मुख्यपृष्ठनए समाचारपीएम ने मुक्ति की छोड़ी हवाइयां ...टीबी की नहीं मिल रहीं दवाइयां! 

पीएम ने मुक्ति की छोड़ी हवाइयां …टीबी की नहीं मिल रहीं दवाइयां! 

मरीजों ने दिखाई मोदी को सच्चाई
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०२५ तक हिंदुस्थान को टीबी मुक्त बनाने की घोषणा की है, लेकिन पिछले कई महीनों से टीबी रोगियों को दवा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री की घोषणा हवा-हवाई साबित हुई है, जिस पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। मुंबई समेत राज्य में एमडीआर टीबी के मरीजों को जून से दवा नहीं मिली है। इसके बाद मरीजों ने नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर सच्चाई बताई है और गुहार लगाते हुए सवाल किया है कि अगर सरकारी अस्पतालों में ही दवाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो देश टीबी मुक्त वैâसे होगा?
राज्य के सरकारी अस्पतालों और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर पिछले तीन माह से टीबी रोग की दवा उपलब्ध नहीं है। इसके चलते मुंबई में लगभग ११,००० एमडीआर टीबी के रोगी प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी दवा की दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। एमडीआर टीबी के मरीजों को पांच दवाएं दी जाती हैं। इनमें से साइक्लोसेरीन, लाइनजोलिड और क्लोफाजिमाइन स्टॉक में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को ये दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
मरीजों को नहीं मिल रहा संतोषजनक जवाब
मरीजों का कहना है कि मुंबई टीबी रोग नियंत्रण विभाग से यह पूछने पर कि उन्हें ये दवाएं कब मिलेंगी, इस पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। टीबी मरीजों के लिए काम करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र भेजकर दवाओं की कमी के कारण टीबी मरीजों की दुर्दशा से अवगत कराया है। पत्र में यह भी पूछा गया है कि दवाएं क्यों नहीं मिल रही हैं, इसकी जानकारी भी जाहिर की जाए।

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