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पंचनामा : राजकोट हादसे के बाद मुंबई की सुरक्षा पर उठे सवाल … कितनी सुरक्षित है मुंबई?

पिछले ११ सालों में आग के कुल ५० हजार से अधिक केस हुए दर्ज 
१,५६८ गगनचुंबी इमारतों में तो ३,१५१ स्लम इलाकों में लगी आग 
आरटीआई से हुआ चौंकानेवाला खुलासा

नागमणि पांडेय

मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। अभी हाल ही में राजकोट में हुए आग हादसे के बाद एक बार फिर से मुंबई को लेकर भी यह सवाल खड़े होने लगे हैं कि मुंबई आग से कितनी सुरक्षित है? अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो यह काफी चौंकानेवाला है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में सिर्फ मुंबई में ही ५३,४३४ आग के केस दर्ज किए गए, जिसमें कई लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल हुए हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है।
मुंबई फायर ब्रिगेड की तरफ से आरटीआई एक्टिविस्ट शकील अहमद शेख को आग से जुड़ी जो जानकारी उपलब्ध कराई गई, उसके अनुसार बताया गया है कि साल २०१२ से लेकर २०२३ तक आग के कुल ५३,४३४ केस दर्ज किए गए हैं। इसमें १,५६८ आग के केस जहां गगनचुंबी इमारतों के हैं तो वहीं ३,१५१ आग के केस झोपड़पट्टियों के हैं। इसके अलावा ८,७३७ आग के केस रिहायशी इमारतों से जुड़ी हैं, और ३,८३३ व्यावसायिक इमारतों में आग लग चुकी है। बताया जाता है कि ३२,५१६ आग के केस शॉर्टसर्किट होने की वजह से सामने आए हैं, वहीं गैस सिलिंडर लीक होने से १,११६ बार आग लग चुकी है। ११,८८९ आग अन्य कारणों से लगी है, जिसमें कुल ६२९ लोगों की मौत हुई है। साथ ही सर्किल-घ् में कुल ९,८८७ आग लगी, जिसमें ३२५ गगनचुंबी इमारतें, १,५४६ आवासीय भवन, ९८७ व्यावसायिक इमारतें और ७५ झोपड़ियां शामिल हैं।
सर्किल-घ्घ् में सबसे अधिक १०,७१९ आग की सूचना मिली, जिसमें १२९ गगनचुंबी इमारतें, १,८२४ आवासीय भवन, ६६४ वाणिज्यिक भवन और ९३४ झोपड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा सर्कल- घ्घ्घ् में कुल ८,७१७ आग की घटनाएं हुईं, जिसमें ४९६ गगनचुंबी इमारतें, १,३८२ आवासीय भवन, ९३९ वाणिज्यिक भवन और ४४३ झोपड़ियां शामिल हैं।  इसके अलावा सर्कल-घ्न्न् में कुल ८,३२८ आग लग गई, जिसमें २८९ गगनचुंबी इमारतें, १,८३५ आवासीय भवन, ६६१ वाणिज्यिक भवन और ४०३ झोपड़ियां शामिल हैं, साथ ही सर्किल-न्न् में कुल ५,६८३ आग लगी, जिसमें ५० गगनचुंबी इमारतें, १,५४७ आवासीय भवन, २०८ व्यावसायिक भवन और १,२७३ झोपड़ियां शामिल हैं।  इसके अलावा सर्किल-I में कुल ५,१०७ आग की घटनाएं हुईं, जिसमें २७९ गगनचुंबी इमारतें, ६०३ आवासीय भवन, ३७४ वाणिज्यिक भवन और २३ झोपड़ियां शामिल हैं।
सर्किल-II के भीतर सबसे ऊंची गगनचुंबी इमारतों में कुल ४९६ आग लगने की खबर है। सर्किल-घ्न्न् की सीमा के भीतर सबसे ऊंचे रिहायशी इलाके में भी १,८३५ आग लग चुकी हैं, साथ ही सर्किल-१ की सीमा के भीतर सबसे ऊंचे व्यावसायिक भवन में आग लगने की ९८७ घटनाएं हो चुकी हैं। सर्किल-न्न् की सीमा के भीतर सबसे अधिक झुग्गियों में १,२७३ आग लगने की सूचना मिली है, साथ ही सर्किल-एक की सीमा के भीतर सबसे ज्यादा कुल १७७ लोगों की मौत हुई है।

ज्वलनशील सामानोें का इस्तेमाल
हाईराइज बिल्डिंग्स में कई फ्लैट होने की वजह से उनमें लकड़ी, प्लास्टिक, ज्वलनशील केमिकल्स, पीवीसी पाइप्स, बिजली के सामानों आदि का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाता है, फिर हर फ्लैट में तमाम ऐसी चीजें होती हैं जो तेजी से आग को पकड़ती हैं।

आग बुझाने के लिए साधनों का अभाव
मुंबई में सैकड़ों की संख्या में हाईराइज इमारतों का निर्माण किया गया है या किया जा रहा है, ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इन उंची इमारतों में आग लग जाती है तो उसे बुझाने के लिए क्या उपयुक्त साधन हैं? बताया जाता है कि अभी दमकल के पास इतनी बड़ी सीढ़ी नहीं है कि उसके कर्मचारी उस पर चढ़कर ऊंचाई तक पहुंच सकें।

भौगोलिक स्थिति भी है कारक
दूसरी बात यह है कि मुंबई की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां ऊंचाई पर सिढ़ी से जाना हमेशा खतरनाक होता है। एक दमकल अधिकारी के अनुसार, तटीय शहर होने के कारण ऊंचाई पर समुद्री हवाओं का बहाव तेजी से होता है, जिससे सीढ़ी पर संतुलन बनाए रखना काफी मुश्किल होता है।
आरटीआई एक्टिविस्ट शकील अहमद शेख के मुताबिक, मुंबई फायर ब्रिगेड के चीफ फायर ऑफिसर महाराष्ट्र फायर प्रिवेंशन एंड लाइफ सेविंग मेजर्स एक्ट-२००६ को लागू क्यों नहीं कर रहे हैं? क्या वे अभी भी आग दुर्घटना की प्रतीक्षा कर रहे हैं? इस संबंध में शकील अहमद शेख ने मुंबई मनपा आयुक्त और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को पत्र लिखकर महाराष्ट्र अग्नि निवारण और जीवन रक्षक उपाय अधिनियम-२००६ को लागू करने की मांग की है।

बिजली का उचित प्रबंधन हो 
अक्सर आग शॉर्टसर्किट की वजह से लगती है, इसलिए बिजली का उचित प्रबंधन होना चाहिए। विद्युत प्रणाली में दोष पुरानी और गलत स्रोतों से आ सकते हैं। ये दोषपूर्ण उपकरणों और बिजली का सुरक्षित ढंग से प्रबंधन न करने वाले उपकरणों के कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इस पर लोगों को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए।
अरविंद मिश्रा, मुंबई

घरों में लगाएं आग रोधी वस्तुएं 
बहुमंजिला भवनों के निर्माण में ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल खूब होने लगा है जो ज्वलन के तौर पर संवेदनशील होती हैं। जब गर्मी बढ़ती है और पारा बेतहाशा चढ़ने लगता है तो दीवार, कांच, रबर, प्लास्टिक की टंकियों और बाहर खुले में दौड़ रहे प्लास्टिक के वायर जी का जंजाल बन सकते हैं. ये भी एक बड़ी वजह आग लगने की होती है।
दीपक दुबे, ठाणे

जागरूकता से होगा बचाव 
व्यावसायिक इमारतों में आग लगने का एक अन्य सामान्य कारण समझ की कमी भी है। आग लगने की स्थिति में लोगों को क्या करना चाहिए, किससे संपर्क करना चाहिए, क्या सावधानी बरतनी चाहिए, कई लोगो को इस बात की जानकारी नहीं होती है। अभी भी कई लोगों को अग्निशामक यंत्र का इस्तेमाल करना नहीं आता है। ये सारी जानकारी लोगों को बतानी चाहिए।
सचिन पाल, ठाणे

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