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मिंधे सरकार के विरुद्ध आक्रोश… दिव्यांग सहित ३ ने किया मंत्रालय के सामने आत्महत्या का प्रयास, एक महिला की मौत

सामना संवाददाता / मुंबई
मिंधे सरकार सामान्य लोगों की नहीं है। यह अन्यायी और निष्ठुर है। इस सरकार का कभी भला नहीं होगा, ऐसा विलाप करते हुए शीतल गाडेकर नामक महिला ने कल सर जे जे अस्पताल में आखिरी सांस ली। महिला ने सोमवार को मंत्रालय के सामने जहर पीकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। कल उसकी मृत्यु हो गई। मंत्रालय के सामने आत्महत्या की एक नहीं, बल्कि तीन घटनाएं हुई। दो ने विष खा लिया, जबकि एक ने अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डाल लिया। तीनों ने बयान दिया है कि उन्होंने निराश होकर आत्महत्या का प्रयास किया क्योंकि सरकारी कार्यालयों में उनके काम नहीं हो पा रहे थे।
पहली घटना में ६३ वर्षीय महिला शीतल गाडेकर धुले से मुंबई आई थी। उनके पति के नाम पर धुले एमआईडीसी क्षेत्र में नौ बिस्सा का प्लॉट नंबर पी-१६ है। वह २०१० में, तत्कालीन एमआईडीसी अधिकारियों की मिलीभगत से नरेश कुमार माणकचंद मुनोत नामक व्यक्ति के नाम फर्जी नोटरी बनाकर हड़प लिया गया। तत्कालीन एमआईडीसी अधिकारियों ने वैध खरीद पत्र की बजाय १०० रुपए के स्टैंप पेपर पर नकली हस्ताक्षर किए और महिला के पति रवींद्र गाडेकर की फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी गवाहों के माध्यम से भूखंड का मालिकाना हक स्थानांतरित करवा दिया था, ऐसी शिकायत शीतल गाडेकर ने मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री, मुख्य सचिव सहित कलेक्टर, पुलिस अधिकारियों से की थी और बार-बार पत्र व्यवहार भी किया था। लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। महिला ने २७ मार्च को मंत्रालय के सामने आत्महत्या करने की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद भी सरकार और पुलिस उदासीन रही। सरकारी कार्यालय में बार-बार टाल-मटोल से निराश शीतल गाडेकर ने कीटनाशक दवा पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। मंत्रालय के सामने पेश होने से आधे घंटे पहले शीतल ने कीटनाशक दवा पी थी, ऐसा निष्कर्ष जांच करने वाले डॉक्टरों ने निकाला है।
नई मुंबई की रहनेवाली संगीता डवरे ने भी कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। नई मुंबई पुलिस बल में कार्यरत उनके पति का कुछ दिनों पहले एक्सीडेंट हो गया था। घायल डवरे का डॉक्टरों ने ठीक से इलाज नहीं किया इसलिए डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने की शिकायत संगीता ने दर्ज कराई थी। संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। इस कारण उसने मंत्रालय के सामने आत्महत्या का प्रयास किया। उनका जे. जे. अस्पताल में इलाज शुरू होने की जानकारी पुलिस ने दी है। इसी प्रकार पुणे के मावल तालुका के एक दिव्यांग व्यक्ति रमेश मोहिते ने भी मंत्रालय के सामने सड़क पर आत्महत्या का प्रयास किया। दिव्यांगों के लिए अनुदान बढ़ाने की उसकी मांग थी। स्वतंत्र दिव्यांग मंत्रालय की स्थापना हुई, लेकिन सरकार दिव्यांगों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है, ऐसा मोहिते का आरोप था। सरकार की ओर से हो रहे अन्याय का खुलासा करने के लिए उसने अपने शरीर पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर खुद को आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने उसे समय रहते हिरासत में ले लिया।
क्या कहती है पुलिस…
इन घटनाओं के बारे में पुलिस का कहना है कि शीतल गाडेकर और संगीता डवरे दोनों एक ही समय मंत्रालय गेट के सामने आई थीं। उनके हाथों में कीटनाशक की बोतलें थीं, लेकिन अंदर पीने का पानी था। हालांकि, पुलिस ने दावा किया है कि शीतल की मौत जहर से नहीं बल्कि दिल का दौरा पड़ने से हुई है।

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