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पंचनामा : जनता को चाहिए बैलट पेपर …ईवीएम पर पब्लिक को भरोसा नहीं … इस मुद्दे पर क्या कहते हैं लोग?

ईवीएम पर कई बार उठ चुके हैं सवाल

संतोष तिवारी

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के वोटों और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट पर्चियों की शत प्रतिशत क्रॉस-चेकिंग की मांग को लेकर कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। करीब ५ घंटे तक चली इस सुनवाई में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने वकीलों और चुनाव आयोग की दलीलें सुनी। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कोर्ट के सामने एक रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में केरल में मॉक पोलिंग के दौरान भाजपा को ज्यादा वोट मिलने के आरोप लगाए गए थे। इसमें कहा गया था कि केरल के कासरगोड में मॉक पोलिंग हुई थी। ४ ईवीएम और वीवीपैट में भाजपा का एक अतिरिक्त वोट मिला था। इस पर बेंच ने चुनाव आयोग के वकील महिंदर सिंह से कहा कि आप इसका संज्ञान लें और एक बार चेक कर लें। दरअसल, अदालत में कई अर्जियां दाखिल की गई हैं, जिसमें मांग की गई है कि ईवीएम से पड़ने वाले सारे मतों का वीवीपैट स्लिप से वेरिफिकेशन किया जाए। इस मामले को लेकर मंगलवार को भी सुनवाई हुई थी।

मशीन सही या बैलेट पेपर?
वकील प्रशांत भूषण ने वीवीपैट की सारी स्लिपों की गिनती कराने की मांग की थी। इस पर अदालत ने कहा था कि आखिर भारत जैसे देश में यह वैâसे संभव है। इस पर प्रशांत भूषण ने जर्मनी जैसे देश का उदाहरण देते हुए कहा था कि वहां बैलेट पेपर से ही चुनाव हो रहा है। इस पर जज ने कहा था कि वहां सिर्फ ६ करोड़ ही नागरिक हैं। इतनी आबादी तो उनके गृह राज्य की ही है। यही नहीं ईवीएम की जगह बैलेट पेपर को लेकर बेंच का यह भी कहना था कि हम उस दौर को भी देख चुके हैं, जब बैलेट से चुनाव होता था। उनका कहना था कि मशीन सही रिजल्ट देती है, बशर्तें उसमें कोई मानवीय दखल न दिया जाए।

 कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या वोटिंग के बाद वोटर्स को वीवीपैट से निकली पर्ची नहीं दी जा सकती है। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि वोटर्स को वीवीपैट स्लिप देने से वोट की गोपनीयता भंग हो सकती है साथ ही बूथ के बाहर भी इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता कायम रहनी चाहिए। किसी को भी किसी प्रकार का शक नहीं होना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

‘सब कुछ सही है’ 
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने ईवीएम को लेकर सवाल उठाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि इलेक्शन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है, साथ ही उन्होंने चंडीगढ़ मेयर चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि चंडीगढ़ की घटना भी देखिए, गड़बड़ी हुई है, ईवीएम में ऐसा नहीं होता।
ईवीएम पर कब-कब उठे सवाल?
ईवीएम पर सत्ता से बाहर होने वाले राजनीतिक दल सवाल खड़े करते रहे हैं। साल २००९ के लोकसभा चुनाव में पहली बार ईवीएम मशीन पर सवाल खड़े किए गए। एक समय में भाजपा के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी और तत्कालीन जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ईवीएम के जरिए चुनावों में धांधली के आरोप लगा चुके हैं। वर्ष २०१० में बीजेपी नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने भी मशीन पर सवाल खड़े किए। मार्च २०१७ में ५ राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद १० अप्रैल २०१७ को १३ राजनीतिक दल चुनाव आयोग गए और ईवीएम पर सवाल उठाए। हालांकि, यह चलन अभी भी जारी है कई राजनीतिक दल और उनके नेता ईवीएम मशीन की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।

हैक हो सकती हैं मशीनें 
‘राइट टू रिकॉल’ पार्टी से जुड़े नेता और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली व अमेरिका में न्यू जर्सी से स्नातकोत्तर करने वाले अभियंता राहुल मेहता ने एक ऐसी मशीन ईजाद की है जो २०१७ से वीवीपैट में लगाए गए काले शीशे की मदद से ईवीएम व वीवीपैट द्वारा मतों की चोरी वैâसे की जा सकती है। राहुल मेहता कहते हैं कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि चुनाव आयोग की मशीनों में इसी तरह हेरा-फेरी होती है। मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि यदि ईवीएम-वीवीपैट में कोई हेरा-फेरी करना चाहे तो इस तरह से कर सकता है। वे आगे कहते हैं कि यदि शासक दल चाहे तो उसके हितैषी कम्प्यूटर प्रोग्रामर, सिस्टम प्रबंधक व अधिकारियों की मदद से कुछ चुनाव क्षेत्रों में, जहां उसे कम मतों से हारने का खतरा है, ऐसा करा सकता है।

ईवीएम पर किसी को नहीं है भरोसा 
जैसे राजा की जान तोते में थी, वैसे ही मोदी जी की जान ईवीएम में है। दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जिसे हैक न किया जा सके, ईवीएम  भी उन्हीं में से एक है। बैलेट पेपर को लेकर लोगों का विश्वास आज भी कायम है। लोग इस बात को लेकर कनफर्म तो रहते हैं कि उन्होंने किसे वोट दिया है? लेकिन ईवीएम में आपने जिस प्रत्याशी के सामनेवाली बटन को दबाया है उसका क्या प्रूफ है कि वोट उसी को गया। ईवीएम को लेकर बड़े पैमाने पर घोटाला हो रहा है। इस पर न तो जनता को भरोसा है न ही विपक्ष को।
अखिलेश यादव, अध्यक्ष, यूथ कांग्रेस, मुंबई

ईवीएम से बंद हो वोटिंग
बीजेपी को जिताने के लिए ईवीएम का प्रयोग किया जा रहा है। अगर यहां पर ईवीएम से वोटिंग करना बंद कर दिया जाए तो बीजेपी हार जाएगी। ईवीएम से वोट करते समय वीवीपैट से जो पर्ची निकलती है, उससे मतदाता को यह तो पता चलता है कि उसने किसको वोट दिया है लेकिन इससे यह पुष्टि नहीं होती कि उसका वोट किसको गया है।
जमीर कुरैशी, गोवंडी

ईवीएम की कृपा से जीत रही है भाजपा
इस मशीन को जरूर बंद होना चहिए। पूरी दुनिया में कई राजनीतिक पार्टियों ने इस पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसी मशीन की कृपा से भाजपा जीत रही है। आप ही बताइए कि जिस विधायक ने किसानोें पर गाड़िया चढ़ा दींr, वहां के लोग उस विधायक के विरोध में भी थे, इसके बावजूद वही विधायक फिर चुनाव जीत गया, यह वैâसे हो सकता है? इसलिए टोटल वोट से और पोल हुए वोटोें का मिलान होना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
 साबिर अली, मुंबई सेक्रेटरी, राकांपा (शरद चंद्र पवार)

ईवीएम से नहीं होती है वोटों की पुष्टि 
पिछले कई सालों से विपक्ष ईवीएम का मुद्दा उठाता रहा है। विपक्ष मांग करता रहा है कि ईवीएम और वीवीपैट के १०० फीसदी वोटों की गिनती और मिलान किया जाना चाहिए, तो इसमें गलत क्या है? पिछले कुछ विधानसभा चुनाव में तो कई बूथों पर टोटल वोटों से और पोल हुए वोटोें का मिलान ही नहीं हुआ। न्यायालय को ऐसा निर्णय लेना चाहिए कि जनता का लोकतंत्र पर भरोसा बना रहे।
एड. नीलेश दुबे, मुंबई 

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