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पंचनामा : ‘कोरोना कवर’ … मंगलवार को मिले जेएन.१ के एक दिन में सबसे ज्यादा ११५ मामले

• देश में कोरोना वायरस संक्रमण के ५७३ नए मामले आए सामने
• देशभर में नए वैरिएंट के मरीजों की संख्या ३१२ पहुंची
• कोरोना के सक्रिय मरीज हुए ४,५०० के पार
• अब तक हो चुकी है दो लोगों की मौत

उठ रहा है प्रश्न
 क्या वैक्सीनेशन फिर होगा शुरू?
 लॉकडाउन का दौर फिर आएगा?

पंकज तिवारी

एक बार फिर से कोरोना का नया वैरिएंट जेएन.१ हिंदुस्थान में अपने पैर पसार रहा है। देश में मंगलवार को कोरोना के जेएन.१ वैरिएंट के एक दिन में अब तक सबसे अधिक ११५ मामले सामने आए। इसके साथ ही पूरे देश में अब तक कुल मामलों की संख्या बढ़कर ३१२ पहुंच गई है। बता दें कि इस वैरिएंट का पहला केस १७ दिसंबर को केरल में मिला था। जिस प्रकार से कोरोना के नए वैरिएंंट (जेएन.१) के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उससे भविष्य में कोरोना संकट से इनकार नहीं किया जा सकता है। आशंका इस बात को लेकर की जा रही है कि क्या फिर से वैक्सीनेशन शुरू होगा? क्या लॉकडाउन का दौर फिर से आएगा? आम जनता के लिए ‘कोरोना कवर’ की आवश्यकता है। हिंदुस्थान की सरकार को भविष्य में आनेवाले खतरे को नजरअंदाज किए बिना उचित ‘कोरोना कवर’ तैयार करने की आवश्यकता व्यक्त की जा रही है।
क्या कहती है रिपोर्ट? 
इंडियन सार्स-कोव-२ जिनोमिक कंसोर्टियम (इंसाकॉग) के मुताबिक, केरल में जेएन. १ के अभी तक सबसे ज्यादा १४७ मामले सामने आए हैं। इसके बाद सबसे प्रभावित राज्यों में गोवा है, जहां ५१ मरीज मिले हैं और फिर गुजरात में ३४ मरीज पाए गए हैं। इंसाकॉग के आंकड़ों के अनुसार, जेएन.१ के २७९ मामले जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए २३ दिसंबर को भेजे गए नमूनों से पता चले हैं, जबकि नए वैरिएंट से पीड़ित १७ मरीजों का पता बीते नवंबर में भेजे गए कोविड पॉजिटिव नमूनों की जांच से चला है।
कोविड भी कम नहीं
देश में मंगलवार को कोविड-१९ के ५७३ नए मरीज पाए गए और दो लोगों की मौत इस संक्रमण से हुई है। इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय मामलों की संख्या ४,५६५ पहुंच गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोविड से जान गंवाने वाले दोनों मरीज कर्नाटक और हरियाणा से हैं।
केरल में सक्रिय मामलों में कमी आई
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, केरल में सक्रिय मामलों में कमी दर्ज की गई है। यहां नए भर्ती होने वाले मरीजों से अधिक संख्या अस्पतालों से डिस्चार्ज होने वालों की है। मंगलवार को यहां ११० मरीज भर्ती किए गए, जबकि २६७ पीड़ितों को स्वस्थ होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई। इस समय राज्य में कुल सक्रिय मामलों की संख्या १,७१२ है।
सतर्क रहने की जरूरत
कर्नाटक में २९६ नए मरीज सामने आए। इसी के साथ राज्य में सक्रिय मरीजों की संख्या १,२४५ हो गई है। महाराष्ट्र में मंगलवार को ७० नए मामलों के साथ यहां केस लोड ७३१ हो गया है। इसी प्रकार तमिलनाडु में १८१ और आंध्र प्रदेश में ११९ सक्रिय मामले मिले हैं। बढ़ते ममलों को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।

क्या फिर से लगेगा टीका? 
कोरोना के पहले और दूसरे चरण के बाद सरकार की तरफ से वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण की शुरुआत की गई थी। वैक्सीनेशन के दौरान सबसे पहले कोरोना वॉरियर्स को डोज दिया गया, उसके बाद आम लोगों को। कोरोना के दो टीके लेने के बाद तीसरा डोज जिसे बूस्टर डोज का नाम दिया गया था, उसे भी लेना अनिवार्य किया गया था, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जिन्होंने पहला और दूसरा डोज ही लिया है, जबकि अभी भी लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें बूस्टर डोज लेना बाकी है। वहीं अब जब नया वैरिएंट पैâल रहा है तो डॉक्टरों का कहना है कि यह नया वैरिएंट अधिक खतरनाक नहीं है, इसलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, इस नए वैरिएंट को देखते हुए क्या फिर से कोई नया टीका लगाया जाएगा, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा सरकार या संबंधित संस्थाओं की तरफ से नहीं की गई है।

क्या फिर लग सकता है लॉकडाउन?
यह प्रश्न भविष्य के गर्त में छुपा है। इस बारे में कोई भी बात पुष्ट रूप से नहीं कही जा सकती है। जिस तरह से कोरोना का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए फिलहाल सतर्क रहने की खास जरूरत है। चूंकि डॉक्टरों ने इसे कम खतरनाक बताया है, इसलिए सरकार अभी तक लॉकडाउन के बारे में कोई विचार नहीं कर रही है। चीन में कोरोना मरीजों की संख्या हिंदुस्थान से कहीं अधिक है, लेकिन वहां भी लॉकडाउन के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है। लॉकडाउन की स्थिति उस समय आ सकती है, जब स्थिति कंट्रोल के बाहर हो चुकी हो। वैसे भी लॉकडाउन के आर्थिक दुष्परिणामों को कई देश भुगत चुके हैं।

कोरोना को लेकर क्या है लोगोें की राय 
तैयार है प्रशासन
फिलहाल, कोरोना का नया वैरिएंट जेएन.१ तेजी से नहीं पैâलता यह राहत की बात है, वहीं प्रशासन कोरोना को लेकर पहले से ही सतर्क हैं और आवश्यक इंतजाम किए गए है। घबराने की कोई बात नहीं है। केवल भीड़ भाड़वाले परिसर में मास्क का इस्तेमाल और निरंतर हाथ धोने की आवश्यकता हैं। इतना ही नहीं कोरोना की वैक्सीन लेने से बिल्कुल न घबराएं और सभी डोज जरूर लें। वैक्सीन कोरोना से हमारी रक्षा करने में कारगर हैं।
नेताजी मुलिक, अधीक्षक मेंटल हॉस्पिटल, ठाणे

चिंता की कोई बात नहीं
कोरोना के नए वैरिएंट के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं हैं क्योंकि स्वास्थ्य प्रशासन आवश्यक कदम उठा रहा है। इतना ही नहीं यदि कोरोना का संकट बढ़ता भी है तो प्रशासन के पास आवश्यक स्वास्थ्य प्रणाली की व्यवस्था है। आम जनता को केवल वैक्सीन लेना चाहिए और भीड़-भाड़ वाले परिसर में मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।
कैलाश पवार, ठाणे सिविल हॉस्पिटल, अधीक्षक

वायरल फीवर हो रहा वायरल
मुंबई में वायरल फीवर लगातार बढ़ रहा है। मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर करते वक्त लोगों को ज्यादातर छींकते और खांसते हुए देखा गया है, लेकिन फिर भी लोग मुंह पर मास्क नहीं लगते। मुझे लगता है कि सरकार को फिर से एक बार मास्क पहनने की पहल करनी चाहिए। लोगों में कोरोना का संक्रमण फिर से एक बार दिखाई दे रहा है, सर्दी जुकाम बुखार ऐसे लक्षण ठंडी के मौसम में बढ़ गए हैं। लगी से वायरल समझकर अनदेखा कर रहे हैं, लेकिन यह गलत है।
– प्रिया पांडेय, मुंबई
 मास्क से ऊब गए हैं
कोरोना का एक और वैरिएंट शहर में फैल रहा है। यह सोचकर ही डर लग रहा है, कि कहीं यह कोई बड़ा रूप न ले ले, लेकिन यह काफी संतोषजनक है कि डॉक्टरों ने कहा है। यह ज्यादा फैलता नहीं है। फिर भी लोगों को मास्क पहनना चाहिए, लेकिन मुंबई में लोग बिना मास्क के ही नजर आ रहे हैं। मुंबई के लोगों का मानना है कि वह मास्क से ऊब गए हैं, लेकिन शायद यह मास्क ही उनकी सेहत बचा सकता है। सरकार को इस पर बड़ा कदम उठाना चाहिए। क्या आगे वैक्सीन लगेगी या नहीं इसका भी जवाब देना चाहिए।
– सीमा आढ़े, मुंबई

सोशल डिस्टेंसिंग का करें पालन
देश में कोरोना का जेएन.१ वैरिएंट एक बार फिर तेजी से अपने पांव पसार रहा है। इसके लिए हमें पहले से ही थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि समय रहते ही इस नए वैरिएंट पर काबू पाया जा सके। मेरा मानना है कि हमें मास्क पहनना चाहिए और जितना हो सके उतना सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करना चाहिए। इसी में हम सभी की भलाई है।
– मंगेश दुबे, मुंबई

मास्क पहनने की आवश्यकता
मुंबई में सर्दी का असर दिखने लगा है। इन दिनों रात में ठंड लगती है। मौसम के बदलने से लोगों में जुकाम-खांसी जैसे वायरल देखने को मिल रहे हैं। यह वायरल नहीं फैले इसके लिए लोगों को मास्क लगाने की आवश्यकता है। हम ट्रेनों में अक्सर लोगों को बिना कवर किए ही खांसते और झींकते देखते है, जिससे वायरस फैलने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
– बिपिन पांडेय, मुंबई

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