

अगले सप्ताह का सवाल?
`फूट डालो, राज करो’ ब्रिटिशों की इस नीति के बाद अब लगता है केंद्र में बैठी भाजपा सरकार `पार्टी तोड़ो, राज करो’ की नीति अपना रही है। `गंदी’ और निचले स्तर की राजनीति करनेवाली भाजपा चुनावी जंग में जीतने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। इस पर आपकी क्या राय है?
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