" /> कोविड अस्पतालों में बेड नहीं…जमीन पर ऑक्सीजन!

कोविड अस्पतालों में बेड नहीं…जमीन पर ऑक्सीजन!

 कोरोना मरीज रामभरोसे
 कहां है बेड और ऑक्सीजन
 सरकारी दावे और वादे फेल

मध्य प्रदेश में कोरोना बेकाबू होते ही अस्पतालों में व्यवस्था दम तोड़ने लगी है। कहीं बेड नहीं मिल रहे हैं, तो कहीं ऑक्सीजन की कमी देखने को मिल रही है। उज्जैन और छिंदवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में बेड न मिलने पर कोविड मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है जबकि उनकी स्थिति गंभीर है। उज्जैन में २४ घंटे में ३१९ मरीज मिले हैं। यहां पर २९७ संक्रमितों को ऑक्सीजन पर रखा गया है, वहीं छिंदवाड़ा में ८५ मरीज मिले हैं। जानकारी के अनुसार उज्जैन के ३ अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं, जहां यहां वेटिंग चल रही है। नए मरीजों को भर्ती करने लिए इंतजार करने को कहा जा रहा है। सबसे ज्यादा माधव नगर अस्पताल की स्थिति खराब है। यहां किसी को कुर्सी पर बैठाकर तो किसी को फर्श पर लिटा कर ऑक्सीजन दी जा रही है। यह हालात तब और ज्यादा चिंताजनक है, जब एक दिन पहले ही इस अस्पताल का प्रदेश सरकार के मंत्री मोहन यादव ने दौरा किया है। कोई भी जिम्मेदार इस स्थिति को लेकर जवाब देने को भी तैयार नहीं है। माधव नगर कोविड अस्पताल में बड़ी संख्या में सांस लेने की परेशानी के चलते कई मरीजों को ओपीडी में ही भर्ती कर फर्श पर लेटा दिया गया। उन्हें वहीं पर ऑक्सीजन लगा दी गई। ऐसे एक दो नहीं कुल छह मरीज हैं, जिनको ऑक्सीजन ओपीडी में दी जा रही है। एक को कुर्सी पर तो चार को फर्श पर लिटाकर ही इलाज किया जा रहा है।
ओपीडी में लापरवाही
किसी भी अस्पताल का ओपीडी वो जगह होती है, जहां बाहर के मरीजों को डॉक्टर देखते हैं। माधव नगर अस्पताल में भी रोजाना ओपीडी में करीब २०० मरीज सर्दी खांसी के आ रहे हैं। ऐसे में कुछ कोरोना संक्रमित भी होते है और कुछ नहीं भी। ओपीडी में जिन छह मरीजों को भर्ती किया गया है। ऐसे में ओपीडी में अपने आपको दिखाने आ रहे मरीजों को खतरा हो सकता है।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष की मौत
मध्य प्रदेश में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहली बार १ दिन में ४६ हजार ५२६ सैंपल में से ८,९९८ पॉजिटिव केस मिले। पहली लहर में इतने केस ३ महीने से भी ज्यादा समय में मिले थे। प्रदेश में पहला कोरोना केस १८ मार्च २०२० को जबलपुर में मिला था। इसके बाद ४ जुलाई २०२० को कुल ८,९९६ केस आए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूसरी लहर में कोरोना की रफ्तार कितनी खतरनाक है, वहीं मंगलवार को शाजापुर जिला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह बैस का भी कोरोना से निधन हो गया।