मुख्यपृष्ठसमाचारकेंद्र सरकार नहीं निभा रही है फर्ज... कश्मीरी पंडितों का दर्द!

केंद्र सरकार नहीं निभा रही है फर्ज… कश्मीरी पंडितों का दर्द!

• घाटी में पुनर्वास का आवास निर्माण कार्य लटका
•  शिवसैनिकों ने विस्थापितों के लिए उठाई आवाज

सामना संवाददाता / जम्मू । केंद्र की भाजपा सरकार कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के नाम पर २८ माह से केवल छल ही करती आ रही है। कभी आतंक को खत्म करने की बात कहकर कश्मीर में शांति का ढिंढोरा पीटती है तो कभी `द कश्मीर फाइल’ फिल्म दिखाकर कश्मीरी पंडितों के जख्म को ताजा करने की कोशिश करती है। लेकिन हकीकत यदि देखी जाए तो केंद्र की भाजपा सरकार कश्मीर से विस्थापित हिंदुओं को केवल स्वप्न दिखाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के अतिरिक्त कुछ नहीं किया। १९९० में जब कश्मीर घाटी से कश्मीरी हिंदुओं एवं सिखोें को पलायन पर विवश किया गया तब शिवसेना के संस्थापक हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे ने आगे बढ़कर कश्मीरी विस्थापितों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया था। शिवसेना जम्मू-कश्मीर इकाई प्रमुख मनीष साहनी ने कहा कि ठीक उसी प्रकार आज भी शिवसेना कश्मीरी विस्थापितों के साथ खड़ी है, क्योंकि शिवसेना ही कश्मीरी पंडितों के दर्द को जानती है। मनीष साहनी ने कहा कि भाजपा अपने राजनैतिक स्वार्थ के चलते विस्थापितों के जख्मों को हरा कर अपना फायदा उठाने की कोशिश में लगी हैं, जबकि हकीकत यह है कि केंद्र व पूर्व सरकारों ने कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास और रोजगार को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।‌ घाटी में कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर बनाए जा रहे आवास के निर्माण कार्य भी लटका हुआ है। वहीं २०१९ में धारा ३७० हटने के बाद भाजपा सरकार ने जो उम्मीद की किरण दिखाई थी वह भी २८ महीने के लंबे अंतराल के बाद धुंधली पड़ चुकी है, जिसके चलते कश्मीरी विस्थापितों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कश्मीर के लोगों के दर्द को लेकर शिवसेना के अलावा किसी राजनीतिक दल ने इस जुल्म का विरोध नहीं किया‌ है।‌
फिल्म से नहीं भरा जा सकता जख्म
फिल्म `द कश्मीर फाइल’ के संबंध में साहनी ने कहा कि आज भी कश्मीर की भूमि कश्मीरी हिंदुओं के बिना अधूरी है। साहनी ने कहा कि पिछले ७ वर्षों से भाजपा ने कश्मीरी विस्थापितों को कश्मीर में बसाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। साहनी ने कहा कि पुराने जख्मों को उजागर करने से कश्मीरी विस्थापितों की घर वापसी संभव नहीं हो सकती । इससे हिंदू- मुस्लिम भाईचारे को चोट पहुंची है। साहनी ने कहा कि भाजपा शासित राज्य सरकारों द्वारा फिल्म को टैक्स प्रâी करना और सरकारी कर्मचारियों को फिल्म देखने के लिए अवकाश देना राजनैतिक फायदा उठाने की तरफ इशारा करता है। साहनी ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आह्वान और सांंसद अनिल देसाई के मार्गदर्शन से शिवसेना आगामी कश्मीर विधानसभा चुनावों में कश्मीरी विस्थापितों के पुनर्वास के वादे के‌ साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और‌ ३२ सालों से अपने ही देश में विस्थापितों का जीवन बिता रहे इस दर्द का अंत करेगी। इस अवसर पर शिवसेना के विकास बख्शी, संजीव कोहली और बलवीर सिंह उपस्थित थे।

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