मुख्यपृष्ठग्लैमर‘रोज-रोज लोग एक ही स्वाद पसंद नहीं करते!’- कार्तिक आर्यन

‘रोज-रोज लोग एक ही स्वाद पसंद नहीं करते!’- कार्तिक आर्यन

फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’, ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ इन फिल्मों की अपार सफलता के बाद कार्तिक आर्यन स्टारडम का दूसरा नाम बन गए हैं। इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद कार्तिक मॉडलिंग करते हुए अभिनय के क्षेत्र में आए और आज वे सभी के पसंदीदा लोकप्रिय स्टार हैं। जल्द ही कार्तिक करण जौहर की फिल्म में नजर आएंगे, जिसे संदीप मोदी निर्देशित करेंगे। पेश है, कार्तिक आर्यन से

पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

करण जौहर से आपके रिश्ते अब सुलझ गए हैं और आप उनके साथ फिल्म भी कर रहे हैं यह सब कैसे संभव हुआ?

इस मुद्दे पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता। इट इज टु अर्ली टू से ऑफिशियली ऑन दिस डेवलपमेंट! खुशियों का लुत्फ थोड़ा तो उठाने दीजिए। इस बारे में बहुत जल्द खुलासा किया जाएगा। करण और एकता कपूर मिलकर इस फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। इस फिल्म का एनाउंसमेंट वे मेरे जन्मदिन २२ नवंबर के दिन करना चाह रहे हैं। मतलब मेरी खुशियों में बहुत बड़ा इजाफा हुआ न!

‘कभी खुशी कभी गम’ वाला मामला आपके साथ हो रहा है?

आपकी बात में सच्चाई है। मेरी फिल्म ‘सत्यप्रेम की कथा’ सफल रही तो उससे पहले रिलीज हुई मेरी फिल्म ‘शहजादा’ नहीं चली। ‘भूल भुलैया-२’ बहुत पसंद की गई तो ‘लव आजकल’ औसतन चली। ‘पति पत्नी और वो’, ‘लुका छुपी’ को सफलता मिली। लेकिन ऑफ लेट मेरी फिल्में चलने लगीं और मेरी अपनी आइडेंटिटी बढ़ती गई। जो मिला है, उसी में खुशी मानना और आगे बढ़ने पर मेरा विश्वास है।

क्या कभी आपने फिल्म ‘शहजादा’ की असफलता का विश्लेषण किया?

मुझे लगता है कि मुझे फिल्मों की रीमेक में काम नहीं करना चाहिए। देखिए, जिस फिल्म को पहले ही लोगों ने देखा है, उसे बार-बार लोग थिएटर में जाकर क्यों देखेंगे? थिएटर में जाकर कोई फिल्म देखना मतलब दो लोगों के लिए ५०० रुपए तो खर्च हुए ही न! हां, वैसे सफल फिल्मों का रीमेक बनाने का ट्रेंड तो चल रहा है मैं कोशिश करूंगा कि रीमेक फिल्में न करूं।

अमूमन फिल्म इंडस्ट्री में सफल रोमांटिक जोड़ी को भुनाया जाता है कृति सेनन और आपकी जोड़ी का मैजिक क्यों नहीं चल पाया?

सिर्फ रोमांटिक जोड़ियों की वजह से फिल्में नहीं चलती। कहानी, निर्देशन, किरदार, मेविंâग सब कुछ मायने रखता है। फिल्म का संगीत प्रीतम ने दिया था, लेकिन फिर भी अच्छे संगीत पर लोगों का ध्यान नहीं गया। अक्सर फिल्मों का सुपरहिट होना कई मुद्दों पर निर्भर करता है, तभी तो मेकर फिल्म को वंâप्लीट पैकेज बनाने के बारे में सोचते हैं। अगर कहानी लचर हो तब भी ऑडियंस फिल्म देखना पसंद नहीं करेगी। खैर, कृति और मेरी जोड़ी अच्छी है लेकिन सफल जोड़ियां फिल्म नहीं चला सकती। ज्यादातर फिल्मों में मेरी को-स्टार रिपीट नहीं हुई।

हीरो-हीरोइन का रिपीट होना सही है या नहीं?

जोड़ियां अगर दर्शकों द्वारा पसंद की जाती है तो अच्छी बात है, लेकिन आज के दर्शक बोर भी हो सकते हैं उसी जोड़ी को दो से ज्यादा फिल्मों में साथ देखकर। कहा नहीं जा सकता दर्शकों के बदलते टेस्ट पर। किस हीरो के साथ कौन-सी हीरोइन लेनी है, यह तो निर्देशक ही जाने। कलाकारों को इसमें कोई दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए।

अगर आप निर्देशक खुद हैं, तो आप अपनी जोड़ी किस अभिनेत्री के साथ देखना पसंद करेंगे?

सबसे पहली बात तो यह कि मैं निर्देशक हूं नहीं! मेरे निर्देशन में कोई फिल्म भी नहीं बन रही है। मुझे जो लगता है, मैंने आपको कह दिया। दाल-चावल या पूरी-सब्जी अच्छी लगती है, लेकिन रोज-रोज लोग एक ही स्वाद पसंद नहीं करते इसलिए लोग पिज्जा-बर्गर और चायनीज खाने लगे हैं। मेरी ऐसी कोई सोच नहीं और न मेरी कोई फेवरटिजम है, जो निर्देशक चाहते हैं उसे मानना सभी कलाकारों का फर्ज है।

आप फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ कर रहे हैं यह एक बायोग्राफिकल फिल्म है इस फिल्म के बारे में क्या कहना चाहेंगे?

यह फिल्म एक स्पोट्र्स पर्सन पर आधारित है। मैं यह फिल्म करके बहुत खुश हूं। ‘आशिकी-३’, ‘भूल भुलैया-३’ भी कर रहा हूं। मुझे अपने करियर में पहले से ज्यादा मजा आ रहा है, जो फिल्में मेरे पास आ रही हैं, उनमें बहुत विविधता है। मैं सिर्पâ लवर ब्वॉय का रोल नहीं निभाना चाहता। यह नया बदलाव जीवन में नई करवट ले आया है।

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