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पिया कइ गइले सूना फगुनवां

सुरेश मिश्र।  शादी तो बचपन में ही हो गई थी। बीस साल की हो गई तो प्रियतम गौना लाए। मगर गौना लाए कुछ दिन ही हुए थे कि प्रियतम कमाने मुंबई चले गए। नइहर में कितने सपने संजोए थे सब धरे के धरे रह गए। नायिका बहुत उदास रहने लगी। एक दिन सखी ने कारण पूछा तो वह अधीर हो गई और कहने लगी-
हथवा क मेंहदी न छूटल सखी,
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
नइहर में देखलीं हम केतना सपनवां,
सेजिया सजे हमरी, चहके कंगनवां,
यहिं आके किस्मतिया फूटल सखी,
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
केतना मनउले न मानल सजनवां,
निर्मोही बनिके गइल बेइमनवां,
जाने काहें हमसी रूठल सखी,
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
नैना झरें जइसे बरसइ बदरिया,
नागिन-सी लागेला हमके सेजरिया,
रहि-रहि के देहिया भी टूटल सखी
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
परदेश में जउ बसल पिय क मनवां,
काहें क लइ अउलेन हमरा गवनवां,
सोनवां भइल आजु पीतल सखी,
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
मुंबई में का बा बलम ना बतावइं,
दिल तोरि हमरा भला काउ पावइं,
नेहिया क डोर काहें टूटल सखी,
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
करबइ किसानी हम दुइनउ परानी,
गउवां में भी बा सजन दाना पानी
इहां भी देखावइ सब गूगल सखी,
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।
पढ़ि सामना सारे भइले दिवाना,
परदेश भागइ क ढूंढ़इ बहाना,
भगिया त हम सबका फूटल सखी
पिया कइ गइले सूना फगुनवां।

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