मुख्यपृष्ठसमाचारधर्मार्थ अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज से वंचित मरीज!

धर्मार्थ अस्पतालों में नि:शुल्क इलाज से वंचित मरीज!

– अस्पताल प्रबंधन कर रहे टाल-मटोल… वर्षा गायकवाड ने दी आंदोलन की चेतावनी

सामना संवाददाता / मुंबई

धर्मार्थ अस्पतालों को अपने २० प्रतिशत बेड गरीब मरीजों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है। मुंबई के लगभग ८० धर्मार्थ अस्पतालों में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मरीजों को मुफ्त अथवा रियायती इलाज मुहैया करने में टालमटाल हो रहा है। नतीजतन इन अस्पतालों में गरीबों को नि:शुल्क इलाज नहीं मिल रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में ऐसे अस्पतालों के खिलाफ ठोस कदम उठाना चाहिए। यदि सरकार इस मामले में ठोस रुख नहीं अपनाती है तो इन गरीबों का इलाज करने से इनकार करनेवाले अस्पतालों के सामने मुंबई कांग्रेस आंदोलन करेंगी। इस तरह की चेतावनी विधायक वर्षा गायकवाड ने दी है।
बता दें कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, १९५० के तहत धर्मार्थ अस्पतालों को बहुत सारी सुविधाएं, अनुदान और रियायतें दी जाती हैं, इनमें भूमि, बिजली, पानी, भवन निर्माण में रियायतें, आयात-निर्यात शुल्क माफी, आयकर रियायत आदि का समावेश होता है। इसके बदले में प्रबंधनों को अस्पताल की कुल क्षमता का २० प्रतिशत हिस्सा गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को मुफ्त या रियायती इलाज मुहैया करना अनिवार्य है, लेकिन मुंबई के लगभग ८० धर्मार्थ अस्पताल गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मरीजों को यह सेवा देने में अनिच्छुक दिखाई दे रहे हैं। आरोप है इलाज से बचने के लिए ये अस्पताल अनावश्यक दस्तावेज मांगकर भर्ती प्रक्रिया को जटिल से जटिल बना देते हैं। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष व विधायक वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया है कि ये अस्पताल गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को बेड न होने का झूठा बहाना बनाकर इलाज करने से डराते हैं। वर्षा गायकवाड़ ने कहा है कि इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री के साथ ही शहर व उपनगर जिलाधिकारियों और चैरिटी आयुक्त को दिए एक ज्ञापन दिया गया है, जिसमें मांग की गई है कि ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
ये करा सकते हैं इलाज
एक लाख २० हजार रुपए तक की वार्षिक आय वाले मरीज निजी धर्मार्थ अस्पतालों में मुफ्त इलाज के पात्र हैं, जबकि ३.६० लाख रुपए तक की वार्षिक आय वाले मरीज रियायती इलाज के पात्र हैं। इसके लिए मरीजों को तहसीलदार से प्राप्त आय प्रमाण पत्र और राशन कार्ड अस्पताल में जमा कराना होगा।
इन बातों का उल्लंघन कर रहे अस्पताल
-अधिकांश निजी धर्मार्थ अस्पताल अपनी नेमप्लेट में दान शब्द का उल्लेख नहीं करते हैं।
-कुल बेड क्षमता और गरीब मरीजों के लिए आरक्षित बेड की क्षमता बताने वाले बोर्ड नहीं लगाए गए हैं।
-मुफ्त और रियायती इलाज के बारे में अधिसूचना बोर्ड सामने नहीं लगाए गए हैं।

अन्य समाचार