मुख्यपृष्ठनए समाचारपंचनामा : आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ ‘घाती’...

पंचनामा : आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ ‘घाती’ सरकार का अन्याय? …निजी विश्वविद्यालयों में अब नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति

 नाराज छात्र सरकार का कर रहे हैं विरोध
संदीप पांडेय

महाराष्ट्र में निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को अब राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी। हाल ही में संपन्न हुए शीतकालीन सत्र में राज्य विधानमंडल द्वारा निजी विश्वविद्यालय के संबंध में एक नया विधेयक पारित किया गया है। इस विधेयक के अनुसार, अगले साल से प्राइवेट यूनिवर्सिटियों में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता, छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिलेगी। इससे आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। वो छात्रवृत्ति नहीं मिलने पर शिक्षा से वंचित भी हो सकते हैं।

कमजोर तबकों के छात्रों पर पड़ेगा असर
महाराष्ट्र सरकार ने इस प्रकार का विधेयक पारित कर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय किया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र महाराष्ट्र सरकार से काफी खफा हैं। राज्य सरकार ने जून में राज्य के सभी निजी विश्वविद्यालयों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के १० प्रतिशत छात्रों को फीस में ५० प्रतिशत की छूट प्रदान करने का निर्देश दिया था। वहीं अब यह विधेयक उन्हीं कमजोर तबकों के छात्रों पर पहाड़ बनकर टूटा है।
क्या है विधेयक में?
विधेयक में उल्लेख है कि इस अधिनियम के तहत स्थापित प्रत्येक विश्वविद्यालय स्व-वित्तपोषित होगें। विश्वविद्यालय सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता का हकदार नहीं होगें और विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्र राज्य सरकार से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या छात्रवृत्ति या फीस की प्रतिपूर्ति का दावा करने के हकदार नहीं होगें।
आरक्षण का मतलब नहीं
सरकार के इस कदम से राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का समुदाय काफी नाराज है। विद्यार्थी इस खंड का विरोध कर रहे हैं। छात्रों ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि यदि छात्रों को वित्तीय सहायता से वंचित किया जाता है तो प्रवेश के समय निजी विश्वविद्यालयों में आरक्षण लागू करने का कोई मतलब नहीं है।
शुल्क संरचना पर राज्य का नियंत्रण बहुत कम
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में प्राइवेट यूनिवर्सिटियों की संख्या बढ़ी है। महाराष्ट्र में स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालयों की संख्या ३० है। ये विश्वविद्यालय मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से अलग हैं, जो अध्ययन के एक विशेष क्षेत्र में अपने उच्च मानकों के कारण केंद्र सरकार से विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त करने वाले संस्थान हैं। वहीं स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालय, राज्य सरकार की मंजूरी के साथ निजी संस्थाओं द्वारा स्थापित संस्थान हैं। जबकि, उन्हें अपना स्वयं का पाठ्यक्रम तैयार करने और प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की अनुमति है, वे विश्वविद्यालय यूजीसी अन्य नियामक निकायों के मानदंडों से बंधे हैं। हालांकि, उन्हें सरकार की आरक्षण नीति का पालन करना पड़ता है, लेकिन उनकी शुल्क संरचना पर राज्य का नियंत्रण बहुत कम होता है। उनकी फीस अन्य संस्थानों की तुलना में अधिक होती है।

विधेयक को लेकर राज्यपाल से मिलूंगा
यह विधेयक सत्र के अंत में लाया गया था और जल्दबाजी में बहुमत के साथ पारित कर दिया गया था। राज्य में ३० निजी विश्वविद्यालय हैं, जो स्व-वित्तपोषित हैं। यह निश्चित रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को निजी विश्वविद्यालयों में पढ़ने से वंचित कर देगा। फिर चाहे कोल्हापुर में चप्पल बनाने वाले कारीगर की बेटी हो, मराठवाड़ा में मेहनती किसानों के बच्चे हों या नासिक के कालाराम मंदिर में गरीब ब्राह्मण का बेटा हो। मैं इसे लेकर जल्द ही राज्यपाल रमेश बैस से भी मिलूंगा।
– कपिल पाटिल, विधायक, जेडीयू
मजबूरी में लेते हैं दाखिला
यह जो विधेयक पारित हुआ है वह रद्द होना चाहिए। कहीं यह बच्चों की पढ़ाई खत्म करने का षड्यंत्र तो नहीं? सरकारी कॉलेजों में सीटें इतनी कम होती हैं कि बहुत ही कम बच्चे उनमें प्रवेश ले पाते हैं, जिसके कारण बच्चों को मजबूरन निजी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेना पड़ता है।
 – कुलदीप आंबेकर, फाउंडर, स्टूडेंट हेल्पिंग हैंड
…तो नहीं कर पाऊंगा पढ़ाई
मेरे माता-पिता मजदूरी का काम करते हैं। ऐसे में सरकार अगर अपनी मदद का हाथ पीछे ले लेगी तो हम किस पर निर्भर होंगे? मेरे माता-पिता मेरी पढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम वैâसे करेंगे? मुझे अगर छात्रवृत्ति नहीं मिली तो मैं आगे पढ़ाई नहीं कर पाऊंगा।
– उमेश पटोले, स्टूडेंट

स्टूडेंट्स पढ़ाई कैसे करेंगे?
शिक्षा हमारा मूलभूत अधिकार है, अगर सरकार छात्रवृत्ति ही बंद कर देगी तो हम स्टूडेंट्स पढ़ाई वैâसे करेंगे? इससे आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के छात्रों का पढ़ाई करना बंद हो जाएगा।
– ओंकार भोसले, स्टूडेंट

छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवश्यक
सरकार इस विधेयक को वापस ले। पहले से जो नियम चला आ रहा है वही चलना चाहिए। कई छात्रों की उम्मीद ही छात्रवृत्ति है। जिन पैरेंट्स की आमदनी कम है उनके बच्चे वैâसे पढ़ेंगे। छात्रों के लिए छात्रवृत्ति अत्यधिक आवश्यक है।
– अभिमन्यु कुमार, स्टूडेंट

सरकार कर रही है राजनीति
हम छात्र अब सरकार से कोई अपेक्षा नहीं रख सकते हैं। शायद सरकार चाहती है कि युवा पढ़ाई न करें। इन्हें डर है कि अगर युवा पढ़ा-लिखा होगा तो सरकार की राजनीति नहीं चलेगी। कई छात्र छात्रवृत्ति से ही पढ़ाई कर पाते हैं।
– वैभव बाबासाहेब मानवतकर, स्टूडेंट

अन्य समाचार