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पंचनामा : शिवसेना किसकी है सब जानते हैं… सभी के लिए झटका देनेवाला फैसला

रामदिनेश यादव 

महाराष्ट्र में पिछले करीब दो सालों से चल रहे सत्ता संघर्ष पर कल विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने फैसला तो सुना दिया, लेकिन इस फैसले ने महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के निष्ठावान शिवसैनिकों और आम जनता को न केवल झटका दिया है, बल्कि उन्हें चौंका भी दिया है। तमाम शिवसैनिकों और जनता को राहुल नार्वेकर द्वारा सुनाया गया यह फैसला रास नहीं आया है। जनता अब खुलकर कह रही है कि घाती सरकार ने एक बार फिर से रंग दिखाते हुए असली शिवसेना को ही नकली करार देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। यह फैसला एक तरह से लोकतंत्र की हत्या कर रहा है और तानाशाही को न्योता दे सकता है। बता दें कि जहां चुनाव आयोग मोदी सरकार के इशारों पर शिवसेना से पक्ष और चुनाव चिह्न दोनों पहले ही छीन चुका है, वहीं इस पैâसले से चुनाव आयोग द्वारा दिए गए फैसले की एक बार फिर से पुनरावृत्ति हुई है।

क्या है मामला
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने लंबित विधायक अयोग्यता मामले का नतीजा विधानमंडल में बुधवार को घोषित कर दिया गया। शुरुआत में उन्होंने शिवसेना पक्ष का फैसला पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि यह फैसला पक्ष के संविधान, विधानमंडल में बहुमत, पार्टी के संविधान और चुनाव आयोग के फैसले को ध्यान में रखकर लिया गया है। महाराष्ट्र की जनता उस समय एकदम से अचंभित हो गई, जब नार्वेकर ने शिवसेना में पक्षप्रमुख पद को अमान्य करते हुए बहुमत के आधार पर यह फैसला सुना दिया। यह सुनवाई इस बात को लेकर हुई थी कि जिन विधायकों ने शिवसेना को धोखा दिया है, उन्हें दल-बदल कानून और पार्टी व्हिप के तहत अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को मध्यस्थ नियुक्त किया था। उन्हें मामले पर फैसला करने के लिए ३१ दिसंबर, २०२३ तक की समय सीमा दी गई थी। नार्वेकर की मांग के अनुसार, उन्हें १० दिनों की समय सीमा दी गई थी। इसके बाद उन्होंने बुधवार को नतीजे घोषित कर दिए।
…तो नहीं ठहराया जा सकता अयोग्य
नार्वेकर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह तय हो चुका है कि शिवसेना एकनाथ शिंदे की है, इसलिए उसके १६ विधायकों में से किसी को भी अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। गोगावले का व्हिप सही है। दो गुट आपत्ति कर सकते हैं, लेकिन विधानमंडल बहुमत महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रतोद पद पर भरत गोगावले की नियुक्ति वैध हो जाती है। सुनील प्रभु ने प्रतोद न होते हुए बैठक बुलाई थी। इसलिए उन्हें पक्ष के लिए कोई बैठक बुलाने का कोई अधिकार नहीं था। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा शिंदे गुट के सदस्यों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई करने की मांग खारिज की जा रही है।

कोई वास्तविक नतीजा नहीं निकला -प्रकाश आंबेडकर
वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायक अयोग्यता मामले में कोई वास्तविक नतीजा नहीं निकला है, लेकिन उन्होंने उद्धव ठाकरे के प्रति भावना व्यक्त की है। आंबेडकर ने कहा कि चुनाव आयोग के नतीजे आने के बाद बची हुई औपचारिकताएं आज पूरी हो चुकी हैं। प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि राहुल नार्वेकर ने जो पैâसला सुनाया है, उससे गठबंधन में हमारे सहयोगी को झटका लगा है। उम्मीद थी कि कोई वास्तविक नतीजा निकलेगा, लेकिन कोई वास्तविक नतीजा नहीं निकला।

सुप्रिया सुले के वॉट्सऐप स्टेटस में क्या है?
सुप्रिया सुले ने अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के साथ एक तस्वीर पोस्ट की है। यह तस्वीर बालासाहेब ठाकरे की फोटो जीवनी के विमोचन समारोह के दौरान ली गई है। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे और शरद पवार अच्छे रिश्ते थे। फोटोबायोग्राफी विमोचन समारोह में शरद पवार और बालासाहेब ठाकरे ने दोस्ती के किस्से भी सुनाए थे।

आज जो फैसला आया है, वह सरासर गलत है। क्योंकि यह शिवसेना हमेशा से बालासाहेब की थी। इसका अधिकार इन गद्दारों के पास वैâसे जा सकता है। बालासाहेब का सिद्धांत उनके पार्टी की असली पहचान थी, जो कि मौजूदा समय में पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ में नजर आती है। भले शिवसेना के नाम से शिंदे राजनीति करें, लेकिन जनता भलीभांति जानती है कि असली शिवसेना कौन-सी है।
मोक्ष टॉक

दूसरे के घर पर कब्जा कर लेने से वह घर आपका नहीं हो जाता है। घर बनता है सिद्धांत और पूर्वजों की सिखाई हुई राह से। यही बात लागू होती है शिंदे और बीजेपी द्वारा साजिश पर। इन लोगों ने शिवसेना के नाम का सहारा लेकर गंदी राजनीति की है। इसका परिणाम इन्हें आने वाले चुनाव में भी देखने को मिलेगा।
-अंकित तिवारी

उद्धव बालासाहेब ठाकरे के साथ अन्याय हुआ है। भारतवर्ष के इतिहास में विधानसभा अध्यक्ष ने ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं किया है, जैसा राहुल नार्वेकर ने किया है। सुप्रीम कोर्ट के ऊपर भरोसा है, उद्धव ठाकरे के साथ न्याय करेगा। सबसे बड़ा न्याय जनता के दरबार में होगा। जनता दोबारा उद्धव ठाकरे को सत्ता में लाएगी।
– प्रभाकर सिंह, शिवसेना समन्वयक हिंदी भाषी विभाग, ठाणे
चुनाव के दौरान एबी फॉर्म पार्टीप्रमुख देता है। वर्ष २०१९ में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टीप्रमुख के हाथों एबी फॉर्म स्वीकार किया था। अगर यह मान्य नहीं था तो उसी समय स्वीकार नहीं करना चाहिए था। इसके अनुसार, आज का निर्णय पूरी तरह से गलत है। अगर पक्षप्रमुख मान्य नहीं है तो पूरे विधायक अपात्र हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह निर्णय अवैध साबित होगा।
संतोष जाधव, सामाजिक कार्यकर्ता

फैसला पक्षपाती है
वर्तमान घाती सरकार के हित में विधानसभा अध्यक्ष राहुल र्वेकर ने अपना फैसला सुनाकर यह साफ कर दिया है कि वे भगोड़े नेताओं के साथ मिले हुए हैं। शिंदे गुट को शिवसेना देकर उन्होंने लोकतंत्र की हत्या ही कर दी है। यह अंत नहीं है और सत्य भी नहीं है। अभी पूरी फिल्म बाकी है।
-संदेश साल्वे, ठाणे

जिस प्रकार से एकनाथ शिंदे और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर छुप-छुपकर मुलाकात कर रहे थे, उससे साफ हो गया था कि विधानसभा अध्यक्ष एकनाथ शिंदे के हित में ही निर्णय सुनाएंगे। आज लोकतंत्र की हत्या होने का जीता- जागता सबूत नार्वेकर ने पेश कर दिया है।
-निहाल कोखले, ठाणे

शिवसेना हमेशा से हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के बताए और दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ी है। यह जो गद्दारों द्वारा छल किया गया है, ये आम जनता से लेकर बड़े ओहदे पर बैठे न्यायाधीशों को भी पता है। आज जो भाजपा और शिंदे की मिलीभगत का नतीजा निकला है। वो साफ दर्शाता है कि पूरे देश में लोकतंत्र मात्र सोशल मीडिया और बातों तक ही सीमित रह गया है। वास्तविकता में इन गद्दारों ने वजूद खत्म कर दिया है।
-प्रथमेश झा, समाजसेवी

शिवसेना तो शिवसेना पक्षप्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे की ही है। हमको चिह्न से कोई लेना-देना नहीं है। हमको कोई फर्क नहीं पड़ता हमारा नाम ही पहचान है। ये निर्णय उनकी सेटिंग है। उनको भी इसी दिन का डर था इसीलिए छुप कर बैठे थे। ये बात वे अपने जेहन में बैठा लें कि शिवसेना मतलब हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनापक्षप्रमुख बालासाहेब ठाकरे और बालासाहेब ठाकरे मतलब शिवसेना। हम गद्दार नहीं खुद्दार हैं।
-प्रकाश शिंदे (शाखाप्रमुख) शाखा क्र-२४
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाएगा और मेरे हिसाब से यह मामला उद्धव जी को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाना ही चाहिए। स्पीकर द्वारा लिया गया पैâसला बिल्कुल पक्षपाती है। लोकतंत्र के हिसाब से ये एक धब्बा है। इसे हमेशा याद रखा जाएगा। मुझे ऐसा लगता है कि उद्धव जी को त्यागपत्र नहीं देना चाहिए था, क्योंकि उनके त्यागपत्र का फायदा शिंदे और फडणवीस ने उठाया है। आज उद्धव जी के साथ इतनी बड़ी घात करने की हिम्मत शिंदे गुट में आई है। विधानसभा अध्यक्ष ने पक्षपाती पैâसला सुनाकर यह दिखा दिया है कि वे किस हद तक गिर सकते हैं। उद्धव जी के साथ जो हुआ है, वो बहुत गलत हुआ है।
-डॉ. मनोज उपाध्याय
विधानसभा अध्यक्ष के फैसले का सम्मान करता हूं। पार्टी के चिह्न से किसी की पहचान नहीं होती, बल्कि कामों से होती है। श्री बालासाहेब ठाकरे ने जिस विचारधारा के साथ पार्टी की स्थापना की थी, उस विचारधारा को जिंदा रखना जरूरी है।
-आनंद उपाध्याय, एडवोकेट
सब गद्दारों ने मिलकर जो साजिश रची है, उसका जल्द ही पर्दाफाश हो जाएगा। ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने पर दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। यह सब तमाशा किसके इशारे पर हो रहा है, यह सभी जानते हैं कि गद्दारों को पसंद कौन करता है? जरूरत पूरी होने पर इन्हें दूध से मक्खी जैसे निकल कर फेंक दिया जाएगा। शिंदे गुट ने शिवसेना से गद्दारी की है। इनके आकाओं को भी इन पर विश्वास नहीं है। एक वक्त आएगा, जब इन्हें कोई नहीं पूछेगा। आने वाले भविष्य में सच्चाई की जीत होकर ही रहेगी।
-सुकुमार किलेदार, नई मुंबई

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