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पंचनामा : प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट पर सरकारी लगाम … रुक जाएगी सेंटर्स की मनमानी? …शिक्षा व्यवस्था की नाकामी

लाइसेंस राज से किसको होगा नुकसान?
धीरेंद्र उपाध्याय

मोदी सरकार के केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने देश में चल रहे प्राइवेट कोचिंग इंस्टीट्यूट पर सरकारी लगाम लगाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। नई गाइडलाइंस में बताया गया है कि कोचिंग इंस्टीट्यूट १६ वर्ष से कम उम्र के छात्रों का एडमिशन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में अब छात्र १२वीं पास करने के बाद ही कोचिंग में नाम लिखवा सकेंगे। १०वीं तक की पढ़ाई छात्रों को बिना कोचिंग के ही करनी पड़ेगी। इतना ही नहीं मंत्रालय ने कोचिंग इंस्टीट्यूट पर भ्रामक वादे करने और अच्छे नंबरों की गारंटी देने पर भी पाबंदी लगा दी है। इससे सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार की गाइडलाइन से कोचिंग सेंटरों की मनमानी रुक जाएगी?
दूसरी तरफ इन नियमों के खिलाफ कोचिंग सेंटर चालकों में भारी नाराजगी फैल गई है। कोचिंग क्लासेस संचालकों ने आंदोलन और अदालती लड़ाई की चेतावनी दी है।
कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण कराना जरूरी
नई गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को कोचिंग संस्थान शुरू करने या प्रबंध करने के लिए केंद्र सरकार से उसे पंजीकृत करवाना होगा।
इसी के साथ जिन कोचिंग सेंटरों की एक से ज्यादा ब्रांचेस हैं, तो हर ब्रांच को अलग सेंटर के तौर पर पंजीकृत करवाना होगा।
पंजीकरण की वैधता राज्य सरकार तय करेगी। सरकार के दिशानिर्देशों में पंजीकरण की वैधता का जिक्र होगा।
गाइडलाइंस के अनसुार अब कोई कोचिंग संस्थान १६ साल से कम उम्र के छात्र का नामांकन नहीं सकता है। अब सिर्फ सेकेंडरी स्कूल एग्जामिनेशन के बाद ही नामांकन करना होगा। ऐसा न करने पर जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।
कोचिंग संस्थानों को छात्रों को सभी जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।
कोचिंग संस्थान अब न तो अच्छी रैंक और न ही गुमराह करने वाले वादे कर सकते हैं। ऐसा करने पर पहली बार २५,००० रुपए, फिर एक लाख के दंड का भी प्रावधान है। इसके बाद सरकार संस्थान का पंजीकरण भी रद्द कर सकती है।
कोचिंग संस्थानों का ये करना होगा अनिवार्य
कोचिंग सेंटरों को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी टीचर्स के पास कम से कम स्नातक की डिग्री है।
इसी के साथ सेंटर को एक वेबसाइट भी बनानी अनिवार्य होगी, जिस पर छात्रों से ली जाने वाली फीस आदि का पूरा अपडेट होगा।
कोचिंग संस्थानों को छात्रों को सभी जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर सरकार की टेढ़ी नजर
सरकार की शिक्षा प्रणाली की अप्रभाविता के कारण कुछ कोचिंग क्लासेस वास्तव में छात्रों को अकादमिक रूप से तैयार करती हैं और यही कारण है कि शिक्षा की गुणवत्ता कायम रहती है। जिस शिक्षा व्यवस्था पर सरकार बिना व्यवस्था दुरुस्त किए करोड़ों रुपए खर्च करती है, उसी शिक्षा व्यवस्था के कुछ वर्गों पर सरकार की टेढ़ी नजर है।
– बंडोपंत भुयार, संस्थापक अध्यक्ष, कोचिंग क्लासेस टीचर्स फेडरेशन एंड सोशल
फोरम ऑफ महाराष्ट्र
शिक्षा विभाग को लेनी होगी पढ़ाई की जिम्मेदारी
८० प्रतिशत छात्रों का अपना ११वीं में पहले और दूसरे सेमेस्टर का पाठ्यक्रम कोचिंग क्लासेस में ही पूरा होता है। यदि सरकार निजी क्लासेस पर अंकुश लगाना चाहती है, तो उसे सबसे पहले छात्रों के लिए कोचिंग क्लासेस जैसी व्यवस्था स्थापित करनी होगी।
-प्रथमेश झा, संस्थापक, रुब्रिक्स अकेडमी

प्रदेश में ९५ हजार क्लासेस
महाराष्ट्र में करीब ९५ हजार छोटे-बड़े क्लासेस संचालित हैं। इसी तरह १६ वर्ष की आयु के नीचे छात्रों को पढ़ानेवाले बच्चों के लिए संचालित क्लासेस की संख्या ३० हजार के आस-पास है। उनमें १५ लाख के आस-पास कर्मचारी कार्यरत हैं। कुछ लोगों ने अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए छात्रों और अभिभावकों की इस आवश्यकता का दुरुपयोग किया है।
राज उपाध्याय, फंडा ट्यूटोरियल्स

बच्चों को नहीं किया जाता है प्रताड़ित
हम लोग कोचिंग संचालन अधिनियम का पालन करते हुए संस्थान का संचालन कर रहे हैं। बच्चों को प्रताड़ित नहीं किया जाता है। ओवर टास्क नहीं दिया जाता है। अभिभावक ही बच्चों को एडमिशन कराने आते हैं। ऐसे में केंद्र का नया फरमान अव्यवहारिक और बेरोजगारी बढ़ाने वाला है।
ममता झा, संस्थापक, ममता मिस अकेडमी

नया कानून किसी के हित में नहीं
कोचिंग संस्थान रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं, जो भी संस्थान चला रहे हैं, वे अपना तो रोजी चलाते ही हैं साथ ही १० और शिक्षित हाथों को रोजगार देते हैं। ऐसे में सरकार को कोई भी आदेश आम जनता के हित में, न कि मनमाने और अव्यवहारिक तरीके से जारी करना चाहिए।
मुकेश चौरसिया, रैंकेजायर एजुकेशन

आत्महत्या के लिए बाध्य होते हैं बच्चे
बच्चों को कोचिंग में नहीं भेजेंगे, तो स्कूल में पढ़ाई कहां हो रही है। नया नियम बिल्कुल सही है, इससे बच्चों को प्रताड़ित करने की मानसिकता कम होगी। बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान लाखों रुपए लेकर बच्चों को टार्चर करते हैं। मानसिक रूप से ऐसा दबाव बनाते हैं कि बच्चे आत्महत्या करने को बाध्य हो जाते हैं।
रिशु मिश्रा, अध्यापिका

राज्य में नहीं है कोई स्पष्ट नियम
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, प्रत्येक राज्य से अपेक्षा की जाती है कि वे कोचिंग सेंटरों के संबंध में नियम बनाए। यह प्रयास पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने किया था। इसका विरोध भी हुआ, लेकिन तावड़े के चले जाने के बाद ये कोशिशें धीमी पड़ गईं।
अभिषेक यादव, शिक्षक

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