मुख्यपृष्ठविश्वइजरायल की जेलों में फिलिस्तीनियों पर अत्याचार

इजरायल की जेलों में फिलिस्तीनियों पर अत्याचार

मनमोहन सिंह

मुझे उन्होंने हथकड़ी लगाई, मेरी आंखों पर पट्टी बांधी और मुझसे कहा गया कि मेरे साथ रेप किया जा सकता है… वह मुझे डराना चाहते थे…’
यह एक फिलिस्तीनी महिला के वीडियो का हिस्सा है। लामा खादर नामक फिलिस्तीनी महिला पिछले दिनों इजरायल की जेल से रिहा हुई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि इजराइल की जेल में उन्हें और अन्य महिला वैâदियों को किस तरह से प्रताड़ित किया जाता था। इजरायल की जेलों में महिलाओं को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी प्रताड़ित किए जाने की खबरें हैं।
पैलेस्टीनियन प्रिजनर्स सोसाइटी के अनुसार, इजरायली जेलों में ७ अक्टूबर के हमलों के बाद फिलिस्तीनी वैâदियों की मौत भी हुई है। हालांकि, इजरायल प्रिजन सर्विस वैâदियों की मौत से इनकार नहीं करती लेकिन मौत की वजह पर कोई साफ बात भी नहीं करती।
गंभीर बात तो यह है कि इजरायल की इन जेलों में बंद वैâदियों को इस बात की कोई जानकारी भी नहीं है कि उन पर क्या आरोप हैं और उनको किस वजह बंदी बनाया गया है।
हालात ये हैं कि पिछले दिनों जब फिलिस्तीनी वैâदियों को रिहा किया जा रहा था, तो इजरायल ने फरमान जारी किया कि वैâदियों के परिवार उनके परिजनों के वैâद से रिहा होने का जश्न नहीं मना सकते। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर के मुताबिक, ‘खुशी की अभिव्यक्तियां आतंकवाद का समर्थन करने जैसा है।’ इजरायल जेल में बंद फिलिस्तीनियों को आतंकवादी मानता है।
इजरायल और हमास के बीच मानवीय विराम के तौर पर संभावित रिहाई के लिए ३०० फिलिस्तीनी महिलाओं और बच्चों की पहचान की थी, उनमें से लगभग ८० फीसदी पर औपचारिक रूप से आरोप भी नहीं लगाए गए थे। दरअसल, फिलिस्तीनियों को एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया, जो एडमिनिस्ट्रेटिव डिटेंशन कहलाता है। जिसके तहत गिरफ्तार लोगों को शुरू में छह महीने के लिए जेल में रखा जाता है। बाद में उनकी हिरासत बिना किसी आरोप या मुकदमे के अनिश्चित काल के लिए बार-बार बढ़ाई जा सकती है। इन पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाया जाता है और लंबी सजाएं सुनाई जाती हैं, अधिकांश मामलों में फिलिस्तीनियों को बचाव पक्ष के वकील व अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की सुविधा नहीं मिलती, ताकि वह गिरफ्तारी से बच सकें।
इतना ही नहीं, सालों तक हिरासत में रहनेवाले वैâदियों के परिजनों को भी उन वैâदियों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती या बमुश्किल मिल पाती है।
पिछले साल जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि इजरायल ने १९६७ में पूर्वी यरुशलम, गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक पर कब्जा करने के बाद से लगभग दस लाख फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से अधिकतर लोग एडमिनिस्ट्रेटिव डिटेंशन के तहत हिरासत में लिए गए हैं। ७ अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल पर हमास के हमलों के बाद से इजरायल द्वारा गिरफ्तारियां बढ़ा दी गई हैं।

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