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पंचनामा: कैसी मुंबई चाहते हैं मुंबईकर?… नए साल को लेकर मुंबईकरों का संकल्प

उमा सिंह

मुंबई, देश की आर्थिक राजधानी, मायानगरी, सपनों का शहर और न जानें किन-किन उपमाओं से अलंकृत है। साल २०१८ में जनसंख्या के हिसाब से यह भारत का दूसरा और दुनिया का सातवां सबसे बड़ा शहर था। ेंदrत््ज्दज्ल्त्aूग्दहrान्गै.म्दस् के अनुसार मुंबई दुनिया में जनसंख्या के हिसाब से सबसे बड़े शहरों में से एक है। इसका स्थान विश्व में९ वें नंबर पर है। साल २०२३ में मुंबई की जनसंख्या २ करोड़ १२ लाख ९६ हजार ५१७ आंकी गई, जबकि साल २०२२ में यह २ करोड़ ९ लाख ६१ हजार ४७३ थी। साल २००८ में इसे अल्फा वल्र्ड सिटी का दर्जा मिला। मुंबई में भारत के कई बड़े उद्योग और फॉच्र्यून ग्लोबल ५०० वंâपनियां हैं। इसके अलावा, कई विदेशी बैंक और संस्थानों की शाखाएं भी यहां के विश्व व्यापार केंद्र क्षेत्र में हैं। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि इस शहर पर बढ़ती जनसंख्या का बुरा प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा यहां का इंप्रâास्ट्रक्चर भी जीर्ण शीर्ण हो गया है, तो इस आते हुए नए साल को लेकर आप मुंबई की सूरत किस रूप में देखना चाहते हैं। मुंबई शहर को लेकर नए साल में आपका क्या रेजॉल्यूशन है। मुंबई शहर के प्रति आपका क्या संकल्प और कर्तव्य है?

प्रदूषण मुक्त हरित मुंबई 

प्रदूषण को कम करने के लिए हम निम्न कदम उठा सकते हैं।
१. सार्वजनिक परिवहन का उपयोग
२. इलेक्ट्रिक वाहन खरीदें
३. पेड़ लगाएं
४. उपयोग में न होने पर लाइट बंद कर दें
५. प्लास्टिक की थैलियों से बचें
६. रिसाइकिल योग्य उत्पादों का ही उपयोग करें

पर्यावरण को बचाया जाए

मेरी परवरिश, मेरी शिक्षा, एक्टिंग करियर सभी कुछ इसी शहर की देन है। मुझे इस शहर की बदौलत पद्मश्री मिला। कई पुरस्कारों की मैं हकदार बनी। मैंने पैसे कमाए, अपना घर बनाया, जीरो से सेलेब्रिटी बनी। देश में रहने वाले ऑडियंस ने मुझे सराहा। मैंने आज से २५ वर्ष पहले दो अनाथ बच्चियों छाया और पूजा को गोद लिया था। इन बच्चियों के माता-पिता का इंतकाल हुआ था। आगे चलकर उनको डिग्री तक पढ़ाया। नौकरी, शादियां और यहां तक उनकी फस्र्ट डिलिवरी की भी मैंने व्यवस्था की। मेरी इन गोद ली हुई बच्चियों को मैंने अपना टंडन सरनेम दिया। आज मेरी दोनोें बेटियां अपने जीवन और करियर में बेहद सफल हैं। यह एक उदाहरण है। ऐसे कई सामाजिक काम मैंने अपना वक्त निकाल कर किये शायद उनका जिक्र करना मुनासिब नहीं होगा। मैं एनिमल लवर हूं, कई प्राणी मित्र संस्थाओं के लिए मैं प्रत्यक्ष रूप से काम करती हूंं। सोशल कॉजेस के लिए काम करते रहने की अब तो आदत सी बनी हुई है। मुझे नहीं लगता मैं कुछ अलग से कर रही हूं। हर नागरिक का यह कर्तव्य है, कोई वक्त निकाल सकता है कोई नहीं। २०२४ में कोई बहुत बड़े सामाजिक बदलाव की संभावना मुझे नहीं लगती। लेकिन इसे संकल्प कहिए या शहर के प्रति मेरी उम्मीदें, इस समय इतनी ही है कि पर्यावरण को बचाया जाए। हर दूसरे घर में लोग प्रदूषित हवा के स्तर के कारण बीमार हैं, ऊपर से कोरोना का आतंक फिर से सताने लगा है। आम आदमी हो या खास, लेकिन प्रदूषित हवा के स्तर के कारण बीमारियां पैâलने का रिस्क डेंजरसली पैâल चुका है।
रवीना टंडन थडानी, अभिनेत्री

मुंबई में हो हरियाली और खेलने के मैदान

मुंबई एक इंटरनेशनल सिटी है। इस शहर से मेरी धडकनें जुड़ी हैं, लेकिन जब भी मैं फ्लाई करते हुए शहर को देखता हूं तो पैâलते हुए इस वंâक्रीट के जंगल में सिकुड़ते हुए प्लेग्राउंड, मैदान और हरियाली को देखते हुए बड़ा दुख होता है। यह इस शहर की विडंबना है कि एक जमाने में यह जितना हरा भरा था उतना ही अब पथरीला हो गया है। मुंबई के लंग्स के तौर पर काम कर रहे आरे के जंगल को लगभग खत्म कर दिया जा रहा है। अब तो नेशनल पार्वâ में भी शुद्ध हवा नहीं मिलती। हरे भरे जंगल आपको मानसिक रूप से और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखते हैं। पार्वâ व मैदान बच्चों को तन और मन से स्वस्थ बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। मैदान होंगे तो ही बच्चे खेलेंगे यह उनके बचपन के सर्वांगीण विकास के लिए यह बहुत जरूरी है। सच कहूं तो आज के दौर में वाकई बच्चे मोबाइल से बुरी तरह से चिपक चुके हैं, इससे उनका मानसिक विकास तो रुक ही रहा है साथ ही उनका शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है। बच्चे देश का भविष्य हैं। इस भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए वंâक्रीट के जंगल कि नहीं बल्कि हरे-भरे पेड़ पौधे वाले असली जंगलों की जरूरत है।
-मीर रंजन नेगी, पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी

मुंबईकरों को भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का लक्ष्य है

साल २०२३ खत्म जरूर हो रहा है लेकिन इस नए साल २०२४ के लिए मुंबईकरों की समस्या एक बड़ी चुनौती है। मुंबईकरों के सामने तमाम समस्याएं हैं जिसका निवारण जरूरी है। यहां बढ़ती आबादी को देखते हुए इंप्रâास्ट्रक्चर जितना करें उतना कम पड़ रहा है। मुंबई की सड़कों पर, सोसायटियों में कचरे की व्यवस्था वैसे ही है। साफ-सफाई नहीं होने से कचरा और गंदगी के चलते प्रदूषण भी बढ़ रहा है। हर सीजन में मुंबईकरों को कोई न कोई नई बीमारी का सामना करना पड़ता है। मुंबईकरों को यदि बेहतर सुविधा देना है तो मुंबई को डिसेंट्रलाइज करने की जरूरत है। अगल-बगल में ही नए शहर बसाने की आवश्यकता है। यहां मुंबई से सटे हुए क्षेत्र में बिजनेस हब तैयार करने की आवश्यकता है। जो यह ‘घाती’ सरकार नहीं कर रही है, प्रॉपर प्लानिंग की जरूरत है। वह भी नहीं हो पा रहा है। भ्रष्टाचारी लोग सत्ता में बैठे हैं और मनपा की एफडी पर उनकी नजर है उसे खत्म करने पर तुले हुए हैं, इसके लिए जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। मुंबईकरोें के लिए समस्या बढ़ा रहे हैं।
– सचिन सावंत, विधायक, कांग्रेस

रेप मुक्त हो मुंबई

२०२४ में सरकार से अपील है कि वह भारत में भी दुबई की तरह कानून लागू करे जहां महिलाओं का रेप करने वाले दोषी को चौराहे पर खड़ा करके शूट कर दिया जाता है। यहां के मनचले पुरुषों को कोई डर नहीं है। ७ साल या ८ साल की सजा तो उनके लिए आम बात है, यह सोचकर वह एक बार नहीं बल्कि बार-बार रेप करते हैं और बेखौफ हो कर घूमते हैं। उम्मीद है कि सरकार इस पर कोई ठोस कदम उठाएगी।
समीना युसूफ सैयद, हेड कांस्टेबल, महाराष्ट्र पुलिस

मास्क के साथ हो नई शुरुआत

एक डॉक्टर के नाते आने वाले साल में मैं चाहूंगा कि लोग कम से कम चीनी का सेवन करें। चाहे चाय या कॉफी में या किसी और खाने के सामान में। चीनी बहुत ही ज्यादा हानिकारक होती है। चीनी ज्यादा खाने से उसका नुकसान आज नहीं बल्कि १० साल बाद पता चलेगा। तो मैं मुंबईकरों से और देश के लोगों से अपील करूंगा कि चीनी का सेवन काम करें। दूसरी बात आने वाले साल में शुरुआती दिनों में लोग मास्क लगाएं तो उनका नया साल स्वस्थ और स्वच्छ रहेगा, क्योंकि इस ठंड के मौसम में वायरल और तरह की बीमारियां काफी तेजी से पैâल रही हैं।
डॉ. कामथ जे.जे अस्पताल

बुनियादी सुधार हो

यह शहर अचानक पूरी तरह से नहीं बदल जाएगा लेकिन हां, हम इसे कम से कम शुरू तो कर सकते हैं। कुछ बुनियादी सुधारों के साथ हम सभी मिलकर अच्छी दिशा में कदम से कदम मिलाकर चल सकते हैं। मेरे संकल्पों में, मैं मुंबई शहर के प्रति यदि मैं कुछ बड़ा नहीं कर सकती, तो कम से कम बुरा तो नहीं करूंगी। मैं जो भी संभावनाएं हों, उनमें योगदान देने का पूरा प्रतिबद्ध रहूंगी। सही नीतियों और योजनाओं के माध्यम से, मुंबई को सुरक्षित, स्वस्थ और सहज जीवनस्तर का हक प्राप्त हो सकता है।
– रितिका सिंह

सुरक्षित, हरित और सुखद आवास स्थल

मैं २०२४ में मुंबई के विकास में सकारात्मक योगदान करने की कल्पना करता हूं, जिससे शहर की समृद्धि में सुधार हो। मुंबई शहर के प्रति मेरा संकल्प है कि मैं उसकी सांस्कृतिक विविधता को समझूं और इसके विकास में सकारात्मक योगदान दूं। ड्रीम सिटी के विकास में मेरा सकारात्मक योगदान होगा, जिससे यह एक सुरक्षित, हरित और सुखद आवास स्थल बने।
– सुदर्शन त्रिपाठी

दुकान मालिकों को दिया जाए जिम्मा

मुंबई शहर अपने काम और डिसिप्लिन के लिए जाना जाता है। मुझे लगता है कि हर इलाके कीr दुकानों में से कुछ दुकानों के मालिकों को उस एरिया में सफाई का जिम्मा दिया जाना चाहिए। कुछ स्वूâल और कॉलेजों को भी ग्रीनरी बढ़ाने का काम दिया जाना चाहिए। सच तो ये है कि अगर हम गंदगी पैâलाना कम कर दें तो सफाई की जरूरत भी कम पड़ेगी।
उर्वशी झा, पॉडकास्ट पब्लिसिस्ट, द रणवीर अलहावादिया शो

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