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भाजपा राज में बेरोजगारी की पराकाष्ठा : मजदूरी करने को मजबूर पद्मश्री पुरस्कार विजेता … ७३ वर्षीय दर्शनम मोगुलैया कर रहे दिहाड़ी मजदूरी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
इन दिनों समूचा देश महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है। देश के पीएम नरेंद्र मोदी चाहे जितनी भी गारंटियां दे दें, लेकिन हकीकत तो यही है कि आज देश दो जून की रोटी के लिए तरस रहा है। भाजपा राज में बेरोजगारी इतनी बढ़ गई है कि पद्मश्री विजेता दर्शनम मोगुलैया आज मजदूरी करने के लिए विवश हो गए हैं। दरअसल, दो साल पहले साल २०२२ में संगीत वाद्ययंत्र ‘किन्नेरा’ के लिए हैदराबाद के दर्शनम मोगुलैया को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्हीं दर्शनम मोगुलैया को हाल ही में हैदराबाद के पास तुर्कयमजाल में एक निर्माण स्थल पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते देखा गया। पुरस्कार के बाद तेलंगाना सरकार से मिले एक करोड़ रुपए नकद को पारिवारिक जरूरतों के चलते उन्हें खर्च करना पड़ा, जिससे ‘किन्नेरा मोगुलैया’ के नाम से लोकप्रिय ७३ साल के कलाकार को आज दो वक्त के खाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
बता दें कि मोगुलैया ने साल २०२२ में चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार के मंच से लेकर तुर्कयामजाल में निर्माण-स्थल में मजदूरी करने तक उतरने के कारणों की बात करते हुए बताया कि मेरा एक बेटा बीमार है, जिसके लिए दवाओं के लिए मुझे हर महीने कम से कम ७,००० रुपए की जरूरत होती है। मोगुलैया के नौ बच्चे हैं, उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चों की बीमारियों से मौत हो गई और तीन की शादी हो गई है। उनका परिवार मोगुलैया पर ही निर्भर हैं।

केंद्र सरकार को सुध नहीं
पद्मश्री विजेता की इस अवस्था पर केंद्र सरकार सुध नहीं ले रही। इनकी ये दुर्दशा वाकई दयनीय है। मोगुलैया का कहना है कि मैंने काम के लिए कई लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। लोगों ने सहानुभूति व्यक्त की। सभी ने मेरे अतीत की सराहना की और मेरी मदद के लिए मुझे थोड़ी सी रकम भी दी, लेकिन मुझे कोई रोजगार नहीं मिला। कलाकार ने आगे बताया कि हालात तब ज्यादा मुश्किल हो गए, जब हाल ही में राज्य द्वारा स्वीकृत १०,००० रुपए का मासिक मानदेय बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि मैं मदद के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा हूं और जन प्रतिनिधियों से मिल रहा हूं।

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