तन्हाई का जहर

अब तू ही बता तेरे बिन कैसे जिऊंगा मैं
तन्हाई का जहर पिऊंगा मैं
‌सब खत्म हुआ जो वो पल छिन गया
अब तो जीने से ऊब गया हूं मैं
तेरी याद सताती है
मुझको नींद नहीं आती है
आंसू बहते हैं बरसातों की तरह
तड़पता रहता हूं मैं परवानों की तरह
वो समां बदल गया
मिलते थे हम दोनों जहां
क्यूं रुठ गया मेरा यार
क्या झूठा था तेरा प्यार
अब तू ही बता तेरे बिन कैसे जिऊंगा मैं
तन्हाई का जहर पीऊंगा मैं
खामोश कर दिया है तेरी जुदाई ने
मुझे रुला दिया मेरी वफाई ने
किनारा क्यूं खो गया
सितारा क्यूं सो गया
दूर हुईं क्यूं मुस्कुराहटें
बिछड़ गईं क्यूं अपनी राहें
अब तू ही बता तेरे बिन कैसे जिऊंगा मैं
तन्हाई का जहर पीऊंगा मैं
तेरी झूठी मोहब्बत ने सपना दिखाया
मेरे अरमां को राख बनाया
अपना वादा तोड़ दिया
भूलूंगा कैसे धोखा दिया
अब तू ही बता तेरे बिन कैसे जिऊंगा मैं
तन्हाई का जहर पिऊंगा मैं।
-अन्नपूर्णा कौल

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