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बढ़ रहा है लोगों का ‘डिप्रेशन’ … देश में ५ साल में ४ गुना बढ़े मरीज

रामदिनेश यादव / मुंबई
देश में पिछले ५ वर्षों में बदले सियासी, सामाजिक और आर्थिक माहौल के कारण लोगों में अवसाद बढ़ गया है। खासकर पिछले ५ वर्षों में अवसाद ग्रस्त लोगों की संख्या में ४ गुना इजाफा हुआ है। यह सब मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण बढ़ी महंगाई और बेरोजगारी के कारण हो रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग २८ करोड़ लोग अवसाद से ग्रस्त हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से ८० प्रतिशत लोगों को इलाज ही नहीं मिलता, इनमें से २० प्रतिशत मरीज तो कभी डॉक्टर से संपर्क ही नहीं कर पाते हैं। अवसाद ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ने के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। कोई नौकरी जाने से, तो किसी को व्यवसाय में नुकसान होने, आर्थिक तंगी, महंगाई की मार, तो कुछ लोग सामाजिक दूरियों के चलते अवसाद से पीड़ित हैं। ऐसे मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विपक्ष को भी मोदी सरकार पर ताना मारने का मौका मिल गया है। विपक्ष ने इसके लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार बताया है। ‘नेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेन्टल हेल्थ’ द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश में अब २८ प्रतिशत से ज्यादा लोगों का दिमाग असंतुलित हो गया है। ये लोग अवसाद ग्रस्त हैं। वर्ष २०१९ में यह आंकड़ा ७.७ प्रतिशत था। अब देश में यह आंकड़ा लगभग ३० करोड़ के आसपास है। उक्त संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें ३५ की उम्र पार कर चुके लोगों की संख्या सर्वाधिक है। हालात ऐसे हैं कि डिप्रेशन के चलते हर साल लगभग एक लाख लोग आत्महत्या करते हैं। सामान्य तौर पर देश में कुल आत्महत्या करने वालों की दर १२.९ प्रति लाख है। विश्व में मानसिक रोगियों का आंकड़ा ३५ प्रतिशत तक है।
इलाज की समस्या
देश में डिप्रेशन से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए सरकार के पास सुविधाएं नहीं है। ७० प्रतिशत अस्पतालों में डिप्रेशन मरीजों के लिए अलग से डॉक्टर नहीं है। सिर्फ मुंबई जैसे आधुनिक शहर की बात करें तो कई मनपा अस्पतालों में मानसिक रोगों के इलाज के लिए डॉक्टर नहीं हैं। हाल-फिलहाल में दूसरे डॉक्टरों को ट्रेनिंग देकर उन्हें मानसिक रोगों से ग्रस्त मरीजों की काउंसिलिंग के लिए तैयार किया है। पिछले ६ महीने में लगभग ३ हजार मरीज मनपा के अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, ८० प्रतिशत लोगों को इलाज नहीं मिलता है।
विपक्ष का हमला
कांग्रेस के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत के अनुसार मोदी सरकार के शासन में बहुत कुछ चीजें लीक से हटकर हुई हैं, जैसे नोटबंदी, जीएसटी, और सरकारी कंपनियों में कांट्रेक्ट लेबर, सामाजिक द्वेष आदि। इससे देश की अर्थ प्रणाली को बहुत हद तक नुकसान पहुंचा है, जिससे लोगों में मानसिक तनाव जैसी बीमारी बढ़ी है। इसके लिए मोदी सरकार ही जिम्मेदार है। मोदी सरकार की वजह से लोगों में अवसाद बढ़ा है।
डिप्रेशन में शराब है खराब
अवसाद के शिकार लोगों पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि कुछ लोग कहते हैं, ब्रेकअप, नौकरी छूटने या जीवन के तनाव के बाद अपने दुखों को दूर करने के लिए उन्होंने शराब पीना शुरू किया। पर शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि शराब असल में इन समस्याओं को दूर नहीं करती है बल्कि इन्हें दीर्घकालिक रूप से और बढ़ा देती है। शोध में शराब के सेवन और अवसाद के बीच भी एक मजबूत संबंध के बारे में पता चलता है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं कि वास्तविकता यह है कि शराब असल में अवसाद की जटिलताओं को और अधिक बढ़ाने वाली हो सकती है। दीर्घकालिक तौर पर ये रोग के निदान में देरी का कारण बन सकती है।
दोगुना हुई शराबी महिलाओं की तादाद
अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया, जिन महिलाओं में अवसाद का इतिहास रहा है, उनमें शराब पीने की आशंका दोगुनी से भी अधिक हो सकती है। शराब पीने से अवसाद के लक्षण और बदतर हो सकते हैं। इसके कारण कई लोगों में आत्महत्या के विचार आने की आशंका भी बढ़ जाती है।

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