मुख्यपृष्ठसमाचारव्यवस्था परिवर्तन बनी मजाक.... अस्पताल में मरीज बेहाल!

व्यवस्था परिवर्तन बनी मजाक…. अस्पताल में मरीज बेहाल!

• कंधों के सहारे वॉर्डों में पहुंच रहे हैं मरीज
सामना संवाददाता / उज्जैन । उज्जैन में जिला अस्पताल प्रशासन दो साल में लिफ्ट तो नहीं लगवा पाया लेकिन व्यवस्था सुधारने के नाम पर एक और हास्यापद परिवर्तन कर दिया। लिफ्ट के अभाव में पहले प्रथम मंजिल पर स्थित हड्डी वॉर्ड से मरीजों को घसीटकर नीचे उतरना पड़ता था लेकिन अब वॉर्ड को नीचे बना दिया गया, जिससे ऑपरेशान योग्य मरीजों को इसी तरह से घसीटकर ऊपर जाना प़ड़ रहा है। बता दें कि उज्जैन के सबसे बड़े दो मंजिला माधवराव सिंधिया जिला अस्पताल में दो साल से लिफ्ट बंद है। यहां पहले माले पर हड्डी वॉर्ड था। लिफ्ट नहीं होने पर मरीजों को घसीटकर या फिर कंधों के सहारे नीचे उतरना पड़ता था। मरीजों व स्टाफ की लगातार मांग के बाद भी अस्पताल प्रशासन अब तक लिफ्ट तो नहीं लगवा पाया लेकिन व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया। जिम्मेदारों ने ग्राउंड फ्लोर पर स्थित महिलाओं के बी वॉर्ड को प्रथम मंजिल पर शिफ्ट कर दिया और वॉर्ड को हड्डी और ट्रॉमा यूनिट में तब्दील कर दिया, जिससे हड्डी और गंभीर मरीजों को नीचे भर्ती किया जा सकेगा, जबकि मुख्य ऑपरेशन रूम पहली मंजिल पर ही है। मतलब पहले मरीजों को घसीटकर नीचे आना पड़ता था और अब इसी तरह से ऊपर जाना पड़ेगा।
अस्पताल की व्यवस्था
उल्लेखनीय है कि ४५० बेड के जिला अस्पताल में ईएनटी, बर्न, ईएनटी व बच्चों का दो सर्जिकल सहित २५० बेड पहली मंजिल पर हैं। ओटी भी ऊपर होने से गंभीर मरीजों को पहुंचाने के लिए लगी लिफ्ट दो साल से बंद है। मरीजों की इस समस्या को देखते हुए अस्पताल स्टॉफ मंत्री, सांसद व विधायक व भोपाल स्वास्थ्य विभाग को ५० शिकायत कर चुका है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन मिलता रहा है।
लिफ्ट लगने का कर रहे हैं दावा
हाल ही में सिविल सर्जन डॉ. पीएन वर्मा ने कहा था कि नई लिफ्ट की प्रशासकिय स्वीकृति मिलते ही उज्जैन विकास प्राधिकरण टेंडर निकालेगा और तीन महीने में लिफ्ट लग जाएगी। हालांकि अब तक टेंडर नहीं निकलने से मामला अधर में है। आरएमओ डॉ. जितेंद्र शर्मा ने दावा कि महाकाल में लिफ्ट लगाने वाली कंपनी को ठेका दिया गया है।

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