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पंचनामा : नई फ्लेक्सीबल वर्क शेड्यूल से मुंबईकरों को मिलेगी भीड़ से राहत? …रेलवे ने शुरू की फ्लेक्सीबल वर्क शेड्यूल

मुंबई की कंपनियों से दो शिफ्ट में काम करने की अपील
ट्रेनों में भीड़ कम करने के लिए नई पहल 

संदीप पांडेय

मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में रोजाना करीब ९० लाख लोग यात्रा करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में भीड़ को संभालना कोई मामूली बात नहीं है। इसी भीड़ को कम करने के लिए रेलवे ने ‘फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल स्कीम’ यानी लचीली कार्यसमय योजना की शुरुआत की है। इसका मतलब है कि काम को दो शिफ्ट में बांटना। इस पहल से कर्मचारी दो शिफ्ट में काम करेंगे। इसका फायदा यह होगा कि जो कर्मचारी एक साथ आते थे और एक साथ जाते थे अब बंट कर शिफ्ट में आएंगे और जाएंगे। इससे ट्रेनों में भीड़ कम होगी। अमूमन ट्रेनों में सुबह ७ बजे से लेकर १२ बजे तक भीड़ देखने को मिलती है और शाम को ५ बजे से लेकर देर रात ११ बजे तक। जबकि, दोपहर में और रात के ११ बजे के बाद भीड़ कम हो जाती है। रेलवे का कहना है कि जब ट्रेनों में भीड़ कम हो जाती है तो कंपनियों या ऑफिसेस के कर्मचारियों को उसी समय काम पर बुलाना चाहिए। रेलवे ने इसे ‘फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल स्कीम’ नाम दिया है।

पीक आवर्स में जोखिम होगा कम 
सेंट्रल रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक रजनीश गोयल ने बताया कि उन्होंने विभिन्न संस्थानों में अपने कर्मचारियों के लिए फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल स्कीम लागू करने के लिए पत्र लिखा था। जिसमें से कई संस्थानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जो इस नियम को लागू करने के लिए इच्छुक हैं। गोयल ने कहा कि यह पैâसला इसलिए लिया गया है ताकि कर्मचारी पीक आवर्स के दौरान लोकल ट्रेनों में यात्रा करते समय कोई जोखिम न लें। उन्होंने बताया कि ऑफ पीक आवर सुबह ७.३० से पहले, सुबह ११ बजे से शाम ४ बजे के बीच और रात ८ बजे से दिन के अंत तक का समय माना जाता है।

रेलवे ने शुरू की पहल 
बता दें कि यह स्कीम मध्य रेलवे के मुंबई मंडल में १ नवंबर २०२३ से लागू हो गई है। डीआरएम में कुल १,५०० कर्मचारी हैं, जिसमें से ४०० कर्मचारियों ने इस योजना को चुना है। इस योजना के तहत दो शिफ्ट बनाए गए हैं, जिसमें सुबह ९.३० बजे से शाम ५.४५ बजे तक और सुबह ११.३० बजे से शाम ७.४५ बजे तक। कर्मचारियों को हर महीने की पहली तारीख को उपरोक्त शिफ्टोें में से किसी एक को चुनने का विकल्प है। यह स्कीम जल्द ही सेंट्रल रेलवे के सभी कार्यालयों में लागू होगी। बता दें कि सेंट्रल रेलवे इस पहल को शुरू करने वाला पहला केंद्रीय सरकारी संगठन है।

रेलवे ने संस्थाओं में भेजा पत्र
मुंबई डिवीजन के सेंट्रल रेलवे ने फ्लेक्सिबल वर्क आवर्स की शुरुआत की है। इसके साथ ही रेलवे नेटवर्क पर यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ने कई ऑफिसेज को चिट्ठी लिखी है। लेटर के अनुसार फ्लेक्सिबल वर्क आवर्स को लागू करने की गुजारिश की गई है, जिसमें सभी प्राइवेट सेक्टर और सरकारी दफ्तर सहित बैंक भी शामिल हैंै। रेलवे ने ट्रेनों में होने वाली भीड़ को कम करने के लिए प्राइवेट और सरकारी संस्थानों से कर्मचारियों के लिए फ्लेक्सिबल वर्क स्कीम अपनाने की गुजारिश की है। रेलवे ने लगभग ६५० प्राइवेट और सरकारी संस्थानों को चिट्ठी लिखी है।

१३ संस्थानों ने दिया सकारात्मक जवाब
मध्य रेलवे के फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल पहल पर १३ संस्थानों ने पत्र के जरिए सकारात्मक जवाब दिया है, जिसमें मुंबई रेल विकास निगम, पोस्ट मास्टर जनरल मुंबई, आईआरबी इंप्रâास्ट्रक्चर, पोस्टल डिपार्टमेंट, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री, जनरल इंश्योरेंस, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, ग्लैक्सो स्मिथक्लिन, रोश प्रोडक्ट्स, गोदरेज एंड बॉयस, जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट और गैमन इंडिया शामिल है। बता दें कि २०१५ में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि ट्रेनों में भीड़भाड़ को रोकने के लिए कुछ सेक्टरों में फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल लागू करना चाहिए।

ट्रेनों से गिर कर हर दिन मरते हैं यात्री  
मुंबई की रेल यात्रा अन्य साधनों से सरल, सुगम और किफायती भी है, लेकिन ट्रेन में भारी भीड़ के चलते लोगों को यात्रा करने में काफी कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। लोग अपने कार्यालय में समय पर पहुंचने के लिए अक्सर एक फिक्स ट्रेन से यात्रा करते हैं, जिससे लोकल ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है। कभी-कभी तो लोग लोकल ट्रेन में यात्रा करते समय अपनी जान तक की परवाह नहीं करते हैं और ट्रेन के पायदान पर लटकर यात्रा करते हैं, जिसके चलते आए दिन यात्रियों के गिर कर मरने की घटनाएं सामने आती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल रेलवे ने फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल पहल शुरु करते हुए अपने कार्यालय के समय में बदलाव किया है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
कई कंपनियों को लिखा पत्र 
मध्य रेलवे ने मुंबई के ६५० से अधिक सरकारी और निजी संगठनो को पत्र लिखकर फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल लागू करने का सुझाव दिया है। इससे लोकल ट्रेनों में भीड़ कम करने में काफी मदद मिलेगी। कोविड-१९ महामारी के खत्म होने के साथ लोकल ट्रेनों में यात्रियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।
डॉ. शिवराज मानसपुरे,
सीपीआरओ, मध्य रेलवे

रेलवे ने नहीं की कोई तैयारी
किसी भी योजना को शुरू करने से पहले उससे जुड़े लोगों को उसकी जानकारी देनी चाहिए, लेकिन सेंट्रल रेलवे ने किसी को इसकी जानकारी देना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने तो इसकी कोई तैयारी भी नहीं की। सेंट्रल रेलवे भीड़ को कम करने के लिए कई उपाय योजना शुरू करती रहती है, लेकिन वह कभी क्रियान्वित नहीं होती हैंै। किसी भी योजना को शुरू करने से पहले लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। अधिक से अधिक कार्यालयों में इसकी जानकारी देनी चाहिए। फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल स्कीम से भीड़ कम होगी, लेकिन किसी ने इस पर स्टडी नहीं की है। इस स्कीम का कितना फायदा होगा और कितना नुकसान, यह भी नहीं मालूम. केवल मीडिया में आने के लिए ऐसा सबकुछ किया जा रहा है। मुझे इस स्कीम का कोई अच्छा फ्यूचर फिलहाल नहीं दिख रहा है। एक दिन में ९० लाख लोग लोकल ट्रेनों से यात्रा करते हैं, उसमें ये ४००-५०० लोगों के पार्टिसिपेट करने से कुछ नहीं होगा। इसके लिए कम से कम २० प्रतिशत लोगों को इस स्कीम में शामिल होना होगा तब जाकर इसका कुछ फायदा दिखेगा। यह कदम अच्छा है, लेकिन लोगों को इसके बारे में बताना और समझाना चाहिए था।
एडवोकेट दरमियान सिंह बिष्ट, अध्यक्ष, रेलवे पैसेंजर्स वेलफेयर एसोसिएशन 

‘दोपहर का सामना’ ने इस विषय को लेकर यात्रियों से बातचीत कर उनकी राय जानी।
स्वागत योग्य कदम
मध्य रेलवे ने मुंबई के कई सरकारी और निजी संगठनोें को पत्र लिखकर फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल लागू करने का सुझाव दिया है। इससे लोकल ट्रेनों में भीड़ कम करने में काफी मदद मिलेगी। कोविड-१९ महामारी के खत्म होने के साथ लोकल ट्रेनों में यात्रियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। ट्रेनों से गिरकर हर दिन लोगों की मौत होती है। इस स्कीम से अगर रेलवे की स्थिति में सुधार होता है तो यह स्वागत योग्य कदम है।
मनमोहन सिंह, कलवा

प्रायोगिक तौर पर करें शुरू 
रेलवे द्वारा शुरू किये गए फ्लेक्सी टाइम से कुछ न कुछ भीड़ तो जरुर कम होगी, लेकिन कितना कम होगी यह नहीं पता। इसे पहले प्रायोगिक तौर पर शुरू करना चाहिए। अगर प्रयोग सफल होता है तो इस योजना को लागू करना चाहिए। इस योजना से न केवल लाखों रेलवे यात्रियों को फायदा होगा बल्कि इंटरनेशनल शहर कही जाने वाली मुंबई दिन रात दौड़ेगी। इससे लोगों की आय में भी वृद्धि होगा।
क्षितिज दात्रे, डोंबिवली

फ्रेश माइंड से काम कर पाएंगे
सेंट्रल रेलवे द्वारा शुरू की गई फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल अगर सभी सरकारी और निजी संस्थानों में लागू होता है तो यह काफी अच्छा होगा। जब लोग आराम से ऑफिस पहुंचेंगे तो प्रâेश माइंड से अपना काम कर पाएंगे। इससे न केवल कंपनी की प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी होगी बल्कि लोगों का तनाव भी कम होगा, साथ ही आने जाने के लिए एक अच्छा माहौल मिलेगा।
दिनेश दुबे, नालासोपारा

रेलवे और यात्रियों दोनों की भलाई
यह स्कीम तो बहुत अच्छी है, लेकिन क्या यह सभी कार्यालयों में लागू हो पाएगी। यह बड़ा सवाल है। अगर ऐसा कुछ भी होता है तो यह काफी हद तक अच्छा है, क्योंकि प्रतिदिन लोकल में यात्रा करने के दौरान भीड़ में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस भागदौड़ भरी जिंदगी में वैसे भी लोगों के पास समय कम हो होता है और लोग अपना जीवन अच्छे से जीना चाहते हैंै। अगर उन्हें एक सुकूनभरा माहौल मिलता है तो यह अच्छी बात होगी। इसमें रेलवे और यात्रियों दोनों की भलाई है।
राहुल पांडेय, घाटकोपर

रेलवे का ऐतिहासिक कदम
मैंने भी सेंट्रल रेलवे के फ्लेक्सिबल वर्क शेड्यूल के बारे में सुना है। यह मुझे काफी अच्छा लगा। अगर ऐसा होता है तो यह वास्तव में हमारे लिए लोकल में ट्रेवल करना थोड़ा आसान हो जाएगा। इस स्कीम से न केवल ट्रेवल आसान होगी बल्कि रेलवे की भी कमाई में वृद्धि होगा। अगर यह प्रयोग सफल होता है तो यह सबके लिए हिलकर होगा।
उमेश शर्मा, कलवा

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