मुख्यपृष्ठस्तंभस्तंभ : भाजपा में वंशवाद!

स्तंभ : भाजपा में वंशवाद!

  • राजन पारकर

भाजपा अन्य र्पािटयों को वंशवादी मानती है लेकिन कभी अपने दामन में झांककर नहीं देखती। उनके भी वंशवाद की एक लंबी सूची है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में बार-बार कहा है कि भाजपा में वंशवाद की कोई गुंजाइश नहीं है और वंशवाद की राजनीति से देश का नुकसान हुआ है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने विभिन्न राज्यों में कांग्रेस या क्षेत्रीय दलों का गला घोंटने के लिए वंशवाद के खिलाफ आवाज उठाई है। भले ही भाजपा नेता दावा करते हैं कि हमारा कोई वंश नहीं है लेकिन दिल्ली से लेकर सड़कों तक हम भाजपा में वंशवाद का अनुभव करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली कैबिनेट में भी वंशवाद की झलक देखने को मिली है। पार्टी अध्यक्ष नड्डा की सास जयश्री बनर्जी, जिन्होंने वंशवाद के खिलाफ आवाज उठाई, ने मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार में मंत्री के साथ-साथ लोकसभा सदस्य के रूप में कार्य किया।
मोदी के तमाम नेताओं का दावा है कि भाजपा में वंशवाद नहीं है। लेकिन भाजपा में भी दूसरी पीढ़ी के नेताओं को आगे लाया जा रहा है। किसी भी राजनीतिक दल में निर्वाचित होने की क्षमता उम्मीदवारी देते समय विचार किए जानेवाले मुद्दों में से एक है। भाजपा के साथ भी ऐसा ही न्याय होना चाहिए। इसलिए पार्टी नेतृत्व भले ही मुंह फेर ले, लेकिन सांसदों-विधायकों के लिए नेताओं की संतान ही योग्य मानी गई। गत दिनों हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट वंशवाद से भरी हुई थी। भाजपा में वंशवाद की शुरुआत राजधानी दिल्ली से ही होती है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पीयूष गोयल, अनुराग ठाकुर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और मोदी के मंत्रिमंडल में अन्य मंत्रियों की वंशवादी पृष्ठभूमि है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के बेटे उत्तर प्रदेश में विधायक हैं। पार्टी के सांसदों की सूची पर एक नजर डालें तो वंशवाद का अंदाजा लग जाता है।
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे, प्रमोद महाजन की बेटी, गोपीनाथ मुंडे की बेटी, वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के बेटे, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा के बेटे, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र, पूर्व केंद्रीय मंत्री सी. पी. ठाकुर के पुत्र इसके उत्तम उदाहरण हैं। इसके अलावा अन्य नेताओं के बच्चों ने सांसद और विधायक के रूप में कार्य किया है। तय है कि इन्हीं नेताओं के दबाव में बच्चों को उम्मीदवारी मिली है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का एक बेटा सांसद है। येदियुरप्पा ने घोषणा की कि उनका दूसरा बेटा अगले साल होनेवाले विधानसभा चुनाव में उनकी जगह विधानसभा चुनाव लड़ेगा। मोदी और नड्डा सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि भाजपा में वंशवाद के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन साथ ही येदियुरप्पा जैसे नेता सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि उनका बेटा उम्मीदवार होगा। लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा के करीब ४०० सांसद हैं। इनमें से ४५ सांसद वंशवादी पृष्ठभूमि से हैं।
महाराष्ट्र भाजपा में भाई-भतीजावाद चरम पर है। राज्य के २३ भाजपा सांसदों में स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती पवार, पूनम महाजन, प्रीतम मुंडे, रक्षा खडसे, सुजय विखे-पाटील, हिना गावित सभी वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं। भाजपा के १०६ विधायकों में से लगभग २५ विधायक वंशवादी हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे नितेश, केंद्रीय रेल राज्यमंत्री दानवे के बेटे, पूर्व मंत्री दत्ता राणे के बेटे, दत्ता मेघे के बेटे शामिल हैं। प्रदेश भाजपा में संकटमोचक गिरीश महाजन की पत्नी जामनेर की मेयर थीं। महाजन ने इस बात का ध्यान रखा था कि दोनों सदनों में विधायक और महापौर का पद बना रहे। एकनाथ खडसे भाजपा छोड़कर राकांपा में शामिल हो गए। लेकिन जब खडसे भाजपा में थे, तब उनके परिवार के सभी सदस्य विभिन्न पदों पर कार्यरत थे। खडसे की बहू रक्षा खडसे भाजपा सांसद हैं। पत्नी दुग्ध संघ की अध्यक्ष थीं। रेल राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे के बेटे विधायक हैं और दानवे उन्हें मंत्री पद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। दिवंगत पार्टी नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा फडणवीस सरकार में मंत्री थीं। एक और बेटी प्रीतम बीड से सांसद हैं। विधानसभा चुनाव में हारने के बाद भी पंकजा हमेशा इस बात पर जोर देती हैं कि उन्हें विधान परिषद का विधायक बनाया जाए। प्रमोद महाजन की बेटी पूनम सांसद चुनी गई हैं। दिवंगत नेता पांडुरंग फुंडकर और डॉ. दौलत अहेर के बच्चे विधायक हैं। सातारा में उदयनराजे भोसले को राज्यसभा सीट दी गई और उनके चचेरे भाई शिवेंद्रराजे भोसले को भाजपा ने विधायक सीट दी।
देवेंद्र फडणवीस ने एक शिक्षित विधायक, मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता के रूप में अपना नेतृत्व साबित किया हैं। लेकिन फडणवीस भी वंशवाद की देन है। पिता गंगाधरराव फडणवीस विधायक थे और चाची शोभाताई फडणवीस मंत्री थीं। अपने पिता की पृष्ठभूमि के कारण फडणवीस ने बहुत कम उम्र में पार्टी में प्रमुखता प्राप्त की। उन्हें नागपुर के मेयर के पद पर मौका मिला। जबकि कई वरिष्ठ सदस्य थे, फडणवीस को कम उम्र में महत्वपूर्ण पदों पर काम करने का अवसर मिला। कर्नाटक भाजपा के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी एक वंशवादी नेता हैं। उनके पिता एस. आऱ बोम्मई कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम खांडू के पिता भी मुख्यमंत्री थे। यानी कर्नाटक और अरुणाचल प्रदेश के भाजपा के मुख्यमंत्री वंशवाद से आए हैं। केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पिता ने वाजपेयी सरकार में सेवा की। वंशवाद के कारण कांग्रेस का विरोध करने वाली भाजपा को भी सत्ता की ताकत बटोरने के लिए वंशवाद पर निर्भर रहना पड़ता है। ये दिल्ली से गली तक की तस्वीर है।

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