मुख्यपृष्ठस्तंभपंचनामा : रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल... शिंदे सरकार के हठ का नतीजा!

पंचनामा : रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल… शिंदे सरकार के हठ का नतीजा!

बजट सत्र में घेरेगा विपक्ष

धीरेंद्र उपाध्याय

महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टर्स स्टाइपेंड और छात्रावास समेत विभिन्न मांगों को लेकर पिछले चार दिनों से हड़ताल पर हैं। निवासी चिकित्सक ये मांगें काफी समय से करते आ रहे हैं। इसे लेकर इनका संगठन महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स यानी मार्ड करीब २८ बार शिंदे सरकार को पत्र भेजकर सारी समस्याओं से न केवल अवगत कराया है, बल्कि इसे जल्द से जल्द सुलझाने की भी मांग की है। इतना ही नहीं सरकार की अनदेखी के चलते हड़ताल की भी चेतावनी दी गई, लेकिन मानो यह सरकार हठ किए बैठी है कि रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगों को बिल्कुल भी नहीं मानेंगे। दूसरी तरफ आज से शुरू हो रहे बजट सत्र में विपक्ष ने इसके साथ ही कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार शाम पांच बजे से ही प्रदेश के रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। स्टाइपेंड में वृद्धि, समय पर स्टाइपेंड मिलने और छात्रावास की संख्या बढ़ाने की मांग रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा सरकार से की जा रही है, लेकिन सरकार से उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। निवासी डॉक्टरों का कहना है कि छात्रावास में बहुत सारे चूहे घूमते हैं। मेडिकल सीटें बढ़ने से छात्रावास के एक कमरे में तीन से चार लोगों को रहना पड़ता है। महाराष्ट्र में हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने कहा कि उनकी एक मांग हॉस्टल से जुड़ी है, जहां वो बेहद बुरी हालत में रहते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे छात्रावास पुराने जमाने के हैं। बारिश के मौसम में पानी रिसता है। इससे कमरे में पानी जमा हो जाता है। हमेशा पाइप चोक हो जाती है, जिससे नहाना तक मुश्किल हो जाता है। प्लास्टर गिरता रहता है, जो कि खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों की दूसरी मांग उन्हें मिलने वाली स्टाइपेंड से जुड़ी है। रेजिडेंट का कहना है कि सबसे पहले तो उनका स्टाइपेंड समय पर मिले। उन्हें अपने स्टाइपेंड के लिए अक्सर दो-दो महीने इंतजार करना पड़ता है, वहीं डॉक्टरों ने स्टायपेंड में १०,००० रुपए की बढ़ोतरी करने की मांग भी की है।
सात फरवरी को अजीत पवार के साथ हुई थी बैठक
डॉक्टरों ने बताया कि उनकी महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ सात फरवरी को बैठक हुई थी। उस बैठक में कहा गया था कि उनकी मांगें मान ली जाएंगी। उन्हें तब कहा गया था कि दो दिनों में सरकार शासनादेश जारी कर देगी, तब हड़ताल रोक दिया गया था। दो हफ्ते बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए अब उन्हें हड़ताल पर बैठना पड़ा है। अब जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। मार्ड ने कहा कि उन्हें सरकार से केवल आश्वासन मिल रहा है, जो कि नाकाफी है।
टीचिंग फैकल्टी पर पूरा लोड
महाराष्‍ट्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है। इस समय परिस्थिति ऐसी हो गई है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पहुंच रहे मरीजों का नंबर काफी देरी से आ रहा है। हालांकि, वरिष्ठ डॉक्टरों ने ओपीडी में मोर्चा संभाल रखा है, लेकिन संख्या बल कम होने से पूरा लोड टीचिंग फैकल्टी पर आ पड़ा है।

वृद्धि और सुधार की हमारी प्राथमिक मांग
मेडिकल कॉलेजों में बढ़ते नामांकन को समायोजित करने के लिए राज्य में छात्रावास सुविधाओं में वृद्धि और सुधार की हमारी प्राथमिक मांग है। डॉक्टर लंबी शिफ्ट में काम करने के बाद अमानवीय परिस्थितियों में रह रहे हैं।
-अभिजीत हेलगे, अध्यक्ष, मार्ड

सुनने को तैयार नहीं रेजिडेंट डॉक्टर
रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए छात्रावास की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया है कि उनके मुद्दों को अगले मंत्रिमंडल की बैठक में उठाया जाएगा, लेकिन रेजिडेंट डॉक्टर्स सुनने को तैयार नहीं हैं।
-डॉ. दिलीप म्हैसेकर, निदेशक, महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान

जारी है इमरजेंसी सेवाएं
जेजे अस्पताल में ओपीडी की संख्या कम रही। जेजे अस्पताल में शनिवार को १,७९२ मरीज ओपीडी में आए, जबकि ५८ मरीजों को भर्ती किया गया। ४८ छोटी और ४१ बड़ी सर्जरी की गई। हड़ताल के दौरान रेजिडेंट डॉक्टर्स इमरजेंसी सेवाएं दे रहे हैं, जिस कारण अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे मरीजों पर खासा प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इसके साथ ही ओपीडी में विभाग प्रमुख, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और इंटर्न मोर्चा संभाले हुए हैं। इतना जरूर है कि जहां हड़ताल से पहले दो से ढाई हजार मरीज पहुंचते थे, वह संख्या जरूर कम हुई है।
-डॉ. पल्लवी सापले, डीन, जेजे अस्पताल

सर्जरी पर नहीं पड़ा है असर
मार्ड के नेतृत्व में रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सावधानी बरत रहा है कि मरीजों की देखभाल पर कोई असर न पड़े। हालांकि, हड़ताल के बाद अस्पताल आनेवाले मरीजों की संख्या और कम हो गई, वैसे सर्जरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
-डॉ. तुषार पालवे, चिकित्सा अधीक्षक, कामा अस्पताल

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