मुख्यपृष्ठग्लैमर‘तो आपकी डिमांड बढ़ जाती है!’ -पंकज त्रिपाठी

‘तो आपकी डिमांड बढ़ जाती है!’ -पंकज त्रिपाठी

अपनी प्रतिभा के बल पर बॉलीवुड में एक दशक से ज्यादा समय तक कड़े संघर्ष के बाद अपना मुकाम व स्थान बनानेवाले पंकज त्रिपाठी ने ‘कालीन भैया’ के किरदार के रूप में खूब सराहना व वाहवाही लूटी। ‘ओंकारा’, ‘मसान’, ‘गैंग ऑफ वासेपुर’, ‘सुपर-३०’, ‘तान्हाजी’, ‘मिमी’ जैसी कई हिट फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवानेवाले पंकज त्रिपाठी ने अपने रोचक सफर के अनुभवों को बेबाकी से साझा किया। पेश है, पंकज त्रिपाठी से हिमांशु राज की बातचीत के प्रमुख अंश-

 बिहार से बॉलीवुड तक का आपका सफर कैसा रहा?
काफी रोचक रहा। बहुत उबड़-खाबड़ रास्तों के साथ ही कठिन रास्ते भी थे। लेकिन यही जीवन है। जीवन में थोड़ी चुनौती और कठिनाई तो होगी ही। जिंदगी बहुत आसान नहीं थी, पर मजेदार रही। अभी तक की मेरी यात्रा बेहद खूबसूरत रही है। सिनेमा या जिस भी माध्यम से मेरी जो भी उपलब्धि रही है वह किसी और के लिए प्रेरणादायी बन सकती है। मेरी इस यात्रा को देखकर कोई भी फिल्म में जाने की हिम्मत कर सकता है।
 ‘कालीन भैया’ के किरदार के बाद इंडस्ट्री ने आपके लिए लाल कालीन बिछा दिया। क्या कहना चाहेंगे?
शुक्रिया कहना चाहूंगा। और क्या कह सकता हूं क्योंकि जब ऑडियंस आपको पसंद करती है तो इंडस्ट्री में आपकी डिमांड बढ़ जाती है। उन्हें लगता है इस अभिनेता को लोग पसंद कर उसके किरदार को स्वीकार कर रहे हैं, तो आपकी डिमांड बढ़ जाती है। केवल फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, हर इंडस्ट्री का यह उसूल है सफलता को सलाम करना। ‘कालीन भैया’ के किरदार के बाद जनता और इंडस्ट्री ने मेरे किरदार को पसंद करने के साथ ही सराहा।
 वेब सीरीज या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की बाढ़-सी आ गई है। गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। आप क्या कहना चाहेंगे?
हां, वह तो है ही। जब दुनियाभर का काम होगा तो क्वालिटी में गिरावट होगी ही। कहां से लाएंगे क्वालिटी वर्क, कहां से लाएंगे कहानियां, वैसे भी हमारी इंडस्ट्री एक ढर्रे पर चलती है। एक किस्म का कंटेंट हिट हो गया तो वैसे ही सौ फिल्में बन जाएंगी। ज्यादा काम होगा तो गुणवत्ता में थोड़ी गिरावट तो होगी ही। मैं अभिनेता हूं और कंटेंट वाले साइड से मेरा ज्यादा वास्ता नहीं है। मुझे जो कहानी पसंद आती है मैं उसका हिस्सा बनता हूं।
 व्यावसायिक फिल्मों के बोलबाले में आप अपने आपको कहां पाते हैं, जहां फिल्मों की सफलता १०० से २०० करोड़ का व्यवसाय निर्धारित करती है?
मैं कभी भी कला के व्यावसायिक पक्ष पर उतना ध्यान नहीं देता हूं। हालांकि वह बहुत जरूरी है। फिल्म हिट होती है तभी दूसरी बनती है। मैं जिन-जिन वेब सीरीज व फिल्मों का पिछले एक वर्ष से हिस्सा रहा हूं, सभी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। सिनेमा एक मीडियम ऑफ आर्ट है और उसमें कॉमर्स भी काफी संलग्न है। यहां व्यावसायिकता का ध्यान रखा जाता है। हर कोई चाहता है कि उसकी फिल्म चले, ज्यादा पैसे कमाए। मेरे लिए व्यावसायिक सिनेमा व वेब सीरीज सब एक ही जैसा है। मेरी उपस्थिति दोनों जगह उतनी ही है।
 आप पढ़ने के काफी शौकीन रहे हैं। केदारनाथ सिंह, आलोक धनवा जैसे साहित्यकारों की कविताएं आपको प्रभावित करती हैं। कोई युवा लेखक जिसकी रचना आपको रुचिकर लगती हो?
बहुत सारे युवा लेखक हैं, जिनकी रचना मुझे रुचिकर लगती है। सत्या व्यास, पुनीत, गौरव सोलंकी, महेश चंद्र पुनेठा जैसे कई लेखक हैं, जिनकी रचनाएं मुझे आकृष्ट करती हैं। अभी एक लेखक नहीं पत्रकार हैं रोहिण कुमार, उनकी किताब ‘लाल चौक’ पढ़ना शुरू किया है। अटल बिहारी वाजपेई जी की बायोपिक भी पढ़ रहा हूं।
 निजी जीवन में पंकज त्रिपाठी वैâसे पिता हैं?
यह प्रश्न अगर आप पंकज त्रिपाठी से पूछेंगे तो वह कहेंगे कि वह बहुत अच्छे पिता हैं। बेटी से पूछा जाता तो वह सही बताती कि मैं वैâसा पिता हूं? अगर ईमानदारी पूर्वक अपना आकलन करूं तो मुझे लगता है कि मैं एक अच्छा पिता हूं। बस, अपनी पुत्री को कसरत करने के लिए तंग करता हूं।

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