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पंचनामा : चुनाव बने शिक्षकों के जी का जंजाल! … कब मिल पाएगा छुटकारा? …स्कूलों के शिक्षक बीएलओ की ड्यूटी से परेशान छात्र हो रहे हलकान

धीरेंद्र उपाध्याय / अशोक तिवारी
मुंबई में शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी पर लगाए जाने से छात्रों की पढाई पर असर पहुंच रहा था। एक समय ऐसी स्थिति हो गई थी कि सरकारी और अनुदानित स्कूलों में आधे से ज्यादा शिक्षक केवल चुनावी कार्यों में ही लगे हुए थे। दूसरी तरफ इससे १०वीं और १२वीं की बोर्ड परीक्षाओं के प्रभावित होने की आशंका थी। इसे देखते हुए शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया। ऐसे में पिछले महीने राज्य के तत्कालीन मुख्य चुनाव अधिकारी के आदेश में बीएलओ के काम से शिक्षकों को छुटकारा दिए जाने का उल्लेख था। इससे स्कूलों, जूनियर कॉलेजों और शिक्षकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही थी। लेकिन मुख्य चुनाव अधिकारी के इस आदेश की सीधे अवहेलना करते हुए मुंबई में सरकारी और अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों से अभी भी बीएलओ का काम कराया जा रहा है। इससे छात्र हलकान हो गए हैं, क्योंकि उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
महाराष्ट्र में इस वक्त १०वीं की बोर्ड की परीक्षा चल रही है। इसके साथ ही स्कूलों में भी वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी चल रही है। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव संबंधी कार्य में लगाने से शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। इसे देखते हुए शिक्षक विधायक कपिल पाटील ने मुख्य चुनाव अधिकारी से शिक्षकों को बीएलओ और अन्य चुनाव संबंधी कार्य से मुक्त करने की मांग की थी। इसके बाद तत्कालीन मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीकांत देशपांडे की तरफ से २२ फरवरी को जारी किए गए सर्वुâलर में मुंबई शहर और उपनगर के जिलाधिकारियों के साथ मनपा आयुक्त को दिए गए आदेश में कहा गया था कि बीएलओ की ड्यूटी से शिक्षकों को मुक्त कर दिया गया है। हालांकि, मनपा स्कूलों के साथ ही अनुदानित स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उनसे कहा गया है कि वे चार दिन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाएं और दो दिन बूथ लेवल ऑफिसर का काम करें। ऐसे में मुंबई के मनपा और निजी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ानेवाले तकरीबन ४,००० शिक्षकों को मंगलवार और शनिवार को चुनाव कार्यालयों में बीएलओ का काम करने पर बाध्य होना पड़ रहा है। साथ ही अधिकांश शिक्षकों में इस बात की निराशा है कि उनकी शनिवार को छुट्टी रहती है, फिर भी उन्हें काम करना होगा।
अन्य कर्मचारियों के उपयोग पर होगा विचार
संबंधित अधिकारियों के मुताबिक ,आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए शिक्षकों को कार्यमुक्त करने के लिए मुंबई के अन्य सरकारी कर्मचारियों का उपयोग करने पर विचार किया जाएगा। पांच दिन पहले मनपा मुख्यालय में बुलाई गई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बीएलओ का काम जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा २९ के तहत केवल शिक्षकों पर सौंपे गए हैं। इसके तहत अब यह काम उन्हें दो दिन करना होगा। इसके साथ ही सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को शिक्षकों को चुनाव कार्य से मुक्त रखा जाएगा।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के अनुसार शैक्षणिक कार्य कर रहे कर्मचारी और शिक्षकों को छुट्टी के दिनों में और अशैक्षणिक दिवस में ही वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण का कार्य दिया जा सकता है। प्राइवेट, एडेड और नॉन-एडेड स्कूलों के शैक्षणिक और अशैक्षणिक कर्मचारी की नियुक्ति चुनाव के समय तीन दिन प्रशिक्षण के लिए और दो दिन मतदान के दिन ड्यूटी देने का प्रावधान है।
चुनाव आयोग के कार्यालय से खड़ी हुई परेशानी
मुंबई समेत राज्य भर में शिक्षकों से कराए जानेवाले चुनाव कार्य को लेकर बहस जारी है। ऐसे में शिक्षण संस्थानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा मुंबई के कुछ शैक्षणिक संस्थानों में मंडल कार्यालय खोला गया है। इसका सीधा असर बोर्ड परीक्षाओं के साथ-साथ अन्य परीक्षाओं की योजना पर भी पड़ रहा है। यह भी बताया गया है कि कुछ शैक्षणिक संस्थानों को अन्य कार्यक्रम आयोजित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच इन शिक्षण संस्थानों ने राज्य निर्वाचन आयोग से इन कार्यालयों को अन्यत्र स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।
कठिनाइयों का करना पड़ रहा सामना
मुंबई समेत महाराष्ट्र में स्टेट के साथ ही अन्य बोर्डों की परीक्षाएं चल रही हैं। इन परीक्षाओं के लिए विशेष बच्चों, बीमार विद्यार्थियों या दृष्टिबाधित बच्चों के लिए भूतल पर परीक्षा केंद्र बनाने का नियम है। हालांकि, इस समय चुनाव आयोग ने मुंबई के कुछ परीक्षा केंद्रों पर निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर कार्यालय डिजाइन किए हैं। उदाहरण के लिए चुनाव आयोग ने मुंबई के विल्सन कॉलेज में एक क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किया है। इसके लिए कॉलेज के भूतल पर पांच कक्षाओं, कॉलेज सभागार और ऑडियो-विजुअल रूम का उपयोग किया जा रहा है। इससे १०वीं और १२वीं बोर्ड परीक्षा की योजना बनाने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जहां छात्र कम, जगह ज्यादा वहीं कार्यालय बने
मुंबई के अधिकांश स्कूलों और कॉलेज में छात्रों की ओवरक्राउडिंग है। हालांकि, मुंबई में कई ऐसे स्कूह हैंैं, जहां छात्रों की कमी है। चुनाव आयोग को ऐसे स्कूलों को अपना कार्यालय बनाना चाहिए। लेकिन इस समय चुनाव आयोग भीड़भाड़ वाले स्कूलों का चयन कर रहा है। इससे छात्रों और शिक्षकों को परेशानी होती है। -श्याम मिश्रा, अभिभावक

कम नहीं हो रही शिक्षकों की मुसीबत
मतदान और मतगणना के दिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है। उस समय सभी शिक्षक संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इसके बावजूद झांसे में लेकर अथवा डराकर उनसे बीएलओ का काम कराया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर कितना भी दबाव डाला जाए, शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी नहीं करनी है। -कपिल पाटील, शिक्षक विधायक

विद्यार्थियों और टीचरों के साथ ज्यादती कर रहा है चुनाव आयोग
स्कूल अधिनियम के अनुसार चुनाव आयोग शिक्षकों की ड्यूटी केवल मतदान और मतगणना के दिन लगा सकता है। हालांकि नियमों को ताक पर रखकर चुनाव आयोग शिक्षकों के साथ ही अब स्कूलों-कॉलेजों का इस्तेमाल भी करने लगा है। इस तरह अब चुनाव आयोग छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। चुनाव आयोग का यह कृत्य निंदनीय है।
-ज्ञानदेव लक्ष्मण हंडे, कार्यकारी अध्यक्ष महाराष्ट्र राज्य निजी शिक्षक संगठन

जिन विद्यालयों में सेंटर नहीं, वहां बनाया जाए कार्यालय
चुनाव आयोग को ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर उनका चयन करना चाहिए, जहां छात्रों को पढ़ाई और परीक्षा के समय परेशानियों का सामना न करना पड़े।
-अभिनेश कुमार सिंह,
स्वामी विवेकानंद हाई स्कूल मेघवाड़ी, जोगेश्वरी

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