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ग्रहों की युति का जीवन पर पड़ता है असर!

पं. राजेंद्र दुबे
जन्म कुंडली के किसी एक ही भाव में जब दो या अधिक ग्रह एक साथ बैठे होते हैं, उन्हें `ग्रहों की युति’ कहा जाता है। विभिन्न ग्रहों की युति सामान्य से कुछ प्रभाव प्रकट करती हैं। इस प्रकरण में विभिन्न ग्रहों की युति के सामान्य प्रभाव का उल्लेख किया जा रहा है। स्मरणीय है कि ग्रहों की युति जन्म कुंडली के विभिन्न भावों तथा राशियों में होती है, अत: इनके प्रभाव का निर्णय करते समय भाव, राशि अन्य स्थितियों पर विचार करना भी आवश्यक है।

युति का फल
सूर्य-चंद्र – इनकी युति से जातक पराक्रमी, कपटी, अहंकारी, क्षुद्र-स्वभाव, चतुर, कार्य-कुशल, स्त्रीवशी, विषयासक्त तथा प्राय: पाषाण-वस्तुओं का व्यवसाय करने वाला होता है।
सूर्य-मंगल – जातक पाप-बुद्धि, क्रोधी, कलही, मिथ्यावादी मूर्ख, बलवान, तेजस्वी, धर्म व शुभकर्म रहित तथा स्वबंधु-बांधवों से प्रेम रखने वाला होता है।
मंगल-बुध – जातक विद्वान, बुद्धिमान, यशस्वी, सेवा कुशल, प्रियवादी, मंत्री, वेदज्ञ, स्थिर-धनी, गीत-वाद्य एवं काव्य आदि में कुशल तथा राज-सम्मान प्राप्त होता है।
सूर्य-गुरु – जातक धनी, धर्मात्मा, शास्त्रज्ञ, राजमान्य- पुरोहित, चतुर, परोपकारी, कर्म कुशल तथा मित्रवान् होता है।
सूर्य-शुक्र – जातक बलवान, बुद्धिमान, संगीत वाद्य, शास्त्र आदि में कुशल, कार्यक्षम, क्षीण दृष्टि, स्त्री प्रिय तथा स्त्री द्वारा धन प्राप्त होता है।
सूर्य-शनि – जातक विद्वान, कार्य कुशल, बुद्धिमान, कार्यकुशल तथा वृद्ध जैसा आचरण करने वाला होता है। स्त्रीपुत्रादि से सुखी, अन्य मत से दुखी होता है।
चंद्र-मंगल – जातक प्रतापी, युद्ध-कुशल, धनी, शिल्प, व्यवसाय द्वारा जीविकोपार्जन करने वाला तथा रक्त विकारादि रोगों से ग्रस्त होता है।
चंद्र-बुध – जातक धनी, गुणी, सुंदर, हंसमुख, प्रियवादी, हृदय, कवि, कुलधर्म पालक, वाक्पटु तथा दुर्बल शरीर वाला होता है।
चंद्र-गुरु – जातक सुशील, परोपकारी, धर्मात्मा, गुप्त मंत्रज्ञ, मैत्री का निर्वाह करने वाला, भाई-बहनों को स्नेह करने वाला, देवद्विज भक्त तथा विनम्र स्वभाव का होता है।
चंद्र-शुक्र – जातक कलही, व्यसनी वस्तुओं के क्रय-विक्रय में कुशल, शूद्रवत आचरण करने वाला, अल्प वस्त्राभूषण वाला, अनेक कार्यों का ज्ञाता तथा सुगंध प्रिय होता है।
चंद्र-शनि – जातक आचरण एवं पुरुषार्थ हीन, अल्प संततिवान, व्यवसाय एवं वेश्या द्वारा धन लाभ पाने वाला, वृद्धा स्त्री में आसक्त तथा परस्त्री प्रेमी होता है।
मंगल-बुध – जातक कुरूप, निधन, कृपण, मल्लयुद्ध में कुशल, अनेक प्रकार की औषधियों का सेवन करने वाला, स्वर्ण अथवा लोहे का व्यवसायी तथा विधवा एवं अन्य स्त्रियों का प्रेमी होता है।
मंगल-गुरु – जातक शिल्पज्ञ, वाक्पटु, मेधावी, मंत्रज्ञ, शास्त्रज्ञ, चतुर, शीलवान, सेनाधिकारी अथवा उच्च पदस्थ, प्रधान पद पाने वाला तथा अर्थ साधन में निपुण होता है।
मंगल-शुक्र – जातक गणितज्ञ, मिथ्यावादी, जुआरी, प्रपंची, पापी, अहंकारी, भोगी, सबसे शत्रुता रखनेवाला, परस्त्री गामी, शठ, गुणी, परंतुु समाज में सम्मानित होता है।
मंगल-शनि – जातक इंद्रजाल आदि का ज्ञाता, कलहप्रिय, विष एवं मदिरा बेचने वाला, अल्पधनी, झगड़ालू, शस्त्र एवं शास्त्रज्ञ, सुखहीन, अपयशी, चोर, मिथ्यावादी, मित्रहीन तथा स्वधर्म-त्यागी होता है।
बुध-गुरु – जातक संगीत कुशल, सुखी, पंडित, विनयी, उदार, श्रेष्ठ, गुणी, धैर्यवान, नीतिज्ञ तथा सुगंधित वस्तुओं का प्रेमी होता है।
बुध-शुक्र – जातक धनी, नीतिज्ञ, प्रियवादी, सुखी, प्रतापी, संगीतज्ञ, वेदज्ञ, शिल्प कुशल, हास्य प्रिय, चतुर, सुंदर, सदैव आनंदित तथा दुर्बल शरीर वाला होता है।
बुध-शनि – जातक कलह प्रिय, चंचल, भ्रमणशील, उद्योगहीन, संगीत-काव्य आदि में कुशल, दुर्बल शरीर वाला तथा उचित वचन बोलने वाला होता है।
गुरु-शुक्र – जातक धन, मित्र, पुत्र, स्त्री आदि से सुखी, विद्वान, गुणी, धर्मात्मा, शास्त्रज्ञ, महासुखी, यशस्वी, विद्या द्वारा जीविकोपार्जन करने वाला तथा सुंदर पत्नी वाला होता है।
गुरु-शनि – जातक शूरवीर, यशस्वी, सेनापति, प्रधान, कला कुशल, धनवान तथा स्त्री द्वारा मनोभिलाषित फलों को प्राप्त करने वाला होता है।
शुक्र-शनि – जातक शिल्प लेख, चित्रकारी तथा पत्थर आदि की वस्तुएं बनाने में कुशल, आनंदी, चंचल-बुद्धि, पशुपालक, उन्मत्त प्रकृति, दारुण संग्राम करने वाला तथा लवण एवं अम्ल-रस प्रेमी होता है।

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