लोग

कैसे शब्द घुमाते लोग।
नासमझी फैलाते लोग।।
कच्ची पक्की बात बोलकर।
जाहिल हमें बनाते लोग।।
और हकीकत के सीने पर।
हरदम वज्र गिराते लोग।।
बेमानी बेकार बात का।
परचम हैं लहराते लोग।।
अपनी इस प्यारी धरती पर।
सारा रोग बुलाते लोग।।
जो हैं यहां समस्यावादी।
उसका मान बढ़ाते लोग।।
वैचारिक बारूद बिछाकर।
मधुर मधुर मुस्काते लोग।।
बाहर से शैतान बुलाकर।
वतनपरस्ती गाते लोग।।
समझौते पर सब कुछ चलता।
हरदम यही बताते लोग।।
अपने मन में कैंची लेकर।
हमसे हाथ मिलाते लोग।।
शब्दों का जादू कर देते।
गोल गोल बतियाते लोग।।
कैसे शब्द घुमाते लोग।
नासमझी फैलाते लोग।।

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