मुख्यपृष्ठनए समाचारलकवा रोग हुआ पस्त, मरीज हुए मस्त ...चार घंटे तक चली सर्जरी

लकवा रोग हुआ पस्त, मरीज हुए मस्त …चार घंटे तक चली सर्जरी

तब बची मरीजों की जान
सामना संवाददाता / मुंबई
मनपा के कूपर अस्पताल में पहुंचे लकवाग्रस्त दो मरीजों का समय पर इलाज शुरू होने से उनकी जान बच सकी है। दोनों मरीजों पर करीब चार घंटे तक मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टोमी नामक सर्जरी चली। इन दोनों मरीजों की हालत में अब ९० फीसदी से ज्यादा सुधार है। इस तरह मनपा अस्पताल में समय पर शुरू हुए इलाज से लकवा पस्त हो गया और दोनों मरीज मस्त यानी तेजी से ठीक हो रहे हैं।
बता दें कि वर्तमान में लकवे के इलाज पद्धति में कई परिवर्तन आए हैं। इसमें लकवाग्रस्त रोगियों में लक्षण शुरू होने के साढ़े चार घंटे के भीतर उचित इलाज मिल जाए, तो उनमें काफी सुधार हो सकता है। इसके शिकार मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद सीटी अथवा एमआरआई स्वैâन करके इसका सटीक कारण ढूंढ़ने की जरूरत होती है। लकवाग्रस्त का मूल कारण मस्तिष्क को आपूर्ति करनेवाली रक्त वाहिका में थक्का बनना होता है। इसके इलाज में थ्रोम्बोलिसिस या मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी जैसी उन्नत उपचार विधियां प्रचलन में हैं। रक्त के थक्के के स्थान के आधार पर उपचार के इन दो तरीकों में से एक का पालन किया जाता है। इसकी मदद से मस्तिष्क की रक्त वाहिका में प्रवेश करके खून के थक्के को हटा दिया जाता है। कूपर अस्पताल के चिकित्सा विशेषज्ञों ने जन्माष्टमी के दिन लगातार दो मरीजों की सर्जरी कर उन्हें ठीक किया है।

गहन चिकित्सा इकाई में चल रहा है इलाज
पहली घटना में ५६ वर्षीय रिक्शा चालक को सुबह पक्षाघात का लक्षण दिखाई देने के बाद कूपर अस्पताल ले जाया गया। इसी तरह दूसरी घटना में दोपहर में लकवा से पीड़ित ५० वर्षीय महिला मरीज को भर्ती कराया गया। महिला की पहले हृदय वाल्व की सर्जरी भी हो चुकी है। इन दोनों मरीजों को जब भर्ती किया गया, तो उनके शरीर का बायां हिस्सा बिल्कुल भी हिल नहीं पा रहा था। अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रद्युम्न ओक, मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. दीपक रावल, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सालुंखे की टीम ने कम समय में ही बीमारी की पहचान कर ली। इसके बाद मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के जरिए करीब चार घंटे तक सर्जरी चली। फिलहाल दोनों मरीज ९० फीसदी ठीक हो चुके हैं। साथ ही उन्हें अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया है।

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