मुख्यपृष्ठखेलआउट ऑफ पैवेलियन: घर में बब्बर शेर है हिंदुस्थान

आउट ऑफ पैवेलियन: घर में बब्बर शेर है हिंदुस्थान

अमिताभ श्रीवास्तव। अब ये बात सौ फीसद सही हो गई है कि हिंदुस्थानी टीम को कोई उसके घर में आकर नहीं हरा सकता। कम से कम पिछले १५ सालों से तो यही रिकॉर्ड है और ये दुनिया की किसी भी टीम से बेहतर रिकॉर्ड है। घर में बब्बर शेर है हिंदुस्थानी टीम। श्रीलंका पर जीत के बाद हिंदुस्थानी टीम की यह लगातार १५वीं जीत है। टीम को घर में आखिरी टेस्ट सीरीज हार २०१२ में इंग्लैंड के खिलाफ मिली थी। उस समय महेंद्र सिंह धोनी टीम के कप्तान थे। इंग्लैंड ने ४ मैच की सीरीज में पहला मैच हारने के बाद २-१ से जीत हासिल की थी। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया की टीम हिंदुस्थान आई और उसे ४-० से हार झेलनी पड़ी। तब से हिंदुस्थानी टीम ने घर में खेली गई सभी टेस्ट सीरीज को अपने नाम किया है। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अप्रâीका, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, बांग्लादेश, वेस्टइंडीज और अफगानिस्तान की टीम हिंदुस्थान आकर हार का मुंह देख चुकी है। टेस्ट खेलने वाली टीमों में सिर्फ पाकिस्तान, जिंबाब्वे और आयरलैंड ने इस दौरान हिंदुस्थान का दौरा नहीं किया है, अन्यथा उन्हें भी यहां से पराजित कर भेजा जाता।

क्या आईपीएल नहीं खेल पाएंगे हार्दिक?

और अब ये सबसे बड़ी खबर है। खासतौर से गुजरात टाइटंस के लिए कि उसका कप्तान हार्दिक पांड्या क्या आईपीएल खेल भी पाएंगे? दरअसल, लंबे समय से अपनी फिटनेस समस्या से जूझ रहे हार्दिक पांड्या को आईपीएल में खेलने की उम्मीद तो है मगर एक बड़ा सा पेंच फंस रहा है। गुजरात टाइटंस की टीम को २८ मार्च से लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ अपना अभियान शुरू करना है। हार्दिक को लीग में खेलने के लिए फिटनेस टेस्ट पास करना ही होगा। क्रिकेट जगत में कानाफूसी तेज है कि हार्दिक अगले दो दिन तक एनसीए में होंगे और विभिन्न फिटनेस परीक्षण से गुजरेंगे। वो केंद्रीय अनुबंधित क्रिकेटर हैं और उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में टी-२० विश्वकप के बाद से कोई क्रिकेट नहीं खेला है। उन्हें फिटनेस परीक्षण पास करना जरूरी होगा, क्योंकि अब यह पिछले कुछ समय से अनिवार्य हो गया है। पिछले साल श्रेयस अय्यर भी कंधे की चोट के बाद आईपीएल में खेलने से पहले फिटनेस परीक्षण के लिए उपस्थित हुए थे। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या हार्दिक फिटनेस परीक्षा पास कर लेंगे?
वो कौन था जिसने ट्रॉफी पकड़ी?

श्रीलंका को टेस्ट सीरीज में मात देने के बाद जब हिंदुस्थानी टीम ट्रॉफी के साथ थी, तब एक अनजान व्यक्ति के हाथ में न केवल ट्रॉफी थी बल्कि वो टीम के साथ बिल्कुल मध्य में खड़ा होकर फोटो भी खिंचवा रहा था। यही नहीं उसे खुद कप्तान रोहित शर्मा ने ट्रॉफी सौंपी। दरअसल, ये कोई व्यक्ति नहीं बल्कि टीम में नए-नए आए खिलाड़ी के हाथ ट्रॉफी थी। एक परंपरा है कि जीती हुई ट्रॉफी टीम में पदार्पण करने वाले खिलाड़ी को कप्तान सौंपता है। तो पिछले दिनों जब टीम विजयी हुई तो रोहित शर्मा ने ट्राफी सौरभ कुमार को सौंपी, वही ट्रॉफी लेकर फोटो सेशन में बीच में खड़ा होता है। यह रोहित शर्मा की कप्तान के रूप में पहली टेस्ट सीरीज जीत थी, इसके बाद भी उन्होंने टीम के सबसे नए सदस्य सौरभ कुमार को ट्रॉफी थमा दी। सौरभ ने अभी तक टीम के लिए कोई मुकाबला नहीं खेला है, जिसकी वजह से उनका नाम हिंदुस्थानी क्रिकेट में काफी अनजान है। उत्तर प्रदेश के सौरभ बाएं हाथ के स्पिनर हैं, इसके साथ ही निचले क्रम में बल्लेबाजी भी कर सकते हैं। सौरभ कुमार ने सेना और उत्तर प्रदेश के लिए ४६ मुकाबले खेले हैं। इसमें उन्होंने १९६ विकेट लिए हैं। उनका औसत २४.१५ का रहा है। इसके साथ ही उन्होंने १६ बार पारी में ५ विकेट भी लिए हैं। उन्होंने छह बार मैच में १० विकेट लेने का कारनामा किया है।
पुजारा-रहाणे से भारी अय्यर-विहारी

लीजिए विकल्प मिल गया। कप्तान रोहित शर्मा ने भी कह दिया और मैदान पर उनके प्रदर्शन ने भी, यानी अब अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा के लिए वापसी लगभग असंभव हो गई है, क्योंकि उन पर भारी पड़े हैं श्रेयस अय्यर और हनुमा विहारी। हिंदुस्थानी टीम ने दूसरा टेस्ट २३८ रन से जीतकर दो मैचों की शृंखला २-० से अपने नाम की। रहाणे की जगह खेलने वाले अय्यर ने दूसरे टेस्ट में ९२ और ६७ रन बनाए। पुजारा की जगह तीसरे नंबर पर हनुमा विहारी उतरे थे। रोहित ने टीम के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि यह अच्छा प्रदर्शन रहा और मैने निजी तौर पर और एक टीम के रूप में इसका पूरा मजा लिया। हम एक टीम के रूप में कुछ चीजें हासिल करना चाहते थे, जो हमने की। यूं भी अजिंक्य रहाणे रणजी में भी सफल नहीं रह सके, जबकि श्रेयस लगातार शानदार प्रदर्शन करते रहे हैं और फिलहाल हालात ऐसे हैं कि कोई भी उन्हें टीम से अलग रखने की सोच भी नहीं सकता। उधर हनुमा विहारी ने भी एक तरह से वीवीएस लक्ष्मण की याद दिलाई है। हालांकि पुजारा के रिप्लेसमेंट के तौर पर उन्हें देखा जा रहा था, जिसमें वो बिल्कुल सही साबित हुए हैं। लिहाजा सिलेक्टर्स को उन्हें भी टेस्ट टीम से अलग रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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