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आउट ऑफ पैवेलियन : रेणुका का कहर

  • अमिताभ श्रीवास्तव

रेणुका का कहर
टीम इंडिया की गेंदबाज रेणुका सिंह के कहर में बारबाडोस की टीम का कचूमर निकल गया। जी हां, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मुकाबले में गेंद से कमाल करनेवाली रेणुका सिंह एक बार फिर बल्लेबाजों पर कहर बनकर टूटीं। उन्होंने पहले ही ओवर में डिएंड्रा डोटिन (०) को बोल्ड कर दिया। ५वें ओवर तक बारबाडोस के चार विकेट गिर चुके थे और सभी रेणुका ने लिए थे। उन्होंने ४ ओवर के स्पेल में १० रन देकर ४ विकेट लिए। यह उनका करियर का बेस्ट प्रदर्शन भी है। पूरे मुकाबले में बारबाडोस की टीम इन शुरुआती झटकों से नहीं उबर पाई। टीम-२० ओवर में ८ विकेट पर ६२ रन ही बना सकी। उनके लिए सबसे बड़ी पारी किशोना नाइट (१६) ने खेली। मेघना सिंह, स्नेह राणा, राधा यादव और हरमनप्रीत कौर को भी १-१ विकेट मिले। महिला टी२० क्रिकेट में यह रनों के मामले में टीम इंडिया की दूसरी सबसे बड़ी जीत है और सेमीफाइनल में उसके रस्ते खुल गए हैं।
श्रीकांत बाबू क्यों हो रहे कन्फ्यूज?
वैसे तो कन्फ्यूजन की कोई बात नहीं है पर अपने क्रिकेट टीम के पूर्व चीफ सेलेक्टर और १९८४ वल्र्ड कप विनिंग टीम के अहम खिलाड़ी कृष्णाचारी श्रीकांत इतने कन्फ्यूज हैं कि एक के बाद एक विवादित बयानों के चलते सुर्खियों में बने हुए हैं। दायें हाथ के विकेट कीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक के बाद श्रीकांत ने अब दिग्गज फिरकी गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन को निशाने पर लिया है। श्रीकांत ने फैनकोड पर बात करते हुए रविचंद्रन अश्विन की टीम में चयन को अतार्किक बताया। उन्होंने कहा कि वे टी-२० टीम में क्या कर रहे हैं। वह टी-२० विश्वकप में जगह नहीं बना पाएंगे। श्रीकांत ने कहा, ‘यह बहुत बड़ा सवाल है। मैं तो अश्विन को लेकर पूरी तरह से कन्फ्यूज हूं। उनको बाहर क्यों किया गया था टीम से, फिर टीम का हिस्सा क्यों नहीं थे, वो इंग्लैंड में टी-२० सीरीज में क्यों नहीं खेल रहे थे। अब उनको अचानक से वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-२० टीम का हिस्सा क्यों बनाया गया। यह हम सभी के लिए ही काफी ज्यादा कन्फयूज करने वाली बात है।’
हर हर शंकर
पहली बार ऐसा हुआ जब ट्रेक एंड फिल्ड की हाई जंप में हिंदुस्थान को कोई पदक मिला और श्रावण मास में हर हर शंकर गूंज उठा। दरअसल, ये शंकर की जीत है। जी हां, हाई जंपर तेजस्विन शंकर ने देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। २३ साल के शंकर ने देश के लिए १८वां मेडल जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में देश के लिए हाई जंप का पहला ही मेडल है। तेजस्विन शंकर ने २.२२ मीटर की सबसे ऊंची कूद के साथ देश के लिए मेडल जीता। उन्होंने २.१० मीटर बाधा को आसानी से पार करके शुरुआत की, लेकिन चार अन्य एथलीट २.१५ मीटर का आंकड़ा पार करने में सफल रहे। शंकर ने अपने पहले ही प्रयास में २.१५ मीटर ऊंची छलांग लगा दी। इसके बाद उन्होंने २.१९ मीटर की छलांग लगाई। उसके बाद उन्होंने २.२२ मीटर का प्रयास किया और छलांग लगाते हुए मेडल की दावेदारी पेश कर दी, बस फिर क्या था। शंकर को कांस्य पदक मिल गया।
वेटलिफ्टिंग में पदकोत्तोलन
अब ये क्या है? वेटलिफ्टिंग माने भारोत्तोलन। तो भारोत्तोलन में पदकोत्तोलन क्या बला है? यही तो िंहदुस्थान की खासियत है क्योंकि उसने भारोत्तोलन पर भार की जगह पदक चढ़ाए और उठाए। जी हां, हमारी वेटलिफ्टिंग टीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स २०२२ में ऐतिहासिक प्रदर्शन कर दिखाया है। गेम्स के पहले ६ दिन में १० पदक अपने नाम करते हुए उन्होंने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले। वेटलिफ्टर्स का यह गेम्स में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हो गया है। इससे पहले २०१८ यानी पिछली बार के गेम्स में ९ पदक देश के लिए वेटलिफ्टर्स ने हासिल किए थे। ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में २०१८ कॉमनवेल्थ गेम्स में हमारे वेटलिफ्टर्स ने ९ पदक जीते थे जिसमें ५ गोल्ड, २ सिल्वर और इतने ही कांस्य पदक थे। इस बार एक कदम आगे बढ़ते हुए होनहारों ने कुल १० पदक छह दिन में ही बटोर लिए हैं। यह गेम्स वेटलिफ्टिंग के लिहाज से यादगार बन चुका है। तो आया न समझ में कि ये पदकोत्तोलन कैसे बना।

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