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आउट ऑफ पैवेलियन : टीम इंडिया के खिलाफ श्रीराम

  • अमिताभ श्रीवास्तव

टीम इंडिया के खिलाफ श्रीराम
कोई अपनी ही टीम के खिलाफ खेले ये तो बड़ी नाइंसाफी होती है। पर जब प्रोफेशनलिज्म में कोई आ जाता है तो उसे अपना देश, अपनी माटी नहीं दिखती बल्कि जहां से उसे पैसा मिलता है, जहां उसे खरीदा जाता है वहां का वो हो जाता है। जी हां, ऐसा ही कुछ है हिंदुस्थान के पूर्व स्पिनर श्रीधरन श्रीराम के साथ जो बांग्लादेश क्रिकेट टीम के तकनीकी सलाहकार बने हैं। इससे पहले श्रीराम ऑस्ट्रेलिया की नेशनल टीम के साथ भी जुड़े हुए थे। इस नई जिम्मेदारी के साथ श्रीराम ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के साथ कोचिंग का अनुभव उन्हें अपनी नई जिम्मेदारी निभाने में मददगार होगा। श्रीराम एशिया कप और अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया में खेले जानेवाले टी-२० विश्व कप में बांग्लादेश की टीम से जुड़े हैं। इस ४६ साल के पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि बांग्लादेश के साथ वे अपनी जिम्मेदारियों के बारे में बहुत स्पष्ट हैं।
संघ के फंदे में पहलवान
संघ बोले तो कोई और नहीं, बल्कि कुश्ती का संघ, जिसने अपना फंदा कसा है और पहलवानों को बांधा है। दरअसल, भारतीय कुश्ती संघ ने पहलवानों पर अपनी मर्जी से अनुबंध करने पर प्रतिबंध लगाने का कड़ा फैसला लिया है। अब कोई भी पहलवान फेडरेशन की मंजूरी के बिना अनुबंध नहीं कर सकेंगे। अगर किसी भी पहलवान ने ऐसा किया तो फेडरेशन अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित पहलवान पर कार्रवाई करेगा। ओलिंपिक, व‌ल्र्ड चैंपियनशिप व कॉमनवेल्थ गेम्स में चयनित तथा पदक जीतनेवाले खिलाड़ियों के साथ कंपनियां अनुबंध कर लेती र्हैे। इसके बाद संबंधित खिलाड़ी की गतिविधियां व कार्यक्रमों को कंपनी अपनी मर्जी से संचालित करती है। ऐसे में फेडरेशन को भी कई बार दरकिनार कर दिया जाता है। हां, पहलवान किसी भी कंपनी के लिए विज्ञापन कर सकते हैं, इसमें किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है।
दादा की बात मानो कोहली
विराट कोहली पर न केवल उनके प्रशंसकों का दबाव है, बल्कि अब तो बोर्ड का भी दबाव है। हालांकि बोर्ड अध्यक्ष सौरव गांगुली ने जो कोहली को कहा वो दबाव मानें या गुरुमंत्र ये तो अब कोहली पर ही है। कोहली दादा की बात किस तरह लेते हैं और कैसे मानते हैं ये आज के मैच में ही पता चल जाएगा। सौरव गांगुली ने कहा कि विराट कोहली को सिर्फ हिंदुस्थानी टीम के लिए रन बनाने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने लिए भी रन बनाने होंगे। मालूम हो कि विराट करीब तीन साल से आउट ऑफ फॉर्म हैं। नवंबर २०१९ के बाद से इंटरनेशनल क्रिकेट में वे एक भी शतक नहीं जमा पाए हैं। दादा का ये बयान ऐतिहासिक भी है क्योंकि कोई भी बोर्ड अपने खिलाड़ी को टीम के लिए खेलने को कहता है, जबकि यहां तो उल्टा ही हो गया है। बोर्ड ने कहा है कि अपने लिए खेलो। वैसे कोहली की हालत भी ऐसी हो गई है कि उन्हें अब अपने लिए ही खेलने जरूरी हो गया है, ऐसे में गांगुली की ओर से हरी झंडी मिल जाने पर कोहली पर से सारा प्रेशर दूर हो जाना चाहिए।
फीफा ने लिया बैन वापस
लीजिए अब स्थितियां साफ हो गई हैं। अब टूर्नामेंट होगा और पूरे मजे के साथ होगा क्योंकि लगाया गया बैन वापस ले लिया गया है। जी हां, अंडर-१७ महिला फुटबॉल विश्व कप के खेलों का आयोजन हिंदुस्थान में ही होगा। फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ पर लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया। उसने यह फैसला तब लिया है जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासकों की समिति भंग कर दी है। फीफा के इस फैसले से हिंदुस्थान के अक्टूबर में महिलाओं के अंडर-१७ विश्वकप की मेजबानी का रास्ता साफ हो गया है। फीफा ने ‘तीसरे पक्षों के अनुचित दखल’ के लिए १५ अगस्त को एआईएफएफ को निलंबित कर दिया था। फीफा ने एक बयान में कहा, ‘फीफा परिषद के ब्यूरो ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) पर तीसरे पक्ष के अनुचित दखल के कारण लगाया गया निलंबन हटाने का फैसला किया है।

(लेखक सम सामयिक विषयों के टिप्पणीकर्ता हैं। ३ दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं व दूरदर्शन धारावाहिक तथा डाक्यूमेंट्री लेखन के साथ इनकी तमाम ऑडियो बुक्स भी रिलीज हो चुकी हैं।)

 

 

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