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योगी के राज में नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़!….न किताबें छपी, न मिले बैग कैसे सुधरेगा नौनिहालों का भविष्य

• योगी जी के स्कूल चलो अभियान पर लगा पलीता…झोल के `खेल’ में शिक्षा!
• छात्रों की न किताबें छपी, न मिले बैग
•  कैसे सुधरेगा नौनिहालों का भविष्य

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ । यूपी में भाजपा की योगी सरकार में भ्रष्टाचार खुल कर दिखाई देने लगा है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पाठ्य-पुस्तकों में प्रकाशकों एवं विभागीय अधिकारियों के बीच झोल का खेल जोरों पर चल रहा है। जिसके कारण अब तक बेसिक शिक्षा में नौनिहालों का भविष्य पाठ्य-पुस्तकों के समय पर न मिल पाने से चौपट हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार इस प्रक्रिया को इतना पारदर्शी बनाए कि प्रकाशक और विभागीय अधिकारी के बीच कोई सांठ-गांठ न रहे। लेकिन सरकार में बैठे आला अधिकारियों की मनमानी का आलम यह हो गया है कि उन्हें केवल कागजों पर ही काम करना है, जबकि हकीकत में कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में कल स्कूल चलो अभियान का आगाज किया। एक करोड़ नए छात्रों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश के सभी १.५८ लाख स्कूलों को स्मार्ट सुविधाओं से युक्त करने की तैयारी है। लेकिन सच यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग के पास इस अभियान को गति देने के लिए कोई इंतजाम ही नहीं हैं। बच्चों की न तो किताबें छपी हैं न उनके पास बैग हैं और न ही जूते-ड्रेस भी हैं। भीषण गर्मी में स्कूलों में पीने का पानी और पंखे तक भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बच्चों का स्कूलों में वैâसे उपस्थिति दर्ज होगी। कड़वा सच यह है कि योगी सरकार अभी तक छात्रों को नवीन सत्र प्रारंभ होने से पूर्व किताबों का वितरण नहीं कर पाई है।
करना पड़ेगा किताबों का इंतजार
बेसिक स्कूलों में शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते बच्चों को ३ माह यानी जुलाई तक ही नई किताबें मिल पाएंगी। नवीन सत्र को प्रारंभ हुए करीब आधा सप्ताह गुजर गया। छात्र बिना पाठ्य-पुस्तकों के ही पढ़ने के लिए मजबूर हुए हैं। नए सत्र की किताबों को छात्रों के बैग तक पहुंचने में दो माह और भी लगेंगे।
ग्राम पंचायतें भी डाल रहीं डाका
ग्राम पंचायत स्तरों पर भ्रष्टाचार के चलते स्कूलों की दुर्दशा हो रही है। सरकारी पैसे को ग्राम पंचायत स्तर पर बंदरबांट कर लिया जाता है। तमाम स्कूलों में बिजली के कनेक्शन हैं लेकिन लाइट फिटिंग नहीं हुई। पंखे नहीं हैं। कई स्कूलों में बच्चों के पीने के लिए पानी की सुविधा भी नहीं है। इस असुविधा के कारण भीषण गर्मी में बच्चे स्कूलों में वैâसे पढ़ पाएंगे? शिक्षकों का कहना है कि सरकारी पैसे का स्कूलों पर ईमानदारी से खर्च नहीं किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर उसे आपस में बांट लिया जाता है।

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