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पोलियो की आहट! ब्रिटेन में सीवेज से पोलियो वायरस मिलने से मचा हड़कंप

  • अलर्ट जारी, डब्ल्यूएचओ ने भी जारी की चेतावनी

एजेंसी / जेनेवा

पोलियो वायरस का खतरा एक बार फिर डराने लगा है। पिछले दो-ढाई वर्षों से जहां एक ओर समूची दुनिया कोरोना वायरस से जुझ रही है, वहीं लंदन से एक बेहद खतरनाक और चौंकानेवाला मामला सामने आया है। लंदन में सीवेज के सैंपल से पोलियो वायरस मिलने से ब्रिटेन में हड़कंप मच गया है। हालंकि पोलियोमुक्त मुहिम के अंतर्गत पिछले कई सालों से कई प्रयोग किए जा चुके हैं ऐसे में लंदन में पोलियों वायरस का मिलना बेहद चिंता का विषय है।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि टीकों से प्राप्त एक प्रकार के पोलियो वायरस का पता चलने के बाद इस मामले को लेकर जांच चल रही है। वायरस मिलने के बाद ब्रिटेन में अलर्ट जारी कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी एक बयान में कहा कि ब्रिटिश राजधानी लंदन में सीवेज के सैंपल में `पोलियो वायरस टाइप-२’ पाया गया है। हालांकि करीब दो दशक पहले पोलियो की बीमारी को ब्रिटेन से खत्म कर दिया गया था और इसके बाद से यहां इंसानों में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूएचओ ने बयान जारी कर कहा, `यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वायरस को केवल पर्यावरणीय सैंपल से अलग किया गया है।’ साथ ही यह जोर देकर कहा कि `हाल में लकवा के किसी भी संबंधित मामले का पता नहीं चला है। कहीं भी पोलियो वायरस का कोई भी वैरिएंट हर जगह बच्चों के लिए खतरा साबित हो सकता है।’ गौरतलब है कि १९८८ के बाद से मामलों में ९९ प्रतिशत की कमी आई है। १२५ देशों में पोलियो का प्रकोप था और दुनिया भर में ३५०,००० मामले दर्ज किए गए थे। साल २००३ में ब्रिटेन को पोलियोमुक्त देश घोषित किया गया था। उसके बाद से अब तक यहां कोई नया मामला सामने नहीं आया है। पोलियो वायरस का खतरनाक संस्करण अब केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान में मौजूद है। हालांकि पोलियो सहित अन्य खतरनाक बीमारियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही है। ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने इसी क्रम में फरवरी और मई महीने में सीवेज के गंदे पानी के सैंपल लिए थे।
रिपोर्ट की मानें तो ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) आंत में रेप्लिकेट बनाता है और मल-दूषित पानी के माध्यम से दूसरों के अंदर आसानी से ट्रांसफर हो सकता है। इसका मतलब यह है कि यह वायरस उस बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाएगा, जिसका टीकाकरण हो चुका है, लेकिन उन जगहों पर इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है, जहां गंदगी हो और टीकाकरण की संख्या कम हो।

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