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सर्दियों में सावधान रहें माता-पिता : नौनिहाल न हो निमोनिया का शिकार

इस बीमारी से सांस लेने में होती है परेशानी
हवा की थैलियों में भर जाता है पानी

सामना संवाददाता / मुंबई
सर्दियों में कई बीमारियां तेजी से पैâलती हैं। ऐसी ही एक बीमारी जो छोटे बच्चों में तेजी से पैâलती है वह निमोनिया है। चिकित्सकों के मुताबिक, निमोनिया के संक्रमण में फेफड़ों की एक या दोनों हवा की थैलियों में सूजन आ जाती है। इसके साथ ही हवा की थैलियों में पानी भरने से उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत भी आ सकती है। इससे बचने के लिए सर्दियों में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतते हुए अपने नौनिहालों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।
निमोनिया संक्रमण में एक या दोनों फेफड़ों की हवा की थैलियों में सूजन आ जाती है। ये हवा की थैलियां फेफड़ों में पाई जाती हैं, जो वायु के आदान-प्रदान में फेफड़ों की मदद करती हैं। इन वायु थैलियों में होनेवाले इंफेक्शन को आमतौर पर निमोनिया कहा जाता है। इस संक्रमण में हवा की थैलियों में बलगम भर जाता है, जिसकी वजह से मरीज को खांसी, कंपकपाहट और सांस लेने में परेशानी होती है और आगे चल कर थैलियों में पानी भर जाता है जो मरीज के अस्पताल में भर्ती होने का कारण बनता है। इस संबंध में बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि निमोनिया की गंभीरता हल्के में लेने से जीवन के लिए खतरा तक हो सकता है। यह मरीज की उम्र पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए बच्चों, बुजुर्गों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में गंभीर निमोनिया विकसित होने की संभावना अधिक होती है।
निमोनिया होने के कारण
निमोनिया कई कारणों से हो सकता है। निमोनिया आमतौर पर वायरस और कभी-कभी बैक्टीरिया के कारण होता है, जिसमें इन्फ्लुएंजा, राइनोवायरस, रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी) और कोरोना शामिल हैं। कभी-कभी यह फंगस के कारण भी हो सकता है, जो आमतौर पर खराब प्रतिरक्षा वाले लोगों को प्रभावित करता है।
इस तरह रोकी जा सकती है बीमारी  
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष कदम ने कहा कि निमोनिया को टीका लगाकर भी रोका जा सकता है। पीसीवी१३ और पीपीएसवी२३ टीकों से खासकर बच्चों और वृद्धों को इसका जोखिम कम हो जाता है। लेकिन ध्यान रखें कि टीके निमोनिया को रोकते नहीं हैं, बल्कि वो निमोनिया होने की संभावना को कम कर देते हैं। यदि हाथों को धोकर साफ न किया जाए तो ये संक्रामक तत्व श्वसन प्रणाली में प्रवेश कर सकते हैं। धूम्रपान करने से संक्रमण से लड़ने की फेफड़ों की शक्ति कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति को निमोनिया का जोखिम बढ़ जाता है।

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