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पंचनामा : गोली कांड के बाद पत्थर कांड…  कितने सुरक्षित हैं  पुलिस स्टेशन?

-भाजपा विधायक की करतूत के बाद उठ रहे सवाल 

-क्या विधायकों को नहीं है लॉ एंड ऑर्डर की चिंता?

संतोष तिवारी

हाल ही में कल्याण भाजपा के वरिष्ठ विधायक गणपत गायकवाड ने जमीन विवाद को लेकर पुलिस स्टेशन में ही दो लोगों पर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में शिंदे गुट के कल्याण शहर प्रमुख महेश गायकवाड और राहुल पाटील गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जाता है कि महेश गायकवाड को कुल छह गोली लगी।  दोनों घायलों की स्थिति गंभीर बताई जाती है। हालांकि, इस गोलीबारी के बाद  विधायक गणपत गायकवाड को गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि यह सारी घटना हिल लाइन पुलिस स्टेशन में ही घटित हुई, जिसके बाद अब सवाल उठता है कि जब पुलिस स्टेशन सुरक्षित नहीं हैं तो कुछ भी सुरक्षित नहीं है। पहले ऐसी घटनाओं के लिए यूपी, बिहार ही बदनाम था, लेकिन अब तो महाराष्ट्र उनसे आगे निकलने की होड़ में लगा हुआ है।
सवालों के घेरे में सीएम 
इस घटना के बाद विधायक गणपत गायकवाड ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री शिंदे ने मुझ जैसे एक सीधे-सादे इनसान को अपराधी बना दिया, साथ ही इस बात की भी चर्चा है कि इस भयानक आपराधिक संघर्ष के सूत्रधार खुद राज्य के मुख्यमंत्री शिंदे हैं। अगर शिंदे मुख्यमंत्री बने रहे तो राज्य में सिर्फ अपराधी ही पैदा होंगे, ऐसा आरोप भी गणपत गायकवाड ने अपने बयान में लगाया था। साथ ही राज्य में भाजपा भी सत्ता में है।
गुंडों के हौसले बुलंद 
महाराष्ट्र में गुंडों का ही राज है और सत्ताधारी पक्ष के ही विधायक खुलेआम कहते हैं कि ‘सागर’ और ‘वर्षा’ बंगलों में उनके बॉस हैं। ऐसे में कानून का राज आएगा कहां से? जिस राज्य का निर्माण गुंडों व ‘भीड़’तंत्र से हुआ है, उस राज्य में इसके अलावा और क्या होगा? ये लोग बात करते हैं कि हमारा कौन क्या बिगाड़ लेगा और ‘सागर’ बंगले का ‘बॉस’ उस पर मुंह में दही जमाकर चुप बैठ जाता है।
ठेंगे पर कानून-व्यवस्था
सूबे के मुख्यमंत्री शिंदे और उनके गुर्गों ने ठाणे-कल्याण सहित पूरे राज्य में गुंडागर्दी मचा रखी है। ठेकेदारी, अपहरण, फिरौती, धमकी, हत्या, जमीनों पर कब्जा जैसे अपराध सरकार के आशीर्वाद से हो रहे हैं और उनके गिरोहों के इस काम में कोई बाधा न आए, इसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त किया गया है, ऐसा सूत्रों का कहना है। यह भी कहा जाता है कि इन सबको दिल्ली का खुला आशीर्वाद प्राप्त है। राज्य के कई जिलों में संघर्ष और खून-खराबे का दौर चल रहा है।
कई जिलों में खून-खराबे का दौर
महाराष्ट्र के राहुरी में एड. राजाराम आढाव एवं एड. मनीषा राजाराम आढाव नामक वकील दंपति का अपहरण कर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। आढाव की हत्या के विरोध में जब राज्यभर से वकील मुंबई पहुंचे तो सरकार ने उनकी आवाज दबाने की कोशिश की। नगर जिले में विधायक संग्राम जगताप का ‘भीड़’तंत्र चरम पर पहुंच गया है। जगताप के गिरोह के लोग हत्या, अपहरण, संपत्ति पर अवैध कब्जा आदि मामलों में शामिल हैं। आम नागरिक, व्यापारी, उद्यमियों का वहां रहना मुश्किल हो गया है। जगताप अजीत पवार गैंग का सदस्य है। शिंदे गैंग का प्रकाश सुर्वे खुलेआम लोगों के हाथ-पैर काटने की बात करता है, उनके पुत्र बिल्डरों के दफ्तर में घुसकर धमकाते हैं। गिरोह का एक अन्य सदस्य सदामामा सरवणकर, सार्वजनिक रूप से पिस्तौल चलाता है और उसे शिंदे सरकार की पुलिस का समर्थन प्राप्त है।
पुलिस स्टेशन पर पथराव
३१ जनवरी को जूनागढ़ में मुस्लिमों के एक कार्यक्रम में मुफ्ती सलमान अजहरी ने विवादास्पद भाषण दिया था। जैसे ही उसकी फुटेज सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई, कार्रवाई की मांग बढ़ गई। जिसके बाद जूनागढ़ पुलिस ने कार्यक्रम के आयोजकों सहित मुफ्ती के खिलाफ मामला दर्ज किया और अजहरी की तलाश शुरू कर दी। रविवार को एटीएस की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए मुंबई के घाटकोपर आई। मुंबई एटीएस की मदद से पुलिस ने अजहरी को गिरफ्तार कर घाटकोपर पुलिस स्टेशन ले आई। जैसे ही अजहरी समर्थक को यह बात पता चली, वैसे ही बड़ी संख्या में वे थाने के बाहर जमा हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ ने नारेबाजी करते हुए पुलिस पर पथराव भी किया। काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही, जिसके बाद पुलिस ने १६ लोगों को गिरफ्तार किया।
कब बोलेंगे पीएम?
देश के गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह थोड़ा हैरान करनेवाला है, क्योंकि गैर-भाजपा शासित राज्यों में पत्ता भी खड़क जाए तो यह दोनों तत्काल प्रतिक्रिया देने में देर नहीं लगाते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में खुलेआम गुंडागर्दी और खून-खराबा चल रहा है। लेकिन गृहमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों चुप हैं।
गृहमंत्री के चेले ने मुख्यमंत्री के चेले को मारा 
इस सरकार की नींव ही गैरकानूनी और भ्रष्ट है और नींव ही गैरकानूनी और भ्रष्ट है तो कारभार भी गैरकानूनी होगा। यह घटना तो एक तरह से पराकाष्ठा है। इसके पहले भी बहुत सारे विधायक पुलिस पर हमला कर चुके हैं। एक विधायक ने तो शिवाजी पार्क पुलिस थाने में ही पिस्तौल चलाई, उस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। नारायण राणे के बेटे नितेश ने सोलापुर में एक भाषण के दौरान कहा कि डरो मत, किसी को भी मारो, कुछ चिंता मत करना। मैं पुलिस से नहीं डरता हूं। इन सब को छोड़ना नहीं है, मेरा बॉस सागर बंगले में बैठा है, सागर बंगला में गृहमंत्री रहते हैं, इस इसका मतलब गुनाह करो, गृह मंत्री का हाथ अपने ऊपर है कुछ कार्रवाई नहीं होगी। मागाठाणे के विधायक प्रकाश सुर्वे कहते हैं कि डरना नहीं, हाथ-पैर तोड़ दो, मैं जमानत कराऊंगा। ये सारे विधायक सत्ता पक्ष के हैं। गनपत गायकवाड ने सीएम के चेले पर गोली चलाई है। मारनेवाला भीr गृहमंत्री का चेला है।
– अरविंद सावंत, सांसद
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे)

पुलिस नेताओं की चरणचंपी में व्यस्त
पुलिस स्टेशन में गोली चलाना यह साबित करता है कि वीआईपी भी कानून का पालन नहीं करते हैं। पुलिस का भी राजनीतिकरण हो गया है, जिसकी सत्ता उसकी पुलिस। नियम-कानून को दरकिनार कर पुलिस नेताओं की चरणचंपी में व्यस्त है। जब से यह सरकार आई है तभी से ही यह सब चल रहा है। इसका खामियाजा चुनाव में पार्टी को भुगतना ही पड़ेगा।
 लालचंद तिवारी, जिला अध्यक्ष कांग्रेस सेवादल 

दबाव में जी रही जनता
राजनीतिक दखलंदाजी के कारण पुलिस दबाव में कर रही है। शहर में जितने भी गुंडे हिस्ट्रीशीटर और अवैध धंधे वाले हैं वो सत्ता पक्ष के संरक्षण में हैं। सामान्य जनता भयभीत है, भारी दबाव में जीने के लिए मजबूर है।
विनोद तिवारी, कांग्रेस नेता

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