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पंचनामा : मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया में शिंदे क्यों नहीं दे रहे साथ?

-नागरिकों की सुरक्षा मामले में विफल है घाती सरकार!

अभिषेक कुमार पाठक

२ करोड़ से अधिक वाहनों के पास नहीं हैं सुरक्षा के लिए जरूरी सिक्योरिटी नंबर प्लेट
मुंबई में वाहनों से दुर्घटना और उनसे जुड़े अपराध काफी ज्यादा देखे जाते हैं। इन वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए २०११-२०१२ में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने के लिए नए नियम आए, लेकिन तब से अब तक महाराष्ट्र में मात्र टेंडर निकला है, काम नहीं हुआ है। गौर करने वाली बात ये है कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा समर्थित महाराष्ट्र की शिंदे सरकार उनके डिजिटल योजना में साथ नहीं दे रहे हैं। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि शिंदे सरकार नागरिकों की सुरक्षा के मामले में असफल साबित हो रही है।
भारत में होने वाले अधिकांश अपराध गाड़ियों की वजह से होते हैं, जिसको मद्देनजर रखते हुए कुछ साल पहले भारत सरकार ने वाहनों की पहचान से संबंधित कई मुद्दों को हल करने के लिए हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) की योजना लेकर आई थी। इसके तहत नंबर प्लेट उपभोक्ता की पूरी जानकारी और अन्य विशेषताओं से लैस होता है। जैसे कि नंबर प्लेट पर ३डी होलोग्राम, एक रिफ्लेक्टिव फिल्म इंस्क्रिप्शन, जिस पर `भारत’ लिखा हो और एक लेजर-नक्काशीदार सीरियल नंबर होता है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से कई राज्य सरकारों ने २०११ की शुरुआत में ही अपने-अपने राज्यों में इस योजना की शुरुआत कर दी। हालांकि, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कुछ राज्यों को बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद भी लागू नहीं किया गया है।
नंबर का डिजिटल प्लान क्यों हुआ फेल
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य और राहत के संस्थापक डॉ. कमलजीत सोई ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार डिजिटलीकरण को काफी बढ़ावा देती है, लेकिन अब तक एचएसआरपी योजना के क्रियान्वयन में विफल रही है। देश की आर्थिक राजधानी होने के बावजूद राज्य में १ अप्रैल २०१९ से पहले पंजीकृत २ करोड़ से अधिक वाहन हैं, जिन्हें एचएसआरपी के साथ जुड़ना बाकी है। ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने इसे लागू करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पहले भी कई मौकों पर एचएसआरपी आपूर्तिकर्ताओं के चयन के लिए निविदा जारी की, लेकिन हर बार असफल हुई। बोली जमा करने की अंतिम तिथि पिछले ५ महीनों में कई बार बढ़ाई गई है, आखिरी तारीख १२ फरवरी २०२४ को थी, जिसे एक बार फिर बढ़ा कर अप्रैल तक कर दिया गया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने दिसंबर २०१८ में राजपत्र अधिसूचना और एस.ओ. जारी किया था, जिसके तहत १ अप्रैल २०१९ को या उसके बाद बेचे जाने वाले सभी वाहनों पर वाहन निर्माताओं (ओईएम) के लिए एचएसआरपी लगाना अनिवार्य कर दिया गया था। पूरे देश में यह योजना लागू भी हो गई है, लेकिन महाराष्ट्र में अब तक लागू नहीं हो सका है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा २०२३ और २०२४ के बीच लगातार ६ बार टेंडर निकाले गए हैं, फिर भी अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
मुंबई में उच्च सुरक्षा प्लेट की जल्द शुरुआत करना बहुत जरूरी है। इससे शहर की सुरक्षा में सुधार हो सकता है और जनता को आतंकी हमलों और अन्य जोखिमों से बचाया जा सकता है। सुरक्षा के मामले में देरी का कोई मौल्य नहीं होता। मुंबई में हाई सिक्योरिटी प्लेटों की जल्द से जल्द शुरुआत सुरक्षा को मजबूती देने में मदद कर सकती है और लोगों को सुरक्षित महसूस करने में मदद कर सकती है। सरकार को इस प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करना चाहिए।
-प्रथमेश झा, समाजसेवक
एचएसआरपी योजना के क्रियान्वयन का वाहनों की सुरक्षा और वाहन संबंधी आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य का राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा संबंध है। महाराष्ट्र में अतीत में आतंकवादी और अन्य राष्ट्र-विरोधी तत्वों द्वारा कई हमले हुए हैं, किसी और हमले के लिए इंतजार करना बुद्धिमानी नहीं होगी। हमारा महाराष्ट्र राज्य सरकार से अनुरोध है कि वो राज्य में पुराने वाहनों पर एचएसआरपी योजना को लागू करने के लिए तुरंत ओईएम चैनल अपनाए।
-डॉ. कमलजीत सोई,
अध्यक्ष-राहत द सेफ कम्युनिटी फाउंडेशन, सदस्य-राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद

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