मुख्यपृष्ठस्तंभपारेटिक्स : सिंध हिंद की रस्साकशी में सीट का बंटाधार

पारेटिक्स : सिंध हिंद की रस्साकशी में सीट का बंटाधार

प्रणव पारे

नवंबर २०१८ विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भोपाल हुजूर विधानसभा प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा ने सिंधी समाज के लिए अमर्यादित टिप्पणी की थी।
उस वक्त भी सिंधी समाज उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिला था और बैरागढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उन्हें तलब कर इस मामले में सफाई मांगी थी।
इस मामले को अब फिर से हवा दी जा रही है जो भाजपा के लिए चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि हुजूर विधानसभा में लगभग २४ हजार से भी ज्यादा सिंधी मतदाता हैं। चलो बात यहां तक भी ठीक थी, लेकिन अब इस मामले में संघ से जुड़ा सिंधी समाज का संगठन भी रुचि ले रहा है। इस क्षेत्र में सक्रिय और भाजपा प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी हुजूर विधानसभा से अपनी दावेदारी ठोंक दे तो ज्यादा आश्चर्य की बात नही होनी चाहिए। अंदरखाने की खबर ये है कि हुजूर विधानसभा से भगवानदास सबनानी के लिए संघ का ही एक संगठन फील्डिंग में लगा है, लेकिन मुसीबत ये है कि रामेश्वर शर्मा को यदि किसी ओर सीट से लड़ाया जाए तो फिर लोकसभा भोपाल के समीकरण गड़बड़ हो सकते हैं। अंदरखाने की खबर यह भी है कि उमा भारती ने चुनाव समिति को एक पत्र लिखकर भोपाल की दक्षिण-पश्चिम सीट से विधानसभा के लिए शैलेंद्र शर्मा का नाम प्रस्तावित किया है। शैलेंद्र शर्मा प्रदेश भाजपा के थिंक टैंक माने जाते हैं और वर्तमान में शैलेंद्र शर्मा मध्य प्रदेश कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण के अध्यक्ष हैं। खबर यह भी है कि यदि शैलेंद्र शर्मा को दक्षिण-पश्चिम से उम्मीदवारी नहीं मिली तो उन्हें भोपाल लोकसभा से टिकट मिल सकता है। फिलहाल, हुजूर विधानसभा की इस रस्साकशी को रोकने में पार्टी संगठन के हाथ-पैर फूले हुए हैं। कांग्रेस पार्टी की इस विवाद से बांछे खिली हुई हैं।
पत्थर निशाने पे – मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा दीदी अपने होने का अहसास कराती रहती हैं। ऐसा नहीं कि वो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कोई चुनौती देना चाहती हैं। हां, कभी-कभी शराब की दुकानों पर पत्थर मार देती हैं और इस बहाने सुर्खियां मिल ही जाती हैं। अभी हाल ही में उमा भारती ने भोपाल से सटे रायसेन जिले में एक नया ही शिगूफा छेड़ दिया है। दरअसल, रायसेन के किले में एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसके ताले खुलवाने को लेकर उमा भारती काफी मुखर हैं और अभी कुछ दिनों पहले वे गंगाजल से भरा कलश लेकर अभिषेक करने पहुंचीं, लेकिन ताला नहीं खुला और उमा भारती को वापस लौटना पड़ा। अब दीदी को कौन समझाए की वो पुराने मंदिर-मस्जिद वाला दौर नहीं है। अब तो नए महालोकों के निर्माणो का पॉजिटिव दौर है और हिंदुत्व की धारा को मोड़ा जा चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह उमा दीदी की इस मुखरता से परेशान भी होते हैं, लेकिन कभी भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते, क्योंकि वो उनकी बड़ी बहन जो हैं, लेकिन उनकी श्रीमती, साधना सिंह के पास कोई ऐसा फॉर्मूला है, जिसके कारण ‘ननद- भौजाई’ की आपस मे खूब घुटती है शायद यही वजह है कि शिवराज सिंह चौहान दीदी (उमा भारती) को लेकर ज्यादा चिंतित दिखाई नहीं देते। इस बीच उमा भारती के भतीजे प्रीतम लोधी जी को मंत्रिमंडल में ले लिया गया है, किसी ज्ञानी ने कान में खुसुर-फुसुर कर के बताया कि उमा दीदी का पत्थर निशाने पर ही लगता है। बात सोचनेवाली है।
हाथ आया पर मुंह न लगा – हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार से नए मंत्रियों को कोई खास खुशी हुई है ऐसा लगता नहीं है, राजेंद्र शुक्ल को जनसंपर्क और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्रालय दिया गया है। गौरशंकर बिसेन को नर्मदा घाटी विकास विभाग दिया गया है, वहीं प्रीतम लोधी जो कि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती जी के भतीजे हैं, कुटीर एवं ग्राम उद्योग का स्वतंत्र प्रभार तथा वन विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया है। इसके अलावा २० से ३० दिनों के भीतर आचार संहिता लग सकती है तो समय समाप्ति के पहले मंत्रिमंडल का विस्तार करने से दूरगामी नतीजे भले ही हो सकते हैं, लेकिन मंत्रियों को तो केवल इस बात से संतोष करना है कि चलो बन गए मंत्री अब नाम के आगे पूर्व मंत्री लिखा ही जाएगा।
चंबल में बगावत- मध्य प्रदेश के चंबल में भाजपा के भीतर चल रही बगावत से कांग्रेस के पास खुश होने के लिए बहुत कुछ है। पहला तो ये कि जिस ढंग से भाजपा से कोलारस विधायक रविंद्र रघुवंशी ने भाजपा से इस्तीफा दिया है और अभी चार भाजपा विधायकों के भी पार्टी छोड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं, उससे सिंधिया के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है।
वीरेंद्र रघुवंशी ने सिंधिया के भाजपा आने के बाद से हो रहे घटनाक्रम का खुलकर जिक्र किया और बताया कि सिंधिया समर्थक पूर्व कांग्रेसियों के कारण पुराने कार्यकर्ता स्वयं को असहज और को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के थिंक टैंक २०१९ में हुए तख्तापलट में सिंधिया की भूमिका और उनके आगे के भविष्य को लेकर तब से लेकर अब तक जो कुछ भी बोलते थे, वो अब जमीन पर सच होता दिखाई दे रहा है। इधर भाजपा के पुराने खाटी नेता प्रभात झा जो ग्वालियर से हैं, उनके घर महाराज सिंधिया स्वयं पहुंच गए। ज्ञातव्य हो कि दोनों एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हैं सिंधिया की ये कवायद ये बताती है कि सिंधिया इस चुनावी वैतरणी को पार करने के लिए दमखम के साथ मैदान में हैं और करिश्माई तो वो हैं ही, लेकिन फिलवक्त उनके लिए ‘बहुत कठिन है डगर पनघट की’ वाली पंक्तियां चरितार्थ हो रही हैं। गुरु की भाजपा पर वक्र दृष्टि- भोपाल के कुछ कांग्रेसी नेता और ज्योतिष के ज्ञानी बता रहे हैं कि ४ सितंबर से गुरु की राशि बदल रही है और गुरु ३१ दिसंबर तक वक्री रहेंगे। ज्ञानी बता रहे हैं कि इस दौरान यदि चुनाव हुए तो भाजपा के लिए जीत बहुत कठिन होगी। चलो ठीक है किसी ने पूछा कि ‘गुरु के वक्री होने से कांग्रेस पार्टी का भी तो कुछ बिगड़ सकता है? सामने वाले ने चुटकी ली और कहा, ‘भैया कुछ बिगड़ने के लिए कुछ होना भी तो चाहिए और भाजपा के पास खोने के लिए बहुत कुछ है।’
(लेखक मध्यप्रदेश की राजनीतिक पत्रकारिता में गहरी पकड़ रखते हैं, प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक विषयों पर लगातार काम करने के साथ कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेखन भी करते हैं।)

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