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प्लान `४-डी’ तैयार चूहों की `नो एंट्री’! … लेप्टो बीमारी के हैं कारक

•  `मूषक नियंत्रण’ अभियान जारी
सामना संवाददाता / मुंबई
लेप्टो के कारक चूहों का बंदोबस्त करने के लिए मनपा ने प्लान `४डी’ तैयार किया है। इस प्लान से बीमारी फैलानेवाले चूहों की आबादी न केवल कंट्रोल होगी, बल्कि इनकी घरों में एंट्री भी रुकेगी। इतना ही नहीं चूहों के आश्रय को खत्म करने के लिए घर के आस-पास कोई भी संसाधन नहीं रखा जाएगा। इसके लिए कीटनाशक विभाग द्वारा व्यापक जनजागरूकता पैदा की जाएगी।
मुंबई में भले ही पूरे अगस्त महीने में बारिश का ब्रेक लग गया, लेकिन मानसूनी बीमारियों ने जोर पकड़ लिया है। इसमें मलेरिया, डेंगू, लेप्टो स्वाइन फ्लू, गैस्ट्रो, पीलिया और चिकनगुनिया जैसी मौसमी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं इसलिए मनपा के स्वास्थ्य और कीटनाशक नियंत्रण विभाग मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए २४ घंटे काम कर रहे हैं। मनपा के प्रमुख अस्पतालों के साथ-साथ उपनगरीय अस्पतालों में लगभग साढ़े तीन हजार बेड तैयार रखे गए हैं। इसी क्रम में कीटनाशक नियंत्रण विभाग ने लेप्टो के प्रसार के लिए जिम्मेदार चूहों को नियंत्रित करने के लिए ४डी विधि अपनाने का निर्णय लिया है।
४ लाख चूहों का हुआ सफाया
लेप्टो प्रसार का कारण बननेवाले चूहों को खत्म करने के अभियान के तहत जनवरी से अब तक चार लाख चूहों का सफाया किया जा चुका है। मानसून की पृष्ठभूमि में चूहों के प्रकोप वाले स्थानों पर रात के समय जहरीली गोलियों को रखकर चूहा नाशक अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही नागरिकों की शिकायत के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। चूहों की प्रजनन दर, उसके कारण बीमारी के संभावित प्रसार और चूहों से होनेवाले विनाश पर अंकुश लगाने के लिए `मूषक नियंत्रण’ उपक्रम चलाया जा रहा है। एक चूहे को मारने में २० से २५ रुपए खर्च हो रहे हैं।
ऐसा है प्लान
चूहों को घर में घुसने से रोकने के लिए दरवाजे की दहलीज को ऊंचा करना, चूहों को छिपने का अवसर प्रदान करनेवाली वस्तुएं न रखें, चूहे को भोजन देना बंद कर दें, चूहे को पकड़ने के लिए पिंजरा रखें और घर में प्रवेश करने से रोकने का आखिरी विकल्प चूहे को जहर देना है।

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