मुख्यपृष्ठसमाचारएलओसी पर पाकिस्तानी ड्रोन... हरियाणा बॉर्डर पर सरकारी!

एलओसी पर पाकिस्तानी ड्रोन… हरियाणा बॉर्डर पर सरकारी!

-जवानों और किसानों पर संकट भारी!

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

भारतीय सेना के जवान हों या किसान, दोनों को इन दिनों ड्रोन हमले का शिकार होना पड़ रहा है, फर्क सिर्फ इतना ही है कि भारत पाक सीमा पर सुरक्षा में तैनात जवानों पर पाकिस्तानी ड्रोन से हमले हो रहे हैं तो दिल्ली बॉर्डर पर किसानों पर सरकारी ड्रोन से हमले हो रहे हैं और यह सब केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते हो रहा है। केंद्र सरकार की खराब नीतियों के चलते सेना के जवानों और किसानों पर भारी संकट छाया हुआ है। बता दें कि एक दिन पहले पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर इंटरनेशनल बॉर्डर पर ड्रोन से हथियार गिराए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास ड्रोन से गिराया गया इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) मिला है। पाकिस्तानी ड्रोन से भारतीय सेना के जवानो को खतरा है तो उधर केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली के सीमा पर डटे किसानों पर ड्रोन से हमले किए जा रहे हैं। दो किसानों की मौत की खबर है। किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली में कूच करने के लिए सीमा पर संघर्ष कर रहे हैं।
बता दें गुरूवार को बीएसएफ के जवानों ने सुबह एक पाकिस्तानी ड्रोन की आवाजाही देखी और उसे गिराने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद वह ड्रोन वापस पकिस्तान की ओर चला गया। बाद में बीएसएफ के जवानों ने तलाशी शुरू की और परीक्षण के दौरान उन्हें आईईडी को पाया। हथियार गिराने की घटनाओं से अब सुरक्षाधिकारी परेशान होने लगे हैं। बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल अंतिम रिपोर्ट मिलने तक तलाशी अभियान जारी रखा था। ऐसा माना जा रहा है कि ड्रोन पाकिस्तानी सीमा में लौट गया है, लेकिन आगे के गांव में गिराए गए आईईडी की विशेषज्ञों द्वारा जांच की जा रही है।
उन्होंने माना कि अब इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी पर ड्रोन की उड़ानें बढ़ गई हैं। आतंकवाद की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में बड़े हथियारों और गोला बारूद का आना इसलिए संभव हुआ था, क्योंकि एलओसी पर न ही तारबंदी थी और न ही इतनी संख्या में सैनिक कभी तैनात हुए थे, पर अब हालात बदले तो पाकिस्तानी खुफिया संस्था आईएसआई व पाक सेना ने भी अपनी रणनीतिओं को बदल लिया। नतीजतन आतंकियों के ‘खास पसंद’ और धमाके करने में आसान वाले हथियारों को वह वाया ड्रोन इस ओर भिजवा रही है। इसमें अभी तक हथगोले, टिफिन बम, प्रेशर कुकर बम, स्टिकी बम और छोटी-छोटी आईईडी थी, पर अब इनमें परफ्यूम की बोतल टाइप के बोतल बम भी शमिल हो गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि पाक सेना ने और भी कुछ आइटमों को छोटे बमों में बदला है, जिनकी पहचान कर पाना आसान नहीं है।
सुरक्षाबलों के लिए परेशानी यह है कि वह ड्रोन की उड़ानों पर रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। खबरों के मुताबिक, एलओसी के इलाकों में पाक सेना ऐसे चीन निर्मित ड्रोनों का इस्तेमाल करने लगी है, जो न ही आवाज करती हैं और न ही कोई रोशनी उनमें होती है। यह भी बताया जा रहा है इनमें से कई रडार की पकड़ में भी नहीं आ रहे हैं। एक ऐसा ड्रोन बरामद भी हो चुका है। यह याद रखने योग्य तथ्य है कि पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में आतंकवाद का चेहरा जरूर पूरी तरह से बदल गया है, जो अब सोशल मीडिया और ड्रोन से ही संचालित हो रहा है।

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