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पंचनामा : चुनाव ‘अयोग्य’ पर गुस्सा फूटा! …कुप्रबंधन के कारण परेशान दिखे मतदाता

लिस्ट में नाम न होने से काफी लोग वोट नहीं डाल पाए 
भाजपा पर नाम कटवाने का लगा आरोप 

सामने आया फर्जी मतदान का मामला
मतदान केंद्रों पर मोबाइल बंदी से परेशानियां

पंकज तिवारी

पांचवें चरण का मतदान कल हुआ, लेकिन मतदाताओं को मतदान के दौरान विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ा। मतदाताओं को मतदान करने के लिए अपने मतदान केंद्र को खोजने में भी काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। वहीं कई जगहों पर फर्जी मतदान का मामला भी सामने आया। वोट देने गए कई लोगों ने बताया कि उनके मतदान केंद्रों पर पेयजल की सुविधा का इंतजाम नहीं किया गया था। साथ ही कई लोगों के नाम भी लिस्ट में नहीं पाए गए। यही नहीं एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग मतदान केंद्रों पर जाकर वोट देना पड़ा, जिससे वृद्धों और महिलाओं को काफी परेशानी हुई। कुल मिलाकर चुनाव आयोग को चुनाव ‘अयोग्य’ है का नाम भी मतदाताओं ने दिया।

महायुति पर लगे आरोप 
दादर के रहनेवाले ७६ वर्षीय वृद्ध अशोक परब पुराने शिवसैनिक हैं। लिस्ट में नाम नहीं होने के कारण वे भी वोट देने से वंचित रहे। वे कहते हैं कि जवानी के दिनों में उनका ‘मातोश्री’ आना-जाना लगा रहता था, लेकिन अब उम्र के कारण कम ही घर से बाहर निकलते हैं। वोट देने के जोश में वे घर से तो निकले, लेकिन लिस्ट में नाम नहीं मिला, इस बात की वजह से अब वापस घर जा रहे हैं। उन्होंने ‘महायुति’ सरकार पर सीधा-सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि इनकी मिलीभगत की वजह से ही लिस्ट से नाम काटे गए हैं। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि मुंबई सहित आस-पास के अन्य जिलों में भी हजारों लोगों के नाम इसी तरह से काटे गए होंगे?

मोबाइल कराया जमा
इस बार मतदान केंद्रों पर मोबाइल ले जाने पर पाबंदी लगाई गई थी। मुंबई शहर जिलाधिकारी और जिला चुनाव अधिकारी की तरफ से इस बात के निर्देश दिए गए थे कि मतदाताओं को मतदान केंद्रों से १०० मीटर दूर ही मोबाइल जमा कराना होगा। कई मतदान केंद्रों में मतदाताओं से मोबाइल जमा करा रहे थे, इस बात को लेकर मतदानकर्मियों और मतदाताओं के बीच कहासुनी भी देखने को मिली।

धीमी प्रक्रिया से नाराज हुए मतदाता 
कई मतदान केंद्रों में मतदाता धूप में खड़े नजर आए। लाइन लंबी थी, ऊपर से मतदानकर्मियों की धीमी प्रक्रिया से लोग नाराज हो गए। लोगों को घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ा। कई लोगों ने आरोप लगाया कि अगर इसी तरह से मतदान की प्रक्रिया चलती रही तो शाम ५ बजे तो क्या रात तक भी मतदान नहीं हो पाएगा। कई लोगों ने महाराष्ट्र में कम वोटिंग के लिए धीमी प्रक्रिया को जिम्मेदार माना।

कहां गए नाम?
कई लोग भीड़ से बचने के लिए सुबह के समय ही वोट देने के लिए घर से निकल पड़े। उन्हें उस समय मायूस होना पड़ा, जब लिस्ट में उनका नाम नहीं मिला। मुंबई के रहनेवाले व्यवसायी मनोहरलाल भी इन्हीं में से एक थे, जिनका नाम लिस्ट में नहीं मिला। मनोहरलाल इस बात को लेकर नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि चाहे मनपा के चुनाव हो या लोकसभा का, उनका नाम हर बार लिस्ट में रहता था, लेकिन इस बार नहीं है, आखिर मेरा नाम कहा गया? कुछ मतदाताओं का मतदान केंद्र उनके करीबी विद्यालय में न होकर ५ से ७ किलोमीटर दूर स्थित मतदान केंद्रों पर पाया गया। इस वजह से मतदान केंद्रों पर पहुंचने में मतदाताओं को समस्या का सामना करना पड़ा।

शिवसेना ने की जांच की मांग
फर्जी मतदान और लिस्ट में नाम न होने के कई शिकायत शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के उम्मीदवार राजन विचारे के पास पहुंची, जिसके बाद उन्होंने कलेक्टर से फर्जी वोटिंग की जांच करने की मांग की है। इस मुद्दे पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के वसई-विरार उत्तर भारतीय क्षेत्रप्रमुख सुरेंद्र सिंह राज ने बताया कि भारी संख्या में लोग मतदान करने से वंचित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि जो २०-२० साल से मतदान कर रहे थे, इस बार उनका नाम क्यों काट दिया गया? ये सभी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के मतदाता थे इसलिए उनका नाम काट दिया गया?

इंतजाम में दिखी खामियां
भिवंडी लोकसभा क्षेत्र में चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं के लिए विशेष इंतजाम करने की आवश्यकता थी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था, जिससे नागरिकों परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों को भूखे-प्यासे धूप में खड़ा रहना पड़ा। वोटिंग की प्रकिया इतनी स्लो थी कि आधा घंटे के काम में दो घंटे लग रहे थे।
सिद्धेश दराने, ठाणे

मतदान केंद्र था घर से काफी दूर 
मुझे मतदान करने के लिए अपने घर से करीब ६ किलोमीटर दूर जाना पड़ा। जबकि मेरे ही अन्य परिवार के सदस्यों का मतदान केंद्र घर के करीब था, केवल मेरा ही मतदान केंद्र दूर कर दिया गया था। जिससे मुझे परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसा पहली बार हुआ है और ऐसा क्यों हुआ मुझे नहीं पता। इस गर्मी और धूप में मतदान करने जाना मेरे लिए काफी बुरा अनुभव रहा।
 नीरज तिवारी, नौकरीपेशा

मेरा वोट किसी और ने डाला
मेरे नाम पर किसी और ने वोट डाल दिया, ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ। मैंने मतदान केंद्र में मौजूद अधिकारी से कई बार अपनी सफाई दी, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी। दिनदहाड़े धांधली चल रही थी, लेकिन इस तरफ न तो पुलिस न ही अधिकारीयों का ध्यान था। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
भरत बौवा, ठाणे

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