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कवियों के बीच कविता

तहलकाखेज कवियों के बीच
अपनी कविता रखते हुए
उसने कहा-यह समय
कविता करने का नहीं
कविता में कूदने का है
सर पर खतरा उठाकर
अभिव्यक्ति का।
जैसे कूदे थे हमारे पूर्वज
खुद को जोखिम में डालकर
गोर्की लू शुन प्रेमचंद निराला
और तमाम क्रांतिधर्मी
इस व्यवस्था के खिलाफ
एक उत्तम व्यवस्था के लिए
जिसमें प्यार हो, भाईचारा हो
संवेदना हो, शांति हो
समानता हो वह भी
व्यावहारिक रूप से
एकदम सुंदर
चाक-चौबंद मनभावन
और खुशहाल भी
सर्व जन सुखाय
सर्व जन हिताय च।।

-अन्वेषी

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