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एलओसी पर बॉर्डर रेडर्स अर्थात बैट हमलों की तैयारी में जुटी पाक सेना

सुरेश एस. डुग्गर / जम्मू

पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम के उल्लंघन में हुई हालिया बढ़ोतरी के कारण जम्मू-कश्मीर में एलओसी से सटे इलाकों में बढ़े तनाव के बीच सेना ने आज बताया कि उन्हें प्राप्त सूचना के मुताबिक, पाकिस्तान एलओसी पर और अधिक कमांडो हमले की कोशिश कर रहा है। बकौल भारतीय सेना के पाक सेना एलओसी पर बॉर्डर रेडर्स के सदस्यों के जरिए बैट अर्थात कमांड़ो कार्रवाइयों को अंजाम देना चाहती है। सोमवार को राजौरी जिले में नौशेरा के झंगड़ सेक्टर में पकड़े गए लश्क-ए-तोयबा के घुसपैठिए ने पूछताछ में जो उगला है, उसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। यह घुसपैठिया पाक कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के सब्जकोट का रहने वाला तबरीक हुसैन है। उसका कहना है कि एलओसी के पार पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के सदस्य भी सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में हमले करने के लिए मौके की ताक में बैठे हुए हैं। ये भारतीय सेना के जवानों पर हमले की तैयारी में हैं। इस टीम में आतंकी, पाकिस्तानी सेना के कमांडो तक शामिल हैं। इन्हें इस तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है कि ये भारतीय क्षेत्र में हमले को अंजाम देने के बाद वापस अपने क्षेत्र में भाग सकें। हालांकि पाकिस्तान द्वारा संघर्ष विराम का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है फिर भी जम्मू-कश्मीर में एलओसी से सटे इलाकों में बढ़े तनाव के बीच सेनाधिकारियों ने बताया कि उन्हें प्राप्त सूचना के मुताबिक, पाकिस्तान एलओसी पर और अधिक कमांडो हमले की कोशिश कर रहा है। बॉर्डर रेडर्स के नाम से जाने-जानेवाले ये कमांड़ों पाकिस्तान के विशेष बलों के कर्मियों और आतंकियों का एक मिला-जुला स्वरूप है। पिछले कुछ सालों में पाक बॉर्डर रेडर्स भारत के कई सैनिकों की नृशंस हत्या कर चुका है। इतना जरूर था कि बॉर्डर रेडर्स के हमले ज्यादातर एलओसी के इलाकों में ही हुए थे। इंटरनेशनल बॉर्डर पर पाक सेना ऐसी हिम्मत नहीं दिखा पाई थी, जबकि राजौरी और पुंछ के इलाके ही बॉर्डर रेडर्स के हमलों से सबसे अधिक त्रस्त इसलिए भी रहे थे क्योंकि एलओसी से सटे इन दोनों जिलों में कई फॉरवर्ड पोस्टों तक पहुंच पाना दिन के उजाले में संभव इसलिए नहीं होता था क्योंकि पाक सेना की बंदूकें आग बरसाती रहती थीं।
बॉर्डर रेडर्स के हमलों को कश्मीर सीमा पर स्थित सैन्य पोस्टों में तैनात जवानों ने भी सीजफायर से पहले की अवधि में सहन किया है। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय इलाके में घुसकर भारतीय जवानों के सिर काट कर ले जाने की घटनाओं को भी इन्हीं बॉर्डर रेडर्स ने अंजाम दिया था, जबकि १४ साल पहले उरी की एक उस पोस्ट पर कब्जे की लड़ाई में भारतीय वायुसेना को भी शामिल करना पड़ा था जिसे भारतीय सैनिकों ने भयानक सर्दी के कारण खाली छोड़ दिया था, वैसे एलओसी पर बॉर्डर रेडर्स के हमले कोई नए भी नहीं हैं। इन हमलों के पीछे का मकसद हमेशा ही भारतीय सीमा चौकियों पर कब्जा जमाना रहा है। पाकिस्तानी सेना की कोशिश कोई नई नहीं है। कारगिल युद्ध की समाप्ति के बाद हार से बौखलाई पाकिस्तानी सेना ने बार्डर रेडर्स टीम का गठन कर एलओसी पर ऐसी बीसियों कमांडों कार्रवाइयां करके भारतीय सेना को जबरदस्त क्षति सहन करने को मजबूर किया है।

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