मुख्यपृष्ठनए समाचारपंचनामा : ५ ट्रिलियन इकोनॉमी सपना या सौदा? ...इस बार बजट में...

पंचनामा : ५ ट्रिलियन इकोनॉमी सपना या सौदा? …इस बार बजट में उद्योग जगत को चाहिए पुख्ता आधार

संतोष तिवारी

चंद दिनों बाद देश का नया बजट पेश होने वाला है। इस बजट से देश को काफी उम्मीदें हैं। इस बजट से आम जनता को ही नहीं, बल्कि उद्योगपतियों और व्यावसाइयों को भी काफी उम्मीदें हैं। खासकर मंदी की मार झेल रहा रियल स्टेट सेक्टर। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले एमएसएमई सेक्टर को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। इसके अलावा लोगों की नजर इस बात पर भी रहेगी कि देश की अर्थव्यवस्था को ५ ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी तक पहुंचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं? एमएसएमई क्षेत्र को आगे ले जाने के लिए क्या-क्या छूट और प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा जीएसटी, किसानों की आय, महंगाई, जीडीपी, टैक्स स्लैब में बदलाव सहित अन्य कौन-कौन से क्षेत्रों को राहत मिलती है या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी।
एमएसएमई मांगे मोर
एमएसएमई सेक्टर यानी ‘माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज’ सेक्टर का देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है। इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इसमें सरकार को बहुत कुछ करने की जरूरत है। इस सेक्टर ने साल २०२१-२२ में भारत की कुल जीडीपी में अकेले २९.१५ फीसदी का योगदान दिया था। मतलब भारत की अर्थव्यवस्था का लगभग एक तिहाई हिस्सा एमएसएमई सेक्टर से आ रहा है। ऐसे में यह सेक्टर ओवरऑल पूरी अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इकोनॉमी में एमएसएमई का बड़ा योगदान
सरकार ने देश को अगले साल तक ५ ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। अभी भारत की अर्थव्यवस्था का साइज करीब ३.७५ ट्रिलियन डॉलर है। ५ ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी का लक्ष्य पाने में एमएसएमई का योगदान काफी महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इस कारण भी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के इस अंतरिम बजट से एमएसएमई के लिए बड़े एलान की उम्मीद की जा रही है।
जीएसटी में बदलाव की जरूरत?
जबसे जीएसटी को लागू किया गया है तभी से राज्य और केंद्र सरकार के बीच जीएसटी की दरों को लेकर हमेशा एक मत नहीं होते हैं। हर साल जीएसटी काउंसिल की बैठक की जाती है। बड़े-बड़े उद्योगपति तक कह चुके हैं कि सरकार को जीएसटी की दरों को और भी पारदर्शी बनाने चाहिए. ताकि इसके ट्रांजेक्शन में कोई विवाद न हो।
पूंजी प्रवाह का जोखिम हो कम
डिलॉयट की एक रिपोर्ट बताती है कि ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, केमिकल्स जैसे सेक्टर्स के एमएसएमई के लिए पूंजी के प्रवाह में जोखिम को कम करने की जरूरत है। एमएसएमई को डिजिटल इंप्रâास्ट्रक्चर और साइबर सिक्योरिटी पर भी सरकार से बड़े उपायों की उम्मीद है।
रियल एस्टेट को मिले उद्योग का दर्जा
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के रियल एस्‍टेट डेवलपर्स की सबसे बड़ी संस्‍था क्रेडाई-एनसीआर के अध्यक्ष और गौड़ ग्रुप के सीएमडी मनोज गौड़ को भी इस आगामी अंतरिम बजट से कई सारी उम्मीदें हैं। गौड़ के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में रियल एस्टेट का हमेशा से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे इस बजट से होम बॉयर्स और डेवलपर्स के लिए मांग को प्रोत्साहित करने, तरलता संबंधी चिंताओं को दूर करने और नियमों को सरल बनाने के लिए रणनीतिक राजकोषीय उपाय की उम्मीद कर रहे हैं। इस बजट से कई उम्मीदें हैं जो भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूत करेंगे।

रियल स्टेट पर विशेष ध्यान जरूरी 
मुझे लगता है कि कुछ प्रमुख उपायों यानी कम ब्याज दरें, होम लोन कटौती स्लैब में वृद्धि और रियल स्टेट पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
कम ब्याज दरें: पिछले दो वर्षों में ग्राहक ईएमआई में ३०-४० प्रतिशत की भारी वृद्धि देखी गई है। ब्याज दरों में रणनीतिक कटौती से कस्टमर पर बोझ कम होगा और उनकी परचेसिंग पावर बढ़ेगी।
होम लोन कटौती स्लैब में वृद्धि: रियल एस्टेट को पसंदीदा निवेश के रूप में स्थापित करने के लिए होम लोन कटौती स्लैब को बढ़ाना जरूरी है। यह कदम घर खरीदारों को प्रोत्साहित करेगा। अब समय आ गया है कि सरकार रियल एस्टेट पर अधिक ध्यान दे। रोजगार के अवसर पैदा करने वाले दूसरे सबसे बड़े क्षेत्र यानी रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।
अमोल चंद्र करपे, डायरेक्टर,  वेस्टर्न डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड

जीएसटी से होटल व्यावसाइयों को नुकसान
महंगाई अपने चरम पर है। महंगाई को काबू करने के लिए केंद्र में बैठी भाजपा सरकार को कुछ करना चाहिए। इतना ही नहीं, नए जीएसटी कर का नुकसान होटल व्यावसायिकों को उठाना पड़ रहा है। जीएसटी को पूरी तरह समाप्त करने से होटल व्यवसाय को इसका लाभ मिल सकेगा और होटल व्यवसाय वालों को नुकसान कम होगा, वहीं महंगाई में कुछ हद तक कमी आएगी।
उज्ज्वल कुमार, हॉटेल व्यवसाई, मुंबई

एक राष्ट्र एक कर प्रणाली हो
केंद्र के बाद राज्यों का बजट आएगा. फिर स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं का बजट आएगा। हर बजट में इतने टैक्स होते हैं कि कमर ही टूट जाती है। एक राष्ट्र एक कर प्रणाली शुरू होनी चाहिए। इससे लोगों को टैक्स भरने में आसानी होगी और टैक्स को लेकर लोगों की समझ भी बढ़ेगी।
एम.ए माजिद सिद्दीकी, संचालक-  हैप्पी होम मल्टी चैनल

टैक्स कम करना जरूरी
केंद्र के बजट में विभिन्न करों का पुनर्विचार करना चाहिए। यदि छोटे और मध्यम वर्गीय व्यापारियों को जीवित रखना है तो जीएसटी में और भी राहत  की आवश्यकता है। जीएसटी में राहत मिलती है तो यह न केवल बड़े बल्कि छोटे व्यापारियों और उद्योगपतियों के लिए अच्छी बात होगी
रूपाली निरभवणे, संचालिका – आर ब्रांड प्रिंट सोल्यूशन

जीएसटी से छोटे उद्योग खत्म होने के कगार पर
जीएसटी असफल है। इसका फायदा केवल बड़े उद्योगपतियों को हो रहा हैं। कई लोगों का यह एक धंधा भी हो गया है। जीएसटी के चलते छोटे उद्योग खत्म होने के कगार पर हैं। महंगाई अपने चरम पर है। पहले घरेलू सिलिंडर ४०० रुपए में मिलता था, जो कि अब ९००-१,००० रुपए हो गया है। डीजल-पेट्रोल के रेट आसमान छू रहे हैं। हम लोगों का ट्रांसपोर्टेशन खत्म होते जा रहा है। पहले जो माल ट्रकों से जाते थे अब वो ट्रेनों से जा रहे हैं क्योंकि ट्रकों की अपेक्षा ट्रेन से सस्ता पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टर भुखमरी के कगार पर हैं। – प्रभाकर सिंह, ट्रांसपोर्टर, मुंबई

अन्य समाचार