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टारगेट किलिंग से दहशत फैलाकर पीएफआई चाहता था गृह युद्ध!

  • २०४७ तक हिंदुस्थान को बनाना चाहते थे इस्लामिक राष्ट्र

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई के खिलाफ विस्तृत जांच और छापेमारी के बाद केंद्र सरकार ने पीएफआई और उससे जुड़े कई अन्य संगठनों पर बुधवार (२८ सितंबर) को प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन पीएफआई एवं उसके सहयोगी संगठनों से जड़े नए-नए सनसनीखेज खुलासों का दौर अनवरत जारी है। जांच अधिकारियों की माने तो खुद को सामाजिक विकास, शारीरिक शिक्षा से जुड़े व्यक्तियों के संगठन के रूप में प्रदर्शित करनेवाले इस समूह से जुड़े कट्टरपंथी असल में हिंदुस्थान में मुसलमानों के अंदर कट्टरवाद की ज्वाला को दावानल बनाना चाहते थे। इस समूह के लोग भीड़ जुटा कर लोगों को उकसाने वाले व्याख्यान देते थे। इनके झांसे में फंसे प्रतिभागियों से वे आत्मरक्षा के नाम पर घर में शस्त्र, छतों पर ईंट -पत्थर, नुकीली चीजें आदि रखने को कहते थे। ये मजहबी घृणा फैला कर दूसरे धर्म के लोगों पर लक्षित हमले बढ़ाने की मंशा रखते थे। इनका मुख्य लक्ष्य वर्ष २०४७ तक हिंदुस्थान को इस्लामिक देश बनाना था। देश की एकता खंडित करने की साजिश रचने वाले पीएफआई के सदस्यों की धरपकड़ देशभर में जारी है।
लव जिहाद के लिए देता था धन
एजेंसियों ने जांच के बाद बताया है कि पीएफआई के खिलाफ १,४०० केस दर्ज हो चुके हैं। ये मामले गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम-१९६७, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और घ्झ्ण् के तहत देश भर में दर्ज हुए हैं। पीएफआई के शीर्ष नेताओं और संदिग्धों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस संगठन ने विभिन्न खाड़ी देशों में जिला कार्यकारी समितियों का गठन किया था। ‘द इंडिया फ्रेटरनिटी फोरम’ और ‘इंडियन सोशल फोरम’ इस संगठन के विदेशी समूह थे। एक अधिकारी ने जानकारी दी है कि ‘इन समूहों को फंडिंग एकत्रित करने के लिए प्रवासी मुस्लिमों के साथ जुड़ने का कार्य सौंपा गया था। आमतौर पर धन नकद में जुटाया जाता था और हवाला के माध्यम से हिंदुस्थान में लाया जाता था। या फिर हिंदुस्थान में उन प्रवासी मुस्लिमों के रिश्तेदारों और पीएफआई सदस्यों के दोस्तों के खातों में पैसे भेजकर भी सहायता की जाती थी।’ पता चला है कि पीएफआई एक गुप्त विंग भी ऑपरेट करता है। यह चुनिंदा हिंदूवादी नेताओं पर हमला करने की योजना बनाता है और उसे अंजाम देता है। यह भी खुलासा किया है कि पीएफआई २०४७ तक भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने के मिशन पर काम कर रहा था, साथ ही वो हिंदू लड़कियों के साथ लव जिहाद के लिए मुस्लिम युवकों को नकद पैसे भी देता था।
ईशनिंदा के आरोप में काटा था प्रोफेसर का हाथ
कोच्चि। करीब १२ साल पहले पीएफआई कार्यकर्ताओं ने ईशनिंदा करने के आरोप में प्रोफेसर टी.जे.जोसेफ का हाथ काट डाला था क्योंकि कथित तौर पर प्रोफेसर ने पैगंबर मोहम्मद और कुरान पर टिप्पणी की थी। इसके बाद प्रोफेसर ने अपनी नौकरी भी खो दी थी। उनकी पत्नी ने भी अपना जीवन समाप्त कर लिया था।
भाजपा नेता पर जानलेवा हमला
गुना। पीएफआई के खिलाफ आवाज उठाना भाजपा नेता को भारी पड़ गया। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष जाकिर बावड़ी पर हमलावरों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
बाबरी-गुजरात दंगे के वीडियो से फैलाते थे भ्रम
जांच एजेसियों की जांच में पता चला है कि पीएफआई और उसके सहयोगी संगठन युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए बाबरी विध्वंस और गुजरात दंगों के वीडियो का जमकर दुरुपयोग कर रहे थे। दावा किया जाता है कि १९९२ के बाबरी मस्जिद विध्वंस और २००२ के गुजरात दंगों के वीडियो क्लिपिंग के जरिए पीएफआई लड़ाकों को कट्टरपंथी बनाता था। कई कैडरों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया गया था।

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