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पंचनामा : कब रुकेगा आग लगने का सिलसिला? …मुंबई में हर साल बढ़ रही हैं घटनाएं

प्रशासन, आम लोगों की लापरवाही भी है जिम्मेदार

ट्विंकल मिश्रा

हर साल की तरह बीते साल यानी २०२३ में भी मुंबई में कई आग की घटनाएं सामने आर्इं। इन आग की घटनाओं से कई लोगों की मौत हुई तो कई लोग घायल हुए। आग की घटनाएं और मुंबई का विकास एक साथ चल रहे हैं। कहने का मतलब है जैसे-जैसे मुंबई का विकास हो रहा है, वैसे-वैसे आग की घटनाएं भी कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। आग लगने के जिम्मेदार कई लोग हो सकते हैं, आप प्रशासन की गलितयों को भी गिना सकते हैं तो आम लोगों की लापरवाही भी आग लगने का कारण बनती है। यही नहीं शहर में जो बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतें बन रही हैं, उसमें कई ऐसी चीजें उपयोग में लाई जाती हैं जो न केवल आग को बढ़ावा देती हैं, बल्कि वह धड़ल्ले से यूज भी हो रही हैं। मुंबई में हर साल आग लगती है, हर साल कुछ न कुछ उपाय किए जाते हैं, जो नाकाफी साबित होते हैं। इसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि `यह आग कब बुझेगी?’
कोर्ट ने जताई नाराजगी
आग की घटनाओं को देखते हुए मुंबई हाई कोर्ट ने भी महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई की है। मुख्य न्यायाधीश डी.के उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है और कोई भी ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती। चीफ जस्टिस उपाध्याय ने कहा कि आग लगने की घटनाएं बढ़ती दिख रही हैं। इस शहर में हर दूसरे दिन आग लगने की घटना होती है और लोगों के जान गंवाने की खबरें आती हैं। मुंबई हाई कोर्ट ने कहा कि यह उसका काम नहीं है कि वह सरकार को यह बताती रहे कि क्या कदम उठाने की जरूरत है। चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसा नहीं किया गया है। क्या हम यहां आपको (सरकार को) हर कार्रवाई के लिए बताने को बैठे हैं? क्या यही हमारा काम है? यहां यह सब क्या हो रहा है?
आग लगने की वजह
अमूमन आग लगने की वजह अलग-अलग होती है। ऊंची-ऊंची इमारतों में आग लगने की वजह अधिकांश शॉर्ट-सर्किट का होना बताया जाता है, जबकि स्लम इलाकों में शॉर्ट सर्किट होने, सिलेंडर ब्लास्ट होने, बिजली के मीटरों में आग लगने या फिर अन्य कारणों से आग लगती है। कभी-कभी कुछ प्रशासनिक लापरवाहियों के कारण भी आग लगने की घटना सामने आती है, जैसे गैस की पाइप लाइनों का लीकेज होना।
आग फैलने के कारण
स्लम इलाकों में आग तेजी से फैलती है, क्योंकि यहां घर काफी सटे हुए होते हैं और घरों में बिजली के उपकरणों और एलपीजी सिलेंडरों के ब्लास्ट होने की वजह से आग तेजी से फैलती है। जबकि हाई राइज इमारतों में बिजली के उपकरणों, फर्नीचरों और अन्य वजहों से तेजी से आग फैलती है।
गगनचुंबी इमारतों में क्यों लगती है आग?
मुंबई में जितने भी हाई राइज बिल्डिंग्स बन रही हैं, उन सभी में आग यंत्रणा से संबंधित सभी जरूरी उपाए किए जाते हैं। इसके बावजूद इमारतों में आग वैâसे लग जाती है? इस बारे में जानकारों का कहना है कि दरअसल, इमारतों में दीवारों पर लगने वाले पेंट से लेकर, फर्नीचर और बड़े-बड़े ग्लास ये सभी आग को बढ़ावा देते हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि पेंट में जो केमिकल होता है, उसकी वजह से आग फैलती है तो वहीं घरों में फर्नीचर की वजह से भी आग फैलती है। यही नहीं कमर्शियल इमारतों की बाहरी दीवारों में लगने वाले बड़े-बड़े ग्लास की वजहों से भी आग फैलती है और धुआं बाहर नहीं जा पाता, जिससे दम घुटता है। दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आग की अधिकांश घटनाएं इमारत के विद्युत भागों जैसे सर्किट बॉक्स, मीटर बॉक्स या वायरिंग पैनल से उत्पन्न होती हैं। ऐसा घटिया विद्युत प्रतिष्ठानों के कारण होता है, जिनकी लंबे समय तक जांच नहीं की जाती है। आवासीय और वाणिज्यिक भवनों में विद्युत ऑडिट के लिए एक अनिवार्य प्रावधान होना चाहिए। बीएमसी और एमएफबी दिशा-निर्देशों को शामिल करने के लिए राज्य के ऊर्जा विभाग के साथ समन्वय कर रहे हैं। अधिकारी ने आगे बताया कि भले ही नवनिर्मित आवासीय भवनों में इनबिल्ट अग्निशमन प्रणालियां हैं, लेकिन २००० के दशक की शुरुआत में बनाई गई अधिकांश इमारतों में यह नहीं है। इन इमारतों में आग लगने की ज्यादातर घटनाओं पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है, जिससे लोगों की जान चली जाती है।
लगातार बढ़ रही हैं आग लगने की घटनाएं
मुंबई फायर ब्रिगेड (एमएफबी) के अनुसार, जनवरी २०२३ से लेकर जुलाई २०२३ तक आग से संबंधित २,९२५ कॉल दर्ज की गई। आग की बड़ी घटनाएं ऊंची इमारतों में दर्ज की गर्इं। जैसे आरए रेजीडेंसी, कुर्ला में एसआरए बिल्डिंग सहित अन्य इमारतें। एमएफबी डेटा के अनुसार, कुल लगभग १०,००० आपातकालीन कॉल प्राप्त हुई हैं, जिनमें से २,९२५ आग कॉल, ४,५१५ बचाव कॉल और २,५३३ अन्य कॉल शामिल हैं। यह डाटा तो आधे साल का है। अंदाजा लगाइए साल भर में कितनी घटनाएं सामने आई होंगी। सरकार की लापरवाही का अंदाजा इन आकड़ों से लगाया जा सकता है। मुंबई फायर ब्रिगेड (एमएफबी) के अनुसार, २०१८ और २०२३ के बीच मुंबई में १८,२७२ आग की घटनाएं दर्ज की गर्इं, जिसके परिणामस्वरूप १०२ मौतें हुर्इं और ९६७ घायल हुए। २०२३ में आग से संबंधित घटनाओं में ३३ लोगों की मौत हो गई, जो २०२० के बाद से सबसे अधिक संख्या है।
गोदाम व कारखानों में आग लगने के केस
मुंबई और उसके आस-पास स्थित जितने भी एमआईडीसी इलाके हैं, वे सभी आग की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं। पालघर जिले का बोईसर एमआईडीसी इलाका इस लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील है। यहां हर साल आग की भीषण घटनाएं घटित होती हैं, जिसमें कई लोगों की जान भी जाती है और ऐसी घटनाएं अनेकों बार घट चुकी हैं। इसके बावजूद इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी कई कारखानों और गोदामों में आग लग चुकी है। मुंबई के कुर्ला इलाके में स्थित एक गोदाम में आग लगी, वो लकड़ी का गोदाम है। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।
साल २०२३ में आग लगने की प्रमुख घटनाएं
नवंबर २०२३ में, मुंबई की एक २४ मंजिला आवासीय इमारत में आग लग गई थी। इस घटना में प्रशासन ने १३५ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था। दिसंबर २०२३ में, गिरगांव चौपाटी के पास एक चार मंजिला इमारत में आग लग गई थी. इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। जनवरी २०२४ में गोरेगांव की एक सात मंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी, इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई थी। अक्टूबर २०२३ में गोरेगांव की एक इमारत में आग लगने से सात लोग घायल हो गए थे।
२०२३ में सबसे अधिक केस आए सामने
मुंबई फायर ब्रिगेड (एमएफबी) के आंकड़ों के अनुसार, १५ दिसंबर २०२३ तक मुंबई में आग से संबंधित घटनाओं में ३३ लोगों की जान चली गई, जो २०२० के बाद से सबसे अधिक संख्या है। इसके अलावा आग से संबंधित कॉल पिछले चार वर्षों में इस बार सबसे अधिक रही। आंकड़ों के अनुसार, एमएफबी को २०२३ जनवरी से दिसंबर के बीच आग लगने की ४,७२१ कॉलें मिलीं, जबकि आग की घटनाओं से २९० लोग घायल हुए और ३३ लोगों की जान चली गई। साल २०२२ में यह संख्या दोगुनी से भी अधिक है। इस साल दिवाली के दौरान, एमएफबी ने ६५५ कॉल दर्ज कीं, जो सबसे अधिक है।

इमारतों में टफन ग्लास जरूरी
टफन ग्लास पर आग का क्या प्रभाव पड़ता है। टफन ग्लास साधारणतया २४३ष्ट से २५०ष्ट सेंटीग्रेड तक तापमान सह सकता है, इससे अधिक तापमान होने पर यह टूट कर बिखर जाएगा। आग से बचाव के लिए टफन ग्लास की बजाय फायर रेटेड ग्लास का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के ग्लास में टफन ग्लास की दो लेयर्स या पैनल्स के बीच एक प्रकार का पारदर्शी जैल जिसे `इनट्यूमेसेंटस’ जैल भी कहते भर दिया जाता है यह जैल आग लगने पर एक तापरोधी ढाल या `शील्ड’ का कार्य करता है तथा उच्च तापमान तथा विकिरण द्वारा आने वाली ऊष्मा से बचाव करता है।
-राम एम.भटिया, पुर्व उपाध्यक्ष, (बिल्डर असोसिएशन)

लोगों की राय
बिल्डिंग में ज्यादा तर आग लगने की वजह शॉर्ट-सर्किट होती है या फिर ऐसा सुनने में आता है कि कोई तार खुला रह गई था, जिस कारण आग लग गई। बाकी जो अन्य वजह है वह गैस के कारण और खाना बनाते वक्त तो यह वजह काफी दुर्लभ होती है, क्योंकि ज्यादातर लोगों को पता होता है कि क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। जहां तक मैंने सुना है, ऐसी बड़ी आग की घटना पुरानी बिल्डिंग में ज्यादा होती है, जो साल २००० के वक्त बनार्इं गई थी क्योंकि उस वक्त बिल्डिंगों में आग से बचने के लिए घर में या घर के बाहर अग्नि सुरक्षा पाइप लाइन नहीं लगाई थी, जो अब की इमारतों में अनिवार्य कर दिया है। मेरे हिसाब से सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और इसे हर बिल्डिंग में अनिवार्य करना चाहिए। -कविता शुक्ला, ठाणे रहवासी

प्रशासन द्वारा किए जा रहे हैं उपाय
आग की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से उपाय किए जा रहे हैं। बेहतर निकासी बुनियादी ढांचे, बीआईएस-प्रमाणित वायरिंग, नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट और अनिवार्य विद्युत ऑडिट से भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकेगा। सुरक्षित जीवन समय की मांग है। बचाव कार्यों के लिए मुंबई में ३५ फायर स्टेशन और १९ मिनी फायर स्टेशन हैं। हाल ही में वॉर्ड स्तर पर आग की घटनाओं से निपटने के लिए २२ त्वरित प्रतिक्रिया वाहन (क्यूआरवी) पेश किए गए थे। इन क्यूआरवी को भीड़भाड़ और संकरी गलियों से गुजरने के लिए डिजाइन किया गया है।
-आत्माराम मिश्रा, वरिष्ठ अधिकारी, फायर ब्रिगेड, मनपा

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