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परमबीर से थे त्रिपाठी के संबंध!… पेन ड्राइव से खुलेंगे कई राज

पूर्व सीपी के कार्यकाल में हुए थे कई ट्रांजेक्शन

सामना संवाददाता / मुंबई ।  आंगड़िया से वसूली मामले में फरार चल रहे निलंबित आईपीएस अधिकारी सौरभ त्रिपाठी के परमबीर सिंह से घनिष्ठ संबंध होने का खुलासा हुआ है। आंगड़िया से वसूली परमबीर के समय से ही चल रही थी, ऐसी जानकारी सूत्रों से मिली है। अब इस मामले की जांच कर रहे क्राइम ब्रांच को आंगड़िया की तरफ से एक पेन ड्राइव दिया गया है, जिसमें वसूली से संबंधित कई राज दर्ज होने की बात कही जा रही है। इस कथित वसूली मामले की जांच का आश्वासन कल विधान सभा में गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटील ने दिया।
बता दें कि सौरभ त्रिपाठी पर आरोप है कि उन्होंने आयकर विभाग का भय दिखाकर आंगड़ियों से वसूली की है। आंगड़िया एसोसिएशन की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज करके इसकी जांच शुरू की थी। क्राइम ब्रांच की सीआईयू यूनिट इस मामले में पहले ही पुलिस के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया था और उन्हीं की निशानदेही पर सौरभ त्रिपाठी की मुंबई से कानपुर में तक तलाश कर रही है। इस मामले में उनके नौकर को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार त्रिपाठी ने ४० लाख रुपए लखनऊ में अपने नौकर के खाते में भेजे थे।
दिसंबर में दर्ज हुआ था मामला
आंगड़िया एसोसिएशन की ओर से पिछले साल दिसंबर महीने में जबरन वसूली का मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में पुलिस पहले ही तीन पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उनकी निशानदेही पर ही जोन के तत्कालीन डीसीपी सौरभ त्रिपाठी की लगातार तलाश कर रही है। सौरभ त्रिपाठी को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। जबकि पुलिस लखनऊ से त्रिपाठी के एक करीबी को भी गिरफ्तार कर चुकी है। अब दावा किया जा रहा है कि आंगड़िया एसोसिएशन की ओर से एक पेन ड्राइव पुलिस को दी गई है। आंगड़िया से जुड़े लोगों ने भी जो ऑडियो क्लिप मुंबई पुलिस को सौंपी है, उसमें आरोप लगाया गया है कि त्रिपाठी, आंगड़िया व्यापारियों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी शिकायत वापस लेने के लिए उन पर दबाव बना रहे हैं। अब पुलिस जांच कर रही है कि परमबीर के कार्यकाल में शुरू हुए इस वसूली मामले से उनका (परमबीर) कोई संबंध तो नहीं था? हालांकि त्रिपाठी ने भी उनके खिलाफ चल रही प्रारंभिक जांच के दौरान जांच अधिकारियों को एक पेन ड्राइव सौंपी थी, जिसमें मौजूद ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर यह दावा किया था कि आंगड़िया उनसे मिलने आए थे और उस मीटिंग में उन लोगों ने उन्हें कार्रवाई न करने के बदले रिश्वत देने की पेशकश की थी, लेकिन क्राइम बांच के अधिकारियों को संदेह है कि त्रिपाठी ने पेन ड्राइव में जो ऑडियो रिकॉर्डिंग दी थी, वो टेम्पर्ड हो सकती है। सीआईयू ने यह भी पाया कि त्रिपाठी ने एल.टी. मार्ग के पुलिस अधिकारियों को कथित तौर पर आंगड़िया पर छापे मारने के लिए कहा, ताकि वो आंगड़िया पर दबाव बना सके और उनसे महीने के १० लाख रुपए की वसूली की जा सकें। इसी वजह से क्राइम ब्रांच की टीम फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मदद लेने के बारे में विचार कर रही है। भाजपा विधायक आशीष शेलार ने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि सौरभ त्रिपाठी मामले का खुलासा होने से संदेह पैदा हो गया है कि कहीं केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम पर राज्य की प्रशासनिक मशीनरी वसूली का षड्यंत्र तो नहीं रच रही है।

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